कृषि समाचार

Chilli Crop Pest : मौसम की मार से मिर्ची की फसल में कीट प्रकोप, खतरे में किसानों की मेहनत

लगातार बदली, नमी और बारिश से थ्रिप्स-व्हाइट फ्लाई का हमला; दो बार दवा छिड़कने के बाद भी राहत नहीं, किसान उद्यान विभाग से मदद की मांग कर रहे।

Chilli Crop Pest लगातार खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धूप नहीं निकलने, खेतों में नमी बने रहने और रुक-रुककर बारिश के कारण मिर्ची की फसल में कीट प्रकोप (Pest Infestation) तेजी से फैल रहा है। कई किसानों के खेतों में पौधों की पत्तियां सिकुड़ने लगी हैं, फूल झड़ रहे हैं और नई कोंपलें पीली पड़ रही हैं। कीटनाशक के छिड़काव के बाद भी असर नहीं होने से किसान परेशान हैं।

सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड के डोंगरीपाली क्षेत्र (Chilli Crop Pest) के धौंरादरहा, छैलभांठा, कालाखुंटा, डोसरबहाल, जोगनीपाली, लीमपाली, बनहर, दुलोपाली, झिंकीपाली, डोंगरीपाली, गौरडीह, रंगाडीह, भराली और डूमरपाली सहित आसपास के गांवों में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में मिर्ची की खेती प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार इस बार क्षेत्र में 50 एकड़ से अधिक में मिर्ची की फसल लगाई गई है।

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तीन-चार साल से बढ़ा मिर्ची की खेती का रुझान

डोंगरीपाली क्षेत्र के किसानों का पिछले तीन-चार वर्षों में मिर्ची की खेती (Chilli Crop Pest) की ओर रुझान बढ़ा है। बंपर पैदावार और बाजार में अच्छे दाम मिलने के कारण किसानों ने टिकरा जमीन पर भी बड़े पैमाने पर मिर्ची लगाई। इस बार भी किसानों को अच्छी फसल और आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन लगातार खराब मौसम ने मुश्किल बढ़ा दी है।

 

Chilli Crop Pest : मौसम की मार से मिर्ची की फसल में कीट प्रकोप, खतरे में किसानों की मेहनत

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थ्रिप्स, सफेद मक्खी और माइट का प्रकोप

किसानों के मुताबिक पिछले 15-20 दिनों से मौसम खराब बना हुआ है। धूप नहीं निकलने और लगातार नमी रहने के कारण मिर्ची की फसल (Chilli Crop) में थ्रिप्स, सफेद मक्खी और माइट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही पत्ती मरोड़ रोग की समस्या भी सामने आ रही है। पौधों की पत्तियां सिकुड़ रही हैं, फूल झड़ रहे हैं और नई कोंपलें पीली पड़ रही हैं। किसानों को डर है कि यदि जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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800-900 रुपये की दवा भी बेअसर

ग्राम भराली के किसान पुरोहित कलेत ने बताया कि उन्होंने दो बार कीटनाशक (Chilli Crop Pest)  का छिड़काव किया है। करीब 800-900 रुपये की दवा डालने के बाद भी कीटों पर नियंत्रण नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि समय रहते रोकथाम नहीं हुई तो पूरी फसल खराब हो सकती है। ग्राम रंगाडीह के किसान संजय कुमार चौधरी ने बताया कि उम्मीद के साथ मिर्ची की खेती (Chilli Crop Pest) की थी, लेकिन अब रोज खेत में फसल की हालत देखकर चिंता हो रही है।

 

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Chilli Crop Pest गांव नहीं पहुंच रहा विभाग

किसानों का आरोप है कि उद्यान विभाग (Horticulture Department) की ओर से अब तक प्रभावित गांवों का दौरा नहीं किया गया है। न तो कोई शिविर लगाया गया और न ही फसल के कीट की जांच के लिए सैंपल लिया गया। किसानों का कहना है कि फोन पर भी उन्हें उचित तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। इस संबंध में उद्यान रोपणी केंद्र नदीगांव के अधीक्षक हीरालाल देवांगन से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

 

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50 एकड़ से ज्यादा फसल बचाने टीम भेजने की मांग

किसानों ने कलेक्टर और उद्यान विभाग के उपसंचालक से प्रभावित गांवों में तत्काल टीम भेजने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खेतों (Chilli Crop Pest) का निरीक्षण कर कीट प्रकोप (Pest Control) की सही पहचान की जाए और उसके अनुसार दवा व तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जाए। किसानों ने मांग की है कि गांवों में शिविर लगाकर उन्हें फसल बचाने के लिए जरूरी जानकारी दी जाए, ताकि 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में लगी मिर्ची की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

 

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