Baigan Ki Kheti Chhattisgarh : 3 एकड़ से शुरू की बैगन की खेती, 10 एकड़ में पहुंचा रकबा, अब सालाना 7 लाख की कमाई
बैगन की खेती (Baigan Ki Kheti Chhattisgarh) को अगर व्यावसायिक तरीके से किया जाए तो यह किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है। एक महिला किसान ने सिर्फ 3 एकड़ जमीन से बैगन की खेती शुरू की और बेहतर उत्पादन व मुनाफा मिलने के बाद इसका रकबा बढ़ाकर 10 एकड़ कर दिया। आज इसी खेती से वह सालाना करीब 7 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।

खेती में लागत, बाजार और उत्पादन का सही तालमेल हो तो किसान पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों की व्यावसायिक खेती से भी अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। स्वयं सहायता समूह से मिले आर्थिक सहयोग और बैंक ऋण ने एक महिला किसान को खेती का विस्तार करने में मदद की। यह उदाहरण उन किसानों के लिए खास है, जो कम रकबे से शुरुआत कर खेती को धीरे-धीरे बड़े व्यवसाय में बदलना चाहते हैं।
Baigan Ki Kheti Chhattisgarh 3 एकड़ से शुरू हुआ सफर
यह सफलता छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के रोहीना गांव की कृष्णा साहू की है। एक समय परिवार के पास स्थायी आजीविका का साधन नहीं था। भरण-पोषण के लिए गांव से पलायन करना पड़ता था। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन यानी बिहान से जुड़ने के बाद कृष्णा के जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई।
कृष्णा ने गांव की 10 महिलाओं को एकजुट कर राधा रानी महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह को बिहान योजना के तहत 60 हजार रुपये का समुदाय निवेश कोष और 15 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड मिला। इसके अलावा बैंक क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से भी आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ।
Baigan Ki Kheti Chhattisgarh खेती बढ़ाई, कमाई भी बढ़ी
समूह से मिले आर्थिक सहयोग और अपनी बचत के सहारे कृष्णा ने शुरुआत में 3 एकड़ जमीन पर बैगन की व्यावसायिक खेती (Baigan Ki Kheti Chhattisgarh) शुरू की। पहली ही बार अच्छा उत्पादन और मुनाफा मिला तो उनका भरोसा खेती के इस मॉडल पर बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने बैंक से 3 लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण लिया और खेती का रकबा बढ़ाकर 10 एकड़ कर दिया।
रकबा बढ़ने के साथ उत्पादन और आमदनी का दायरा भी बढ़ा। आज कृष्णा इसी बैगन की खेती से हर साल करीब 7 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। खेती से मिलने वाली यह आमदनी उनके परिवार के लिए स्थायी आजीविका का आधार बन गई है और पलायन की मजबूरी भी पीछे छूट गई है।
Baigan Ki Kheti Chhattisgarh बिहान से मिला आर्थिक सहारा
कृष्णा की सफलता में स्वयं सहायता समूह की भूमिका महत्वपूर्ण रही। समूह के माध्यम से मिले आर्थिक संसाधनों ने उन्हें खेती शुरू करने के लिए शुरुआती आधार दिया। इसके बाद बैंक ऋण और अपनी मेहनत के जरिए उन्होंने खेती का विस्तार किया।
बैगन की खेती से बढ़ी आमदनी (Baigan Ki Kheti Chhattisgarh) अब उनके लिए आत्मनिर्भरता का जरिया बन चुकी है। कृष्णा की कहानी बताती है कि किसान अगर उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करें और बाजार की मांग के अनुसार व्यावसायिक फसल का चयन करें तो छोटे स्तर से भी खेती को आय के बड़े साधन में बदला जा सकता है।
अब दूसरी महिलाओं को दे रहीं प्रेरणा
अपनी सफलता के बाद कृष्णा अब गांव की दूसरी महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि समूह के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक मदद और बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल खेती या दूसरे स्वरोजगार में किया जाए तो परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है।
कृष्णा का व्यावसायिक बैगन उत्पादन (Baigan Ki Kheti Chhattisgarh) ग्रामीण महिलाओं के लिए भी एक उदाहरण बन गया है। 3 एकड़ से शुरुआत कर 10 एकड़ तक खेती का विस्तार और करीब 7 लाख रुपये सालाना आय यह दिखाती है कि सब्जी की खेती को केवल घरेलू जरूरत तक सीमित रखने के बजाय व्यवसाय के रूप में अपनाया जा सकता है।
कृष्णा की कहानी बैगन की खेती से सालाना कमाई (Baigan Ki Kheti Chhattisgarh) बढ़ाने की एक सफल मिसाल है। 3 एकड़ से शुरू हुआ सफर आज 10 एकड़ तक पहुंच चुका है और खेती से करीब 7 लाख रुपये सालाना आय हो रही है। ऐसे में सब्जी की व्यावसायिक खेती को आय का अतिरिक्त साधन बनाने की सोच रखने वाले किसानों के लिए यह उदाहरण खासा प्रेरणादायक है।












One Comment