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  • Domanlal Korsewada Death : अहिवारा के भाजपा विधायक डोमनलाल का निधन, 34 साल तक शिक्षक रहे, गुरुजी के नाम से मिली पहचान

    Domanlal Korsewada Death : अहिवारा के भाजपा विधायक डोमनलाल का निधन, 34 साल तक शिक्षक रहे, गुरुजी के नाम से मिली पहचान

    Domanlal Korsewada Death छत्तीसगढ़ के दुर्ग  अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का शुक्रवार दोपहर हैदराबाद में निधन हो गया। वे फेफड़ों में संक्रमण की समस्या से जूझ रहे थे और पिछले करीब 22 दिनों से हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती थे। इससे पहले रायपुर और दुर्ग में भी उनका उपचार कराया गया था। उनके निधन की खबर से अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में शोक की लहर है। करीब 34 वर्षों तक शिक्षक रहे कोर्सेवाड़ा ने राजनीति में भी सादगी, सहज व्यवहार और जनसेवा को अपनी पहचान बनाया। विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन (Domanlal Korsewada Death) अहिवारा क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है।

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    चाक-डस्टर से शुरू हुआ सफर, राजनीति तक बनाई पहचान

    डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का सार्वजनिक जीवन शिक्षा के क्षेत्र से शुरू हुआ था। जनवरी 1972 में सहायक शिक्षक के रूप में शिक्षा विभाग में सेवा शुरू करने के बाद उन्होंने करीब 34 वर्षों तक विद्यार्थियों का भविष्य संवारा। शिक्षक के रूप में उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि लोग उन्हें स्नेह से ‘गुरुजी’ कहकर बुलाते थे। शिक्षा को वे समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य गढ़ने का माध्यम मानते थे। यही संवेदनशीलता उनके राजनीतिक जीवन में भी दिखाई दी।

    राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने करीब 12 वर्षों तक पूर्व सांसद स्वर्गीय ताराचंद साहू के निज सहायक के रूप में काम किया। इस दौरान उन्हें जनसमस्याओं और क्षेत्रीय जरूरतों को करीब से समझने का अवसर मिला। ताराचंद साहू के मार्गदर्शन ने उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को आकार दिया। बाद में उन्होंने शासकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर भाजपा की राजनीति में कदम रखा। गुरुजी से जनसेवक बने डोमनलाल (Domanlal Korsewada Death) ने शिक्षा के क्षेत्र से हासिल अनुभव को जनसेवा में लगाया।

     

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    अहिवारा के पहले विधायक बने थे कोर्सेवाड़ा

    वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई अहिवारा विधानसभा सीट से कोर्सेवाड़ा पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इस तरह वे नवगठित विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक बने। वर्ष 2013 में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और सांवलाराम डाहरे को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने पार्टी के फैसले को सहजता से स्वीकार किया और संगठन के साथ जुड़े रहे।

    वर्ष 2018 में भी भाजपा ने डाहरे पर भरोसा जताया। इसके बाद वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने फिर कोर्सेवाड़ा को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की। विधायक नहीं रहने के दौरान भी क्षेत्र में उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं से संपर्क बना रहा। अहिवारा के पहले विधायक (Domanlal Korsewada Death) के रूप में उनका नाम क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास में दर्ज रहेगा।

     

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    451 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों को दी प्राथमिकता

    विधायक बनने के बाद कोर्सेवाड़ा ने अहिवारा क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में क्षेत्र के लिए 451 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई। इनमें से अधिकांश कार्य पूरे होने का दावा किया गया। नंदनी में केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भी भेजा था।

    राज्य सरकार ने उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया था। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने खैरागढ़, मानपुर, बालोद और गुंडरदेही सहित विभिन्न क्षेत्रों की विकास संबंधी मांगों के लिए राशि आवंटित कराने के प्रयास किए। डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का राजनीतिक सफर (Domanlal Korsewada Death) क्षेत्रीय विकास और जनसरोकारों से जुड़ा रहा।

     

     

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    राष्ट्रपति के हाथों मिला था गुरु घासीदास सम्मान

    कोर्सेवाड़ा को वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों गुरु घासीदास सम्मान से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2013 में उन्हें श्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार भी मिला। राजनीति में पद और प्रतिष्ठा मिलने के बावजूद उनकी पहचान सहज व्यवहार और शालीनता से बनी रही। वे अपनी उपलब्धियों का श्रेय क्षेत्र की जनता, पार्टी कार्यकर्ताओं और मार्गदर्शकों को देते थे।

    उनका जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि शिक्षक का दायित्व केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षा से अर्जित संवेदनशीलता और अनुशासन को उन्होंने जनसेवा में भी अपनाया। गुरुजी के नाम से लोकप्रिय विधायक (Domanlal Korsewada Death) के निधन से क्षेत्र ने ऐसा जनप्रतिनिधि खो दिया, जिसकी लोगों के बीच अलग आत्मीय पहचान थी।

     

     

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    परिवार में भी शिक्षा और जनसेवा की परंपरा

    डोमनलाल कोर्सेवाड़ा राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर थे। उनकी पत्नी कमला कोर्सेवाड़ा दुर्ग जिला मंडी की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके बेटे धनंजय कोर्सेवाड़ा गुंडरदेही जनपद पंचायत के सदस्य रहे। कोर्सेवाड़ा अपने राजनीतिक जीवन में स्वर्गीय ताराचंद साहू और डॉ. रमन सिंह के योगदान को महत्वपूर्ण मानते थे। वे अपनी सफलता का श्रेय क्षेत्र की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के सहयोग को देते थे।

     

     

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  • Shramik Shiksha Sahayata : श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई के लिए मिलेंगे 12,500 रुपये, टाप-10 में आने पर एक लाख

    Shramik Shiksha Sahayata : श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई के लिए मिलेंगे 12,500 रुपये, टाप-10 में आने पर एक लाख

    Shramik Shiksha Sahayata श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग की शैक्षणिक प्रोत्साहन योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना के अंतर्गत कक्षा 10वीं और 12वीं से लेकर स्नातक, स्नातकोत्तर तथा व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले पात्र विद्यार्थियों को 5,000 से 12,500 रुपये तक की सहायता मिलेगी। वहीं, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं या 12वीं की परीक्षा में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले पात्र विद्यार्थियों को एक लाख रुपये दिए जाएंगे। श्रमिक शिक्षा सहायता (Shramik Shiksha Sahayata) का उद्देश्य आर्थिक अभाव के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने से रोकना और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

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    अलग-अलग कक्षाओं के लिए निर्धारित सहायता राशि

    योजना के तहत मंडल में पंजीकृत पात्र असंगठित कर्मकारों के प्रथम दो बच्चों को निर्धारित मापदंडों के अनुसार एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को 5,000 से 5,500 रुपये, स्नातक स्तर पर 7,000 से 7,500 रुपये तथा स्नातकोत्तर स्तर पर 10,000 से 10,500 रुपये दिए जाएंगे। वहीं, व्यावसायिक और प्रोफेशनल शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 12,000 से 12,500 रुपये तक की सहायता मिलेगी। शैक्षणिक प्रोत्साहन योजना (Shramik Shiksha Sahayata) का लाभ एक शैक्षणिक वर्ष में एक बार दिया जाएगा।

     

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    टॉप-10 में आने पर एक लाख रुपये

    छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं या 12वीं की परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए एक लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा, दुपहिया वाहन खरीदने के लिए भी एक लाख रुपये की सहायता का उल्लेख है। इन विशेष लाभों के लिए निर्धारित पात्रता और दस्तावेज संबंधी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा। मेधावी विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता (Shramik Shiksha Sahayata) मिलने से उनकी आगे की पढ़ाई और शैक्षणिक उपलब्धियों को प्रोत्साहन मिल सकेगा।

     

     

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    आवेदन से 90 दिन पहले पंजीयन जरूरी

    योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन की तिथि से कम से कम 90 दिन पहले संबंधित मंडल में पंजीयन होना आवश्यक है। विद्यार्थी को उत्तीर्ण कक्षा के बाद अगले शैक्षणिक सत्र में अध्ययनरत होना चाहिए। हालांकि, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की अंतिम कक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को इस शर्त से छूट देने का प्रावधान है।

    पात्र विद्यार्थी विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा चॉइस सेंटर, श्रमेव जयते मोबाइल ऐप और श्रम संसाधन केंद्र के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के साथ संबंधित कक्षा की अंकसूची, वर्तमान कक्षा में अध्ययनरत होने का प्रमाण, निर्धारित प्रारूप में आय प्रमाण पत्र और आवश्यक स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा। टॉप-10 में स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को मेरिट प्रमाण पत्र सहित अन्य जरूरी दस्तावेज देने होंगे। श्रमिक परिवारों के बच्चों की छात्रवृत्ति (Shramik Shiksha Sahayata) के लिए आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना जरूरी है।

     

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    जांच के बाद खाते में आएगी राशि

    प्राप्त आवेदनों की जांच संबंधित जिले के सहायक श्रमायुक्त, श्रम पदाधिकारी अथवा सहायक श्रम पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। आवेदन पात्र पाए जाने और स्वीकृति मिलने के बाद सहायता राशि हितग्राही के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाएगी।

    जिला श्रम अधिकारी ने पात्र श्रमिक परिवारों से योजना की शर्तों का अवलोकन कर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने की अपील की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई जारी रखने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक मदद मिल सके। श्रम विभाग की शिक्षा योजना (Shramik Shiksha Sahayata) से पात्र विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग मिलने के साथ आगे की पढ़ाई के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

     

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  • NTPC Lara : एनटीपीसी लारा का परिचालन प्रदर्शन बेहतर, 4800 मेगावाट तक क्षमता विस्तार की योजना

    NTPC Lara : एनटीपीसी लारा का परिचालन प्रदर्शन बेहतर, 4800 मेगावाट तक क्षमता विस्तार की योजना

    NTPC Lara  राष्ट्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में रायगढ़ एनटीपीसी लारा ने अपनी गतिविधियों की जानकारी साझा की। संयंत्र प्रबंधन ने स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों के  साथ प्रेस मीट आयोजित कर परिचालन प्रदर्शन, भविष्य की विस्तार योजनाओं और सामुदायिक विकास से जुड़ी पहलों की जानकारी दी। एनटीपीसी लारा का परिचालन प्रदर्शन (NTPC Lara) वित्तीय वर्ष 2026-27 में सितंबर तक विभिन्न प्रमुख मानकों पर बेहतर रहा।

    प्लांट लोड फैक्टर में एनटीपीसी स्टेशनों में दूसरा स्थान

    प्रेस मीट के दौरान दी गई प्रस्तुति के अनुसार, एनटीपीसी लारा ने सितंबर 2026 तक 84 प्रतिशत वार्षिक प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) और 86.28 प्रतिशत मासिक पीएलएफ दर्ज किया। इस प्रदर्शन के साथ स्टेशन ने एनटीपीसी के स्टेशनों में दूसरा स्थान हासिल किया।

    इसके अलावा, संयंत्र की वार्षिक सहायक विद्युत खपत (एपीसी) 5.91 प्रतिशत और मासिक खपत 5.85 प्रतिशत रही। यह एनटीपीसी स्टेशनों में दूसरा सबसे कम स्तर है। वहीं, 0.47 प्रतिशत वार्षिक साइकिल मेकअप के साथ स्टेशन ने सबसे कम स्तर दर्ज किया। बिजली उत्पादन दक्षता (NTPC Lara) के ये आंकड़े संयंत्र के परिचालन प्रदर्शन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।

     

     

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    4800 मेगावाट तक क्षमता विस्तार की योजना

    परियोजना प्रमुख सुभाष ठाकुर ने मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद के दौरान विद्युत उत्पादन, परिचालन दक्षता, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने एनटीपीसी लारा की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 4,800 मेगावाट तक करने की प्रस्तावित योजना पर भी प्रकाश डाला। इसके साथ सौर ऊर्जा और तकनीकी उन्नयन से जुड़ी पहलों की जानकारी साझा की। एनटीपीसी लारा क्षमता विस्तार (NTPC Lara) की प्रस्तावित योजना भविष्य में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

     

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    प्रभावित गांवों के विकास पर जोर

    प्रेस मीट में परियोजना प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास, कौशल विकास और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत संचालित सामुदायिक पहलों पर चर्चा की गई। इन प्रयासों का उद्देश्य आसपास के समुदायों के जीवन स्तर में सुधार करना, स्थानीय लोगों के लिए कौशल विकास के अवसर बढ़ाना और सतत विकास को प्रोत्साहित करना है। एनटीपीसी लारा सीएसआर पहल (NTPC Lara) के माध्यम से सामाजिक विकास और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

    कार्यक्रम में महाप्रबंधक एम. श्रीनाथ (ओएंडएम), राजन कुमार श्रीवास्तव (प्रोजेक्ट्स), उदागिरी वी.वी.एस. श्रीनिवास राव (मेंटेनेंस), अपर महाप्रबंधक जाकिर खान (एचआर) और सुधीर दहिया (ईएमजी) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    प्रेस मीट के माध्यम से एनटीपीसी लारा प्रबंधन और मीडिया प्रतिनिधियों के बीच संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया गया। प्रबंधन ने परिचालन उत्कृष्टता, ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति तथा सामाजिक और पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों के निर्वहन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। एनटीपीसी लारा विकास योजनाएं (NTPC Lara) बिजली उत्पादन के साथ क्षेत्रीय विकास और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित हैं।

     

     

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  • Makhana Farming : मखाना की खेती से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, 29 एकड़ में शुरू हुआ संग्रहण

    Makhana Farming : मखाना की खेती से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, 29 एकड़ में शुरू हुआ संग्रहण

    Makhana Farming मखाना की खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बन रही है। ग्राम छाती और डांडेसरा में महिला स्व-सहायता समूहों की ओर से 29 एकड़ क्षेत्र में उत्पादित मखाना का संग्रहण शुरू हो गया है। उपज की गुणवत्ता बनाए रखने, प्रसंस्करण और बाजार में बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से महिलाओं को वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने की तैयारी भी की जा रही है। मखाना की खेती (Makhana Farming) को बढ़ावा देने की इस पहल से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और सामूहिक उद्यमिता के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

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    105 एकड़ में हो रही मखाना की खेती

    केंद्र सरकार की सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना के तहत वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले को तालाबों में मखाना की खेती के लिए 165 एकड़ का लक्ष्य दिया गया था। इसके मुकाबले जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में 105 एकड़ क्षेत्र में खेती शुरू की गई। ग्राम राखी, छाती, डांडेसरा और पीपरछेड़ी के साथ नगरी विकासखंड के ग्राम सांकरा में भी मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मखाना उत्पादन (Makhana Farming) के जरिए जिले में कृषि विविधीकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

     

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    महिला समूहों को मिलेगा वैज्ञानिक प्रशिक्षण

    ग्राम छाती और डांडेसरा में शैलपुत्री स्व-सहायता समूह और नई किरण स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए 26 अक्टूबर को मखाना संग्रहण की शुरुआत और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जनप्रतिनिधियों के साथ कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यानिकी विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

    उप संचालक उद्यानिकी पूजा कश्यप साहू ने बताया कि महिला समूहों को आगामी दिनों में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी में मखाना के संग्रहण-पश्चात प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उपज की उचित देखभाल, प्रसंस्करण और गुणवत्ता बनाए रखने की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। मखाना संग्रहण का प्रशिक्षण (Makhana Farming) मिलने से महिलाओं को उपज के बेहतर प्रबंधन और इस गतिविधि को आजीविका के रूप में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

     

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    तीन चरणों में होती है मखाना की कटाई

    मखाना की कटाई मुख्य रूप से तीन चरणों में की जाती है। पहली कटाई को लहसर कहा जाता है। इसमें लगभग 70 प्रतिशत मखाना निकाला जाता है। इसके बाद दूसरी और तीसरी कटाई मरकट तथा कर्कट कहलाती है। इन चरणों में शेष लगभग 30 प्रतिशत बीज निकाले जाते हैं। इस प्रक्रिया में अपेक्षाकृत अधिक मेहनत और समय लगता है। श्रमिकों को सामान्यतः प्रति किलोग्राम के आधार पर मजदूरी दी जाती है।

     

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    सफाई, सुखाने और भुनाई से तैयार होता है मखाना

    तालाब से बीज निकालने के बाद उनकी अच्छी तरह सफाई की जाती है। काले बीजों को धोकर धूप में सुखाया जाता है, ताकि उनकी नमी कम हो सके। इसके बाद बीजों को भट्ठी या मिट्टी की कढ़ाई में भुना जाता है। भुनाई के बाद लकड़ी की थापी से बीजों को फोड़ा जाता है। इससे बीज के अंदर का सफेद और कुरकुरा हिस्सा बाहर निकलता है, जिसे स्थानीय रूप से लावा कहा जाता है। मखाना प्रसंस्करण (Makhana Farming) की इन प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग उपज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

     

     

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    ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर

    कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप कृषि की नई गतिविधियों को बढ़ावा देना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। मखाना की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बन सकती है। इसके लिए उत्पादन के साथ वैज्ञानिक तकनीक, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और बाजार से जुड़ाव पर ध्यान देना जरूरी है।

    जिला प्रशासन का प्रयास है कि तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़े और वे आत्मनिर्भर आजीविका की दिशा में आगे बढ़ें। महिला उद्यमिता (Makhana Farming) को प्रोत्साहित करने वाली यह पहल उचित प्रशिक्षण, गुणवत्ता आधारित प्रसंस्करण और बाजार से बेहतर जुड़ाव के जरिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर विकसित कर सकती है।

     

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  • Surajgarh Bridge Damage : महानदी पर बने सूरजगढ़ पुल की सड़क उखड़ी, बाहर निकले सरिए, हादसे का खतरा

    Surajgarh Bridge Damage : महानदी पर बने सूरजगढ़ पुल की सड़क उखड़ी, बाहर निकले सरिए, हादसे का खतरा

    Surajgarh Bridge Damage छत्तीसगढ़ और ओडिशा को सड़क मार्ग से जोड़ने वाले महानदी पर बने सूरजगढ़ पुल की सड़क जर्जर हो गई है। पुल पर जगह-जगह कंक्रीट उखड़ने से बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और सड़क के भीतर लगे लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में पुल की बदहाल सड़क वाहन चालकों और राहगीरों के लिए परेशानी के साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ा रही है। स्थानीय स्तर पर कुछ दिन पहले गड्ढों के कारण एक नेक्सॉन कार का टायर फटने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद पुल की मरम्मत को लेकर अब तक ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है। सूरजगढ़ पुल की बदहाली (Surajgarh Bridge Damage) ने इस महत्वपूर्ण मार्ग से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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    सड़क उखड़ी, बाहर निकले लोहे के सरिए

    पुल की सामने आई तस्वीरों में कई स्थानों पर कंक्रीट की परत उखड़ी हुई दिखाई दे रही है। सड़क पर बने गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो सकता है। कई जगह सड़क के भीतर लगे लोहे के सरिए बाहर निकले हुए हैं। ऐसे में वाहन चालकों को सावधानी से गुजरना पड़ रहा है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण है। तेज रफ्तार या कम रोशनी में गड्ढों और बाहर निकले सरियों की चपेट में आने से दुर्घटना हो सकती है। पुल की क्षतिग्रस्त सड़क (Surajgarh Bridge Damage) की स्थिति को देखते हुए मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम की जरूरत महसूस की जा रही है।

     

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    गड्ढे में फटने की जानकारी, नेक्सॉन कार को नुकसान

    स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले पुल पर मौजूद गड्ढों के कारण एक नेक्सॉन कार का टायर फट गया था। इससे कार को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई है। यह घटना पुल की सड़क पर मौजूद खामियों से पैदा हो रहे खतरे की ओर संकेत करती है। हालांकि, इस घटना की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। पुल पर लगातार वाहनों की आवाजाही को देखते हुए क्षतिग्रस्त हिस्सों की समय रहते मरम्मत जरूरी है, ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को कम किया जा सके। पुल पर दुर्घटना का खतरा (Surajgarh Bridge Damage) बढ़ने की आशंका के बीच स्थानीय लोगों को सड़क की हालत में सुधार का इंतजार है।

     

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    हजारों लोगों की आवाजाही, मरम्मत पर सवाल

    सूरजगढ़ पुल छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग और वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क का क्षतिग्रस्त होना केवल आवागमन में परेशानी का विषय नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब पुल पर गड्ढे और बाहर निकले सरिए स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, तो मरम्मत के लिए कदम कब उठाए जाएंगे। महानदी पुल की मरम्मत (Surajgarh Bridge Damage) में देरी से वाहन चालकों को जोखिम के बीच सफर करना पड़ रहा है।

     

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    तकनीकी निरीक्षण और स्थायी मरम्मत की मांग

    पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से तकनीकी निरीक्षण कराने और क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थिति का आकलन करने की मांग की जा रही है। सड़क की मजबूती और कंक्रीट की गुणवत्ता की जांच के बाद स्थायी मरम्मत कराई जानी चाहिए। मरम्मत पूरी होने तक खतरनाक स्थानों पर चेतावनी संकेत लगाने और जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने की भी आवश्यकता है। पुल की सुरक्षा व्यवस्था (Surajgarh Bridge Damage) दुरुस्त करना इसलिए जरूरी है, ताकि लोगों को असुरक्षित सड़क से गुजरने के लिए मजबूर न होना पड़े।

    पुल पर जगह-जगह उखड़ी सड़क और बाहर निकले सरिए संभावित खतरे की ओर ध्यान दिला रहे हैं। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग क्षतिग्रस्त हिस्सों का निरीक्षण कर मरम्मत कब शुरू करता है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि किसी गंभीर दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते पुल की सड़क को दुरुस्त किया जाए।

     

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  • HSRP Number Plate : छत्तीसगढ़ में 42 लाख वाहन बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के दौड़ रहे

    HSRP Number Plate : छत्तीसगढ़ में 42 लाख वाहन बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के दौड़ रहे

    HSRP Number Plate छत्तीसगढ़ की  सड़कों पर करीब 42 लाख पुराने वाहन अब भी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के बिना दौड़ रहे हैं। वाहन चोरी और फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल पर नियंत्रण के उद्देश्य से शुरू किया गया अभियान डेढ़ साल बाद भी लक्ष्य से काफी पीछे है। प्रदेश में एक अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत 52.48 लाख वाहनों में से अब तक केवल 10.72 लाख वाहनों पर ही प्लेट लगाई जा सकी है। इस तरह सिर्फ 20.44 प्रतिशत वाहनों को ही एचएसआरपी से लैस किया गया है, जबकि 41.76 लाख वाहन अब भी बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के चल रहे हैं। एचएसआरपी अभियान (HSRP Number Plate) की धीमी रफ्तार के कारण निर्धारित समयसीमा में सभी पात्र वाहनों पर प्लेट लगाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है।

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    रायपुर में भी 10 लाख से ज्यादा वाहन बिना प्लेट

    परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले में एक अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत 13.34 लाख वाहनों में से 3.06 लाख पर एचएसआरपी लगाई जा चुकी है। शेष 10.28 लाख वाहनों पर प्लेट लगना बाकी है। रायपुर में 23.53 प्रतिशत वाहनों पर प्लेट लग चुकी है, जो राज्य के औसत 20.44 प्रतिशत से अधिक है। इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में पुराने वाहन बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के संचालित हो रहे हैं। रायपुर में एचएसआरपी (HSRP Number Plate) लगाने की स्थिति प्रदेश के औसत से बेहतर है, लेकिन यहां भी अभियान को गति देने की जरूरत है।

     

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    दो कंपनियों को जिम्मेदारी, फिर भी सुस्त अभियान

    पुराने वाहनों पर एचएसआरपी लगाने की जिम्मेदारी दो अधिकृत कंपनियों को सौंपी गई है। आंकड़ों के अनुसार, रियल मेजान इंडिया लिमिटेड ने 23.53 प्रतिशत और रोसमर्टा सेफ्टी सिस्टम लिमिटेड ने 17.35 प्रतिशत पात्र वाहनों पर प्लेट लगाई है। दिसंबर 2024 में व्यवस्था लागू होने के बाद एक वर्ष के भीतर अभियान पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन समयसीमा बीतने के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन बिना एचएसआरपी के चल रहे हैं। हाई सिक्योरिटी प्लेट अभियान (HSRP Number Plate) में अधिकृत कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी पात्र वाहनों तक पहुंचने और समय पर प्लेट लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।

     

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    दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

    प्रदेश में कुल 52.48 लाख पुराने वाहनों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी करीब 81 प्रतिशत है। यात्री बसों की हिस्सेदारी 0.91 प्रतिशत, चारपहिया वाहनों की 6.90 प्रतिशत और मालवाहक वाहनों की 3.68 प्रतिशत है। वहीं, जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच 5.19 लाख नए वाहनों का पंजीकरण हुआ है। विभाग के सामने पुराने वाहनों पर एचएसआरपी लगाने के साथ वाहन मालिकों को निर्धारित प्रक्रिया के प्रति जागरूक करने की चुनौती भी है। पुराने वाहनों पर नंबर प्लेट (HSRP Number Plate) लगाने से संबंधित अभियान में बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन शामिल हैं, इसलिए इन वाहन मालिकों तक जानकारी पहुंचाना भी जरूरी है।

     

     

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    वाहन के अनुसार निर्धारित है शुल्क

    एचएसआरपी लगवाने के लिए वाहन की श्रेणी के अनुसार शुल्क तय किया गया है। दोपहिया वाहन मालिकों को 365.80 रुपये, तिपहिया वाहन मालिकों को 427.16 रुपये, कार और हल्के मोटर वाहन मालिकों को 656.08 रुपये तथा अन्य हल्के वाहनों के मालिकों को 705.64 रुपये का भुगतान करना होगा। वाहन मालिकों को अधिकृत माध्यम से प्लेट लगवाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। एचएसआरपी लगाने का शुल्क (HSRP Number Plate) वाहन की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग निर्धारित किया गया है।

     

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    HSRP Number Plate प्लेट लगाने में तेजी लाने के निर्देश

    परिवहन विभाग के अपर आयुक्त डी. रविशंकर ने बताया कि अधिकृत कंपनियों को सभी पात्र वाहनों पर एचएसआरपी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जा रहे हैं और वाहन मालिकों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही जांच अभियान चलाकर नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग का लक्ष्य पुराने वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने की प्रक्रिया को तेज करना और नियमों के अनुरूप वाहन संचालन सुनिश्चित करना है।

     

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  • Cyclone Arnab School Holiday : चक्रवाती तूफान के असर से रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में स्कूलों में कल अवकाश

    Cyclone Arnab School Holiday : चक्रवाती तूफान के असर से रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में स्कूलों में कल अवकाश

    Cyclone Arnab School Holiday बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से तेज हवाएं चलने और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 29 अक्टूबर, गुरुवार को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे। विद्यार्थियों और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। दोनों जिलों में स्कूलों की छुट्टी (Cyclone Arnab School Holiday) का फैसला खराब मौसम की आशंका को देखते हुए लिया गया है।

    रायगढ़ जिले में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के अनुमोदन पर जिला शिक्षा अधिकारी ने अवकाश का आदेश जारी किया है। इसके तहत जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालय गुरुवार को बंद रहेंगे। रायगढ़ स्कूल अवकाश (Cyclone Arnab School Holiday) का आदेश विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जारी किया गया है।

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    सारंगढ़-बिलाईगढ़ में स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी भी बंद

    सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने अलग-अलग आदेश जारी किए हैं। इनके अनुसार, जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों में 29 अक्टूबर को अवकाश रहेगा। स्कूल बंद रखने का आदेश (Cyclone Arnab School Holiday) मौसम विभाग से मिली जानकारी और विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में होने वाली संभावित परेशानी को ध्यान में रखकर जारी किया गया है।

     

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    आंगनबाड़ी केंद्र बंद, परियोजना कार्यालय खुले रहेंगे

    सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सभी आंगनबाड़ी केंद्र भी 29 अक्टूबर को बंद रहेंगे। तेज हवाओं और अतिवृष्टि की आशंका को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा तथा प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न संभावित जोखिमों के मद्देनजर यह अवकाश घोषित किया गया है। हालांकि, आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहने के बावजूद परियोजना कार्यालय खुले रहेंगे।

    दोनों विभागों ने संबंधित अधिकारियों और मैदानी अमले को आदेश की सूचना देकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने खराब मौसम के दौरान विद्यार्थियों और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह एहतियाती कदम उठाया है। अवकाश संबंधी निर्णय (Cyclone Arnab School Holiday) तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

     

     

  • Raigarh Bus Checking : रायगढ़ में 45 यात्री बसों पर कार्रवाई, 1.14 लाख रुपये जुर्माना वसूला; बिना फिटनेस-टैक्स वाली बस जब्त

    Raigarh Bus Checking : रायगढ़ में 45 यात्री बसों पर कार्रवाई, 1.14 लाख रुपये जुर्माना वसूला; बिना फिटनेस-टैक्स वाली बस जब्त

    Raigarh Bus Checking रायगढ़ जिले में यात्री बसों के संचालन में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर परिवहन विभाग ने कार्रवाई की है। जांच अभियान के दौरान 45 यात्री बसों से कुल 1 लाख 14 हजार 100 रुपये का जुर्माना वसूला गया, जबकि बिना फिटनेस प्रमाणपत्र और टैक्स के संचालित एक बस को जब्त कर लिया गया। विभाग ने बसों में यात्रियों की सुरक्षा, वैध दस्तावेज और परिवहन नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान चलाया। जांच में अधिक किराया वसूली, अग्निशामक यंत्र नहीं होने, निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने और परमिट की शर्तों के उल्लंघन जैसी अनियमितताएं सामने आईं। यात्री बसों की जांच (Raigarh Bus Checking) के दौरान बसों की छत पर सामान ढोने और खतरनाक तरीके से संचालन करने के मामलों में भी चालानी कार्रवाई की गई।

    जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय, रायगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान अलग-अलग बसों में कई तरह की कमियां पाई गईं। इनमें यात्रियों से निर्धारित दर से अधिक किराया वसूलना, बस में किराया सूची नहीं होना, अग्निशामक यंत्र उपलब्ध नहीं होना और क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना शामिल है। इसके अलावा परमिट की शर्तों का उल्लंघन करने तथा कंडक्टर लाइसेंस और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित कमियां भी सामने आईं। इन अनियमितताओं पर नियमानुसार चालानी कार्रवाई करते हुए जुर्माना वसूला गया। परिवहन विभाग की कार्रवाई (Raigarh Bus Checking) का उद्देश्य बस संचालकों को नियमों का पालन कराने के साथ यात्रियों के लिए सुरक्षित सफर सुनिश्चित करना है।

     

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    बिना फिटनेस और टैक्स के चल रही बस जब्त

    जांच अभियान के दौरान एक ऐसी यात्री बस भी मिली, जिसका संचालन बिना फिटनेस प्रमाणपत्र और टैक्स के किया जा रहा था। परिवहन विभाग ने नियमों के उल्लंघन को देखते हुए बस को जब्त कर लिया। फिटनेस प्रमाणपत्र वाहन की तकनीकी स्थिति और सड़क पर संचालन की उपयुक्तता से जुड़ा होता है। वहीं, वाहन से संबंधित टैक्स और अन्य वैध दस्तावेजों का होना भी नियमानुसार संचालन के लिए जरूरी है। विभाग की कार्रवाई से स्पष्ट है कि जांच के दौरान केवल छोटी अनियमितताओं पर चालान ही नहीं किया गया, बल्कि बिना जरूरी दस्तावेजों के चल रहे वाहन के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। बिना फिटनेस बस पर कार्रवाई (Raigarh Bus Checking) यात्री परिवहन में नियमों के पालन की जांच का हिस्सा रही।

     

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    बसों की छत पर सामान ढोने वालों पर भी कार्रवाई

    यात्री बसों की जांच के दौरान छत पर सामान यानी लगेज ढोने और खतरनाक तरीके से बस चलाने के मामलों को भी गंभीरता से लिया गया। ऐसे मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कुल 22 हजार रुपये का चालान किया गया। बसों की छत पर सामान ले जाने से जुड़े मामलों में विभाग ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की। इसके साथ ही खतरनाक तरीके से बसों का संचालन करने वालों पर भी चालानी कार्रवाई की गई। बसों की छत पर लगेज (Raigarh Bus Checking) ले जाने और असुरक्षित संचालन के मामलों में की गई कार्रवाई का उद्देश्य सड़क पर यात्रियों और अन्य लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखना है।

     

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    यात्रियों की सुरक्षा पर विभाग का जोर

    परिवहन विभाग के अनुसार, यात्री बसों में अग्निशामक यंत्र की उपलब्धता, वैध दस्तावेज, निर्धारित यात्री क्षमता और परमिट की शर्तों का पालन जरूरी है। यात्रियों से निर्धारित किराया लेना और बस में किराया सूची प्रदर्शित करना भी महत्वपूर्ण है। इन नियमों का पालन नहीं होने से यात्रियों को परेशानी हो सकती है और सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। जांच अभियान के जरिए विभाग बस संचालकों को नियमों के अनुरूप वाहन चलाने के लिए निर्देशित कर रहा है। यात्री सुरक्षा जांच (Raigarh Bus Checking) के तहत दस्तावेजों और बसों में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं से संबंधित कमियों पर कार्रवाई की गई है।

    जिला परिवहन विभाग द्वारा यात्री बसों के संचालन की जांच की जा रही है। अभियान में अब तक 45 बसों से 1 लाख 14 हजार 100 रुपये का जुर्माना वसूला गया है और बिना फिटनेस तथा टैक्स के संचालित एक बस जब्त की गई है। वहीं, छत पर सामान ढोने और खतरनाक संचालन के मामलों में 22 हजार रुपये का चालान किया गया है। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य परिवहन नियमों का पालन सुनिश्चित करना और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।

     

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  • PM Kisan Scheme : दिवाली से पहले करोड़ों किसानों को सौगात! पीएम मोदी 30 को जारी करेंगे सम्मान निधि योजना की 12वीं किस्त

    PM Kisan Scheme : दिवाली से पहले करोड़ों किसानों को सौगात! पीएम मोदी 30 को जारी करेंगे सम्मान निधि योजना की 12वीं किस्त

    PM Kisan Scheme प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों के लिए अहम खबर है। कृषि मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, योजना की 24वीं किस्त 30 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी। इसके तहत पात्र किसानों के बैंक खातों में 2,000 रुपये भेजे जाएंगे। हालांकि, सभी किसानों के खाते में पैसा पहुंचना तय नहीं है। जिन किसानों की ई-केवाईसी अधूरी है या आधार, बैंक खाते और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी है, उनकी किस्त अटक सकती है। ऐसे में किसानों को समय रहते अपना स्टेटस जांचकर जरूरी प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।

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    इन किसानों की अटक सकती है किस्त

    पीएम किसान योजना का लाभ पाने के लिए ई-केवाईसी पूरी होना जरूरी है। इसके अलावा, बैंक खाते से आधार लिंक होना और भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा होना भी अहम है। इन प्रक्रियाओं में कोई कमी या रिकॉर्ड में गड़बड़ी होने पर भुगतान में परेशानी आ सकती है। किसानों को सलाह है कि वे किस्त जारी होने से पहले अपनी लाभार्थी स्थिति (PM Kisan Beneficiary Status) की जांच कर लें। इससे पता चल सकेगा कि उनका रिकॉर्ड सही है या नहीं और ई-केवाईसी पूरी हुई है या नहीं।

     

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    PM Kisan Scheme घर बैठे ऐसे चेक करें किस्त का स्टेटस

    किसान मोबाइल या कंप्यूटर से पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना स्टेटस देख सकते हैं। इसके लिए ये कदम अपनाएं।

    1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।
    2. वेबसाइट पर Know Your Status विकल्प पर क्लिक करें।
    3. अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और स्क्रीन पर दिया गया कैप्चा कोड भरें।
    4. इसके बाद Get OTP पर क्लिक करें।
    5. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को दर्ज करें।
    6. स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी में ई-केवाईसी और लाभार्थी स्थिति जांचें।

    अगर ई-केवाईसी अधूरी दिखाई देती है, तो स्टेटस में दिए गए निर्देशों के अनुसार इसे जल्द पूरा कर लें। पीएम किसान स्टेटस (PM Kisan Status Check) जांचने से किस्त से पहले रिकॉर्ड में किसी कमी का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

     

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    ई-केवाईसी पूरी करने के हैं तीन तरीके

    पीएम किसान योजना में ई-केवाईसी पूरी करने के लिए किसानों के पास तीन विकल्प उपलब्ध हैं।

    • ओटीपी के जरिए: आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप पर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी की मदद से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
    • बायोमेट्रिक के जरिए: किसान नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) या राज्य सेवा केंद्र पर जाकर ई-केवाईसी करा सकते हैं।
    • फेस ऑथेंटिकेशन से: पीएम किसान मोबाइल एप के फेस ऑथेंटिकेशन फीचर से चेहरे की पहचान के जरिए ई-केवाईसी पूरी की जा सकती है।

     

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    मोबाइल से ओटीपी के जरिए ऐसे करें ई-केवाईसी

    अगर किसान के आधार से मोबाइल नंबर जुड़ा है और सक्रिय है, तो वह घर बैठे ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी पूरी कर सकता है।

    1. पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in खोलें।
    2. e-KYC विकल्प पर क्लिक करें।
    3. अपना आधार नंबर दर्ज करें।
    4. आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को भरें।
    5. स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करें।

    ओटीपी आधारित ई-केवाईसी के लिए आधार से जुड़ा सक्रिय मोबाइल नंबर जरूरी है। पीएम किसान ई-केवाईसी (PM Kisan e-KYC) अधूरी होने पर इसे जल्द पूरा कर लेना चाहिए।

     

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    चेहरा स्कैन करके भी पूरी कर सकते हैं ई-केवाईसी

    जिन किसानों को ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी करने में परेशानी हो रही है, वे पीएम किसान मोबाइल एप के फेस ऑथेंटिकेशन फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    इसके लिए गूगल प्ले स्टोर से पीएम-किसान एप और Aadhaar Face RD एप डाउनलोड करें। पीएम किसान एप खोलकर योजना में पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें। इसके बाद Beneficiary Status पेज पर जाएं। यदि ई-केवाईसी की स्थिति ‘No’ दिखाई देती है, तो ई-केवाईसी विकल्प चुनें। आधार नंबर दर्ज करने और चेहरे को स्कैन करने की अनुमति देने के बाद प्रक्रिया पूरी करें।

    30 अक्टूबर को किस्त जारी होने से पहले किसान अपना स्टेटस जरूर जांच लें। ई-केवाईसी अधूरी होने या बैंक खाते और भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारी या सेवा केंद्र से संपर्क कर उसे ठीक कराएं। समय रहते जरूरी प्रक्रिया पूरी करने से पीएम किसान किस्त (PM Kisan 24th Installment) के भुगतान में आने वाली संभावित परेशानी से बचने में मदद मिल सकती है।

     

     

  • Chhattisgarh Dhaan Token QR Code : धान खरीदी में टोकन से लेकर क्यूआर कोड तक होगी निगरानी, घर बैठे बुकिंग

    Chhattisgarh Dhaan Token QR Code : धान खरीदी में टोकन से लेकर क्यूआर कोड तक होगी निगरानी, घर बैठे बुकिंग

    Chhattisgarh Dhaan Token QR Code  छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी में किसानों को टोकन के लिए समितियों की लंबी कतारों से राहत मिलेगी। खाद्य विभाग के ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप से किसान घर बैठे 24 घंटे ऑनलाइन टोकन ले सकेंगे। वहीं, चावल की प्रत्येक बोरी पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनिंग और ट्रेसिबिलिटी व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे परिवहन की निगरानी करने और चावल के पुनर्चक्रण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। धान खरीदी की तकनीकी व्यवस्था (Chhattisgarh Dhaan Token QR Code) को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन टोकन, क्यूआर कोड और लोकेशन ट्रैकिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

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    घर बैठे मिलेगा ऑनलाइन टोकन

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग धान विक्रय के लिए ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप का उपयोग करेगा। यह एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। किसान एप के माध्यम से ओटीपी आधारित पंजीयन कर 24 घंटे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकेंगे। इससे टोकन लेने के लिए समितियों में लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी।

    प्रत्येक समिति की प्रतिदिन की खरीदी सीमा में से 70 प्रतिशत टोकन एप के जरिए और शेष 30 प्रतिशत टोकन समिति स्तर से जारी किए जाएंगे। एप से जारी होने वाले 70 प्रतिशत टोकन में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी लघु एवं सीमांत किसानों और 20 प्रतिशत बड़े किसानों के लिए निर्धारित की गई है।

     

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    रकबे के हिसाब से मिलेंगे टोकन

    टोकन व्यवस्था में किसानों के रकबे के अनुसार संख्या निर्धारित की गई है। दो एकड़ तक के किसानों को एक टोकन, दो एकड़ से अधिक और 10 एकड़ तक के किसानों को दो टोकन तथा 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसानों को तीन टोकन दिए जाएंगे। इस टोकन प्रणाली (Chhattisgarh Dhaan Token QR Code) का उद्देश्य खरीदी की निर्धारित सीमा के भीतर किसानों को टोकन उपलब्ध कराना है।

     

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    हर बोरी पर लगेगा क्यूआर कोड

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप चावल की प्रत्येक बोरी पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनिंग और ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। इससे बोरी की पहचान और परिवहन से संबंधित जानकारी को ट्रैक करने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य चावल के पुनर्चक्रण और खरीदी में होने वाली अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण करना है। क्यूआर कोड व्यवस्था (Chhattisgarh Dhaan Token QR Code) से चावल की बोरियों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी।

     

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    लोकेशन ट्रैकिंग से होगी निगरानी

    धान परिवहन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगे वाहनों से धान का उठाव कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे परिवहन की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी। क्यूआर कोड और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए धान और चावल के परिवहन की प्रक्रिया पर नजर रखने की व्यवस्था की जाएगी।

     

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    273 चेक पोस्ट पर जांच

    सीमावर्ती राज्यों से धान की अवैध आवक रोकने के लिए प्रदेश में 273 चेक पोस्ट और 131 सीमावर्ती उपार्जन केंद्र चिन्हांकित किए गए हैं। जिला स्तर पर विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    धान खरीदी से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए समय-सीमा तय की गई है। अति संवेदनशील केंद्रों की शिकायतों का 24 घंटे, संवेदनशील केंद्रों की शिकायतों का 48 घंटे और सामान्य केंद्रों की शिकायतों का 72 घंटे के भीतर निराकरण करना होगा। निगरानी व्यवस्था (Chhattisgarh Dhaan Token QR Code) के तहत इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी विस्तार किया जाएगा।

     

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