खेत में मिले बाघ के नए पदचिह्न, कनकबीरा से बरमकेला तक ग्रामीणों में दहशत

कनकबीरा से बरमकेला तक अलग-अलग स्थानों पर बाघ के पदचिह्न मिलने की सूचनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। सिंघारी गांव के किसान के खेत में नए निशान मिलने के बाद किसान, चरवाहे और जंगल किनारे रहने वाले लोग सतर्क हैं। ग्रामीणों ने मुनादी, रात में गश्त और कैमरा ट्रैप लगाने की मांग की है।

छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे इलाकों में बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कनकबीरा से बरमकेला ब्लॉक तक अलग-अलग स्थानों पर पदचिह्न मिलने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। अब सिंघारी गांव में किसान गंगाराम पटेल के खेत में बाघ के पदचिह्न मिले हैं। वन विभाग की टीम सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर निशानों की जांच कर रही है, लेकिन अब तक बाघ की मौजूदा लोकेशन स्पष्ट नहीं हो पाई है।

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कई जगह मिले निशान

इससे पहले कनकबीरा क्षेत्र के रामटेक, छाताडीह और सिंपारी में बाघ के पदचिह्न मिलने की सूचना आई थी। वहीं, छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे बरमकेला ब्लॉक के बरधरा चौक और खैरगढ़ी के आसपास भी निशान देखे जाने की बात सामने आई थी। अब सिंघारी गांव के खेत में पदचिह्न मिलने से बाघ की गतिविधियों को लेकर सतर्कता और बढ़ गई है।

हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर मिले निशानों के आधार पर बाघ किस रास्ते से आ-जा रहा है, इसका क्रम स्पष्ट नहीं हो सका है। वन विभाग का अमला ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंचकर पदचिह्नों की जांच कर रहा है।

 

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किसान और चरवाहे चिंतित

बाघ के विचरण की खबरों के बीच सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को है, जिन्हें रोजाना खेतों और जंगलों के आसपास जाना पड़ता है। किसान, मवेशी चराने वाले और जंगल किनारे बसे गांवों के लोग सतर्कता बरत रहे हैं। ग्रामीणों ने गांवों में मुनादी कराने, रात के समय गश्त बढ़ाने और बाघ की लोकेशन का पता लगाने के लिए कैमरा ट्रैप लगाने की मांग की है।

 

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निगरानी पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि अलग-अलग इलाकों में बाघ के पदचिह्न मिलने के बाद उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखना जरूरी है। हालांकि, बाघ की मौजूदा लोकेशन और निगरानी के लिए वन विभाग की ओर से की जा रही व्यवस्थाओं की स्पष्ट जानकारी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही है। ऐसे में खेतों और जंगलों की ओर जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

 

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