धान खरीदी से पहले ओडिशा से धान की खेप पहुंचनी शुरू! बरमकेला क्षेत्र में दलाल सक्रिय

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने से पहले ही सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला क्षेत्र में ओडिशा से धान लाने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, पिकअप और 407 वाहनों से धान लाकर अलग-अलग ठिकानों पर जमा किया जा रहा है। खरीदी शुरू होते ही इसे खपाने की कथित तैयारी है।

Story Highlights
  • ओडिशा से बरमकेला क्षेत्र में धान पहुंचने का दावा
  • पिकअप और 407 वाहनों से खेप लाने की सूचना
  • 15 नवंबर के बाद शुरुआती सप्ताह में खपाने की तैयारी

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने जा रही है। सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदेगी। किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिले, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। लेकिन धान खरीदी शुरू होने से पहले ही बिचौलियों ने अपना कथित नेटवर्क सक्रिय कर दिया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला क्षेत्र में ओडिशा से धान की खेप पहुंचने की सूचनाएं मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि पिकअप और 407 वाहनों से रोजाना धान लाकर ठिकानों पर जमा किया जा रहा है, ताकि खरीदी केंद्र खुलते ही इसे खपाया जा सके।

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ओडिशा से आ रही धान की खेप

छत्तीसगढ़ सात राज्यों की सीमाओं से घिरा हुआ है। इनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र शामिल हैं। पड़ोसी राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में धान की खरीदी दर अधिक होने के कारण यहां बाहरी धान खपाने का लालच बिचौलियों के लिए बड़ा मुनाफे का सौदा बन जाता है। दूसरे राज्यों से कम कीमत पर धान खरीदकर छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर बेचने की कोशिश से उन्हें मोटा फायदा हो सकता है।

 

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ओडिशा से धान छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले, सारंगढ़ बिलाईगढ़, गरियाबंद, महासमुंद, व धमतरी के रास्ते पहुुंचता है। सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के ओडिशा से लगे बरमकेला क्षेत्र में कुछ स्थानीय बिचौलिए सक्रिय हो चुके हैं। विष्णुपाली, कालाखूंटा, हट्टापाली, जगदीशपुर, करपी, करनपाली और तौंसीर में धान के कथित अवैध कारोबार से जुड़े लोग सक्रिय हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग ओडिशा से धान लाने और उसे यहां खपाने की तैयारी में जुटे हैं।

 

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इन रास्तों के जरिए आ रहा धान

 

सूत्रों का दावा है कि पिकअप और 407 वाहनों के जरिए रोजाना धान की खेप जिले में पहुंचाई जा रही है। धान को सीधे खरीदी केंद्रों तक ले जाने के बजाय फिलहाल कुछ खास लोगों के घरों और ठिकानों पर जमा कराया जा रहा है। इसके पीछे कथित रणनीति यह है कि 15 नवंबर को खरीदी केंद्र खुलते ही शुरुआती सप्ताह में ही इस धान को खपा दिया जाए।

 

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सूत्रों की मानें तो ओडिशा के सोहेला से सीधे डोंगरीपाली होते हुए विष्णुपाली, जोगनीपाली, हट्‌टापाली, व करपी, करनपाली तक पहुंच रहा है। जबकि दूसरा रास्ता सोहेला से सीधे चट्‌टीगिरौला होते हुए सिंघोड़ा मंदिर से गनियारीपाली, चारभांठा, पंडरीपानी होते हुए जगदीशपुर, हट्टापाली व करपी तक पहुंच रहा है। वहीं बरमकेला जिला मुख्यालय के बिचौलियों के यहां कंचनपुर के रास्ते सरिया होते हुए पहुंच रहा है। इन सभी जगहों पर एक-एक इंटर स्टेट बैरियर बना हुआ है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो कुछ जगहों पर बैरियर के कर्मचारियों पर दबाव है तो कुछ जगहों पर सांठगांठ के जरिए इन वाहनों को छोड़ा जा रहा।

 

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पहले सप्ताह में खेल

धान खरीदी शुरू होने के बाद शुरुआती दिनों में ही बाहरी धान को सरकारी खरीदी व्यवस्था में खपाने की कथित तैयारी की जा रही है। बिचौलियों के लिए यह समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि खरीदी शुरू होते ही समितियों में धान पहुंचाने की होड़ रहती है। इसी दौरान यदि बाहरी धान को स्थानीय किसानों की उपज बताकर खपा दिया गया तो सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ वास्तविक किसानों के बजाय दलालों की जेब में जा सकता है।

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