आठ शुभ योगों में आज दीपावली, शाम 5:48 बजे से लक्ष्मी पूजन का विशेष मुहूर्त

दीपावली का पर्व इस बार आठ शुभ योगों के संयोग में मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार, शाम 5:48 से 7:47 बजे तक वृषभ लग्न में परिवार के साथ लक्ष्मी-कुबेर पूजन का विशेष मुहूर्त है। रात में निशीथ और महानिशीथ काल में भी पूजा के विशेष समय बताए गए हैं।

दीपावली का पर्व आज आठ शुभ योगों के विशेष संयोग में मनाया जा रहा है। सुबह नरक चतुर्दशी के बाद शाम को घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि सुबह 11:27 बजे शुरू हो गई है। वहीं, परिवार के साथ लक्ष्मी पूजन के लिए शाम 5:48 से 7:47 बजे तक वृषभ लग्न का विशेष मुहूर्त बताया गया है।

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लक्ष्मी पूजन के तीन मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार, इस बार दीपावली पर ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति विशेष मानी जा रही है। पूजा के लिए अलग-अलग लग्न के मुहूर्त बताए गए हैं।

  • शाम 5:48 से 7:47 बजे तक – वृषभ लग्न: परिवार के साथ लक्ष्मी-कुबेर पूजन के लिए विशेष समय।
  • रात 7:47 से 10 बजे तक – मिथुन लग्न: विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों और पत्रकारिता से जुड़े लोगों के लिए शुभ मुहूर्त।
  • रात 12:15 से 2:25 बजे तक – सिंह लग्न: व्यापारियों और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए पूजन का विशेष समय।

 

रात में पूजा के विशेष काल

दीपावली की रात निशीथ काल रात 8:14 से 10:52 बजे तक रहेगा। इसके बाद महानिशीथ काल रात 10:52 बजे से देर रात 1:31 बजे तक बताया गया है। वहीं, शाम 5:23 से रात 10:11 बजे तक शुभ, अमृत और चर चौघड़िया का समय रहेगा।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, महानिशीथ काल में 43 मिनट तक लक्ष्मी मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है। इस दौरान श्री यंत्र स्थापना, कुबेर पूजन और लक्ष्मी मंत्र जाप का भी विधान है।

 

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आठ शुभ योगों का संयोग

ज्योतिषाचार्य डॉ. होस्केरे के मुताबिक, इस बार दीपावली पर हंस योग, मालव्य योग, पंचमहापुरुष योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, बुधादित्य योग और ध्वज योग सहित आठ शुभ योगों का संयोग बन रहा है। इसके साथ स्वाति नक्षत्र भी रहेगा।

धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को सुख, समृद्धि, ज्ञान और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे संयोग में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

 

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राशि के अनुसार पूजा

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राशि के हिसाब से मां लक्ष्मी की आराधना के लिए अलग-अलग उपाय बताए गए हैं।

  • मेष: पांच गोमती चक्र गुलाब जल में रखकर श्री सूक्त का पाठ करें।
  • वृषभ: केसर मिले दूध से मां लक्ष्मी का अभिषेक करें।
  • मिथुन: हरे फलों का भोग लगाएं और पान अर्पित करें।
  • कर्क: विधिवत पूजन कर लक्ष्मी मंत्र का जाप करें।
  • सिंह: अनार के रस से मां लक्ष्मी का अभिषेक करें।
  • कन्या: गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाएं।
  • तुला: शाम को अष्टलक्ष्मी और कुबेर भगवान की पूजा करें।
  • वृश्चिक: गाय को पांच केले खिलाएं और मां लक्ष्मी को लाल पुष्प चढ़ाएं।
  • धनु: मां लक्ष्मी को पीले पुष्प और हल्दी अर्पित करें।
  • मकर: लक्ष्मी मंत्र के साथ मां का अभिषेक करें।
  • कुंभ: केसर मिले दूध से अभिषेक करें और दवात का पूजन करें।
  • मीन: पांच कमलगट्टे अर्पित करें और हल्दी मिले जल से अभिषेक करें।

 

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समुद्र मंथन से प्रकट हुईं मां लक्ष्मी

पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि दुर्वासा के दिए पुष्पहार का अपमान होने पर उन्होंने इंद्र को श्रीहीन होने का श्राप दिया था। इससे चिंतित इंद्र ने ब्रह्माजी से उपाय पूछा। उनकी सलाह पर देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया। इसी मंथन से मां लक्ष्मी प्रकट हुईं, जिनका भगवान विष्णु ने वरण किया। इसी मान्यता के चलते दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

 

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