Sarangarh Rail Connectivity : सारंगढ़ को रेल से जोड़ने की फिर उठी मांग, पुराने 310 किमी रेल मार्ग के सर्वे का आग्रह
Sarangarh Rail Connectivity सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंचल को रेल नेटवर्क से जोड़ने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर उठी है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश सचिव एवं पूर्व पार्षद प्रत्याशी सरिता मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र भेजकर क्षेत्र में रेल सुविधा विस्तार की मांग की है। उन्होंने पुराने रायपुर-सारंगढ़-झारसुगुड़ा रेल मार्ग को फिर गति देने अथवा सारंगढ़ को केंद्र में रखकर वैकल्पिक रेल मार्ग का सर्वे कराने का आग्रह किया है। रेल कनेक्टिविटी की मांग (Sarangarh Rail Connectivity) को उन्होंने क्षेत्र के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है।

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दूर के स्टेशनों पर निर्भर ग्रामीण
पत्र में सरिता मल्होत्रा ने कहा है कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ क्षेत्र में रेल सुविधा केवल ट्रेन या पटरी की मांग नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के विकास और लोगों की सुविधाओं से जुड़ा विषय है। वर्तमान में क्षेत्र के लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए दूर-दराज के रेलवे स्टेशनों तक सड़क या बस से जाना पड़ता है। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। खराब सड़कों के कारण परेशानी और बढ़ जाती है। इसका असर विद्यार्थियों, मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं, नौकरीपेशा लोगों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर पड़ता है। रेल सुविधा से क्षेत्र का जुड़ाव (Sarangarh Rail Connectivity) होने से इन वर्गों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है।
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सीएम साय के रायगढ़ से पुराने जुड़ाव का हवाला
पत्र के दूसरे हिस्से में मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से पुराने संसदीय जुड़ाव का उल्लेख किया है। पत्र के अनुसार साय वर्ष 1999, 2004, 2009 और 2014 में रायगढ़ से लगातार चार बार सांसद रहे हैं और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री का दायित्व भी संभाल चुके हैं। 2008 के परिसीमन के बाद सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बना था। मल्होत्रा ने इसी क्षेत्रीय जुड़ाव का हवाला देते हुए उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री इस पुरानी मांग को आगे बढ़ाने के लिए पहल करेंगे।
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310 किमी रेल लाइन का पुराना प्रस्ताव
रेलवे के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार रायपुर-झारसुगुड़ा 310 किलोमीटर नई रेल लाइन का प्रस्ताव रहा है। पुराने रेलवे दस्तावेजों में इस मार्ग को खरौदापालन, बलौदाबाजार, भटगांव और सारंगढ़ होते हुए झारसुगुड़ा तक प्रस्तावित किए जाने का उल्लेख मिलता है। 2013-14 के रेल बजट के दस्तावेज में भी रायपुर-झारसुगुड़ा 310 किमी नई रेल लाइन दर्ज है। रायपुर-सारंगढ़-झारसुगुड़ा रेल परियोजना (Sarangarh Rail Connectivity) को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से उम्मीद बनी हुई है।
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50 प्रतिशत लागत और जमीन की शर्त से अटका था प्रोजेक्ट
संसद में उपलब्ध रेलवे संबंधी दस्तावेज में रायपुर-झारसुगुड़ा परियोजना की लंबाई 310 किलोमीटर और अनुमानित लागत 2,171 करोड़ रुपये दर्ज थी। इसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा सरकारों से परियोजना की 50 प्रतिशत लागत में हिस्सेदारी तथा भूमि निश्शुल्क उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। दस्तावेज में यह भी दर्ज है कि उस समय राज्य सरकारों से अपेक्षित सहमति प्राप्त नहीं हुई थी।
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पुराना मार्ग संभव नहीं तो नया सर्वे कराने की मांग
सरिता मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री से कहा है कि यदि पुराने 310 किलोमीटर वाले मार्ग में भूमि अधिग्रहण, लागत या तकनीकी कारणों से बाधा है तो सारंगढ़ को नए रेल एलाइनमेंट से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सारंगढ़ को केंद्र में रखते हुए किसी वैकल्पिक रेल मार्ग का नया सर्वे शीघ्र कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सारंगढ़ रेल सुविधा का विस्तार (Sarangarh Rail Connectivity) होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लोगों को दूर के रेलवे स्टेशनों पर निर्भरता से राहत मिल सकती है।
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पत्र में 2020 के लोकसभा सवाल का भी उल्लेख
पत्र में तत्कालीन रायगढ़ सांसद गोमती साय द्वारा 4 मार्च 2020 को लोकसभा में इस परियोजना से जुड़ा प्रश्न उठाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। मल्होत्रा ने पुराने प्रस्ताव, संसदीय सवाल और क्षेत्र की वर्तमान जरूरतों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया है। सरकारी रिकॉर्ड में भी रायपुर-झारसुगुड़ा परियोजना को 310 किलोमीटर लंबी परियोजना के रूप में दर्ज किया गया था।
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