छत्तीसगढ़कृषि समाचार

Baramkela Agriculture Department : मानसून सिर पर और शो-पीस बना ‘कृषि विभाग’, स्प्रेयर के लिए भटक रहे किसान

नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बरमकेला ब्लॉक में स्थानीय कृषि विभाग (Baramkela Agriculture Department)  की संवेदनहीनता और निकम्मेपन के खिलाफ किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। खरीफ सीजन अपने चरम पर है, खेतों में बोनी-रोपाई पूरी हो चुकी है और फसलों को कीड़ों व खरपतवार से बचाने के लिए तत्काल कीटनाशक छिड़काव की जरूरत है। लेकिन, बरमकेला कृषि कार्यालय के सुस्त और लापरवाह अधिकारियों की वजह से जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से स्वीकृत उन्नत बैटरी व पावर स्प्रेयर (छिड़काव मशीनें) धूल खा रही हैं। सरकारी उदासीनता से तंग आकर गरीब किसान खुले बाजार से महंगे दामों पर मशीनें खरीदने या भारी-भरकम किराए पर लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी कृषि लागत आसमान छू रही हैं।

किसानों के हक पर कुंडली मारकर बैठा है विभाग

 खनन प्रभावित क्षेत्रों के गरीब, सीमांत और जरूरतमंद किसानों को संबल देने और उन्हें आधुनिक कृषि से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने DMF फंड से लाखों रुपये के उन्नत स्प्रेयर वितरण को हरी झंडी दी थी। नियम और कायदों के मुताबिक, इन मशीनों का वितरण मानसून की पहली बारिश के साथ ही किसानों के हाथों में हो जाना चाहिए था। मगर बरमकेला कृषि विभाग (Baramkela Agriculture Department)  के सुस्त तंत्र ने इस जनहितैषी योजना को फाइलों के मकड़जाल में कैद कर दिया है। जब खेतों में दवा डालने का सबसे संवेदनशील समय है, तब विभाग मशीनों को गोदामों में बंद कर तमाशा देख रहा है।

 जब फसलें बर्बाद हो जाएंगी, तब क्या मशीनें बांटेगा विभाग

योजना (Baramkela Agriculture Department) के लाभ से वंचित सोनबला, खैरट, सहजबहाल और परधियापाली समेत दर्जनों गांवों के पीड़ित किसानों ने विभाग के खिलाफ अपना तीखा आक्रोश जाहिर किया है। आक्रोशित किसानों ने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि खेती-किसानी का काम शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, खेतों में खरपतवार और खतरनाक कीटों का हमला शुरू हो गया है। जब हमारी फसलों को इस समय सबसे ज्यादा जरूरत है, तब अधिकारी इन मशीनों को दबाकर बैठे हैं। क्या हमारे बर्बाद होने के बाद विभाग औपचारिकता पूरी करने के लिए मशीनें बांटेगा? इस लेटलतीफी का नुकसान सिर्फ और सिर्फ गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16 (1)
WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16
Apex-hospital

कलेक्टर की कड़क समीक्षा बैठकें भी बेअसर

हैरानी की बात यह है कि कलेक्ट्रेट कार्यालय सारंगढ़ में जिला कलेक्टर द्वारा लगातार समय-सीमा की बैठकों (TL) में कृषि और राजस्व संबंधी जनकल्याणकारी कार्यों की कड़ाई से समीक्षा की जा रही है। इसके बावजूद, बरमकेला कृषि विभाग (Baramkela Agriculture Department) के जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। जब भी किसान या जनप्रतिनिधि सवाल पूछते हैं, अधिकारी ‘सत्यापन जारी है’ और ‘वितरण प्रक्रिया अंतिम चरण में है’ का घिसा-पिटा और रटा-रटाया बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.07
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (1)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (1)
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (2)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 16.26.10
IMG-20260814-WA0019
IMG-20260815-WA0012
IMG-20260822-WA0004
IMG-20260830-WA0020
IMG-20260814-WA0017
IMG-20260902-WA0013
IMG-20260815-WA0020
IMG-20260822-WA0004
IMG-20260815-WA0019
IMG-20260815-WA0026(1)
IMG-20260907-WA0004
IMG-20260907-WA0003
IMG-20260909-WA0011
IMG-20260909-WA0012
Oplus_131072

Baramkela Agriculture Department के घेराव और उग्र आंदोलन की खुली चेतावनी

बरमकेला (Baramkela Agriculture Department) ब्लॉक के उग्र किसान संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि एक सप्ताह के भीतर पात्र किसानों की सूची सार्वजनिक कर तत्काल स्प्रेयर का वितरण शुरू कराया जाए। किसानों ने दोटूक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर कृषि यंत्रों का वितरण धरातल पर शुरू नहीं हुआ, तो क्षेत्र के सैकड़ों किसान बरमकेला कृषि कार्यालय का घेराव करेंगे और उग्र आंदोलन के साथ दफ्तर में तालाबंदी करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button