नवगठित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया तहसील (Sariya Tehsildar) अंतर्गत ग्राम बोन्दा से प्रशासनिक तानाशाही और बेरहमी की एक ऐसी खौफनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके के किसानों को आंदोलित कर दिया है। यहां पदस्थ तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू पर एक किसान की अनुपस्थिति में, उसके अपने ही खेत के भीतर शांति से खड़े ट्रैक्टर को जबरन सड़क पर खींचकर लाने और उस पर मनमाने ढंग से जब्ती की सील ठोकने का बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगा है। इस अमानवीय और एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई से आक्रोशित होकर पीड़ित किसान ने जिला कलेक्टर और एसडीएम के दफ्तर पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीण और किसान संगठनों ने तहसीलदार की इस कार्रवाई को सरासर ‘प्रशासनिक गुंडागर्दी’ और पद का खुला दुरुपयोग करार दिया है।
खेत में शांति से खड़ा था ट्रैक्टर
यह पूरा मामला ग्राम बोन्दा के पीड़ित किसान तोषराम पटेल का है। तोषराम ने अपनी लिखित शिकायत में उस दिन की पूरी दास्तां बयां करते हुए बताया कि वह 10 जुलाई को अपने केजव्हील (लोहे के पहिए वाले) ट्रैक्टर से धान की बुवाई और खेत की जुताई करने गया था। नियमानुसार सड़क पर चलते समय उसने केजव्हील में सुरक्षा पट्टी (लोहे की रबर पट्टी) बांधी हुई थी ताकि सड़क को कोई नुकसान न हो। खेत पहुंचने के बाद उसने पट्टी निकाली, जुताई की और ट्रैक्टर (Sariya Tehsildar) को अपने निजी खेत की सरहद के भीतर सुरक्षित खड़ा करके घर लौट आया।
अगले दिन सुबह जब वह धान का बीज और पहिए की पट्टी लेकर दोबारा खेत पहुंचा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसका ट्रैक्टर अपनी जगह पर नहीं था। तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू (Sariya Tehsildar) की टीम ने किसान की गैरमौजूदगी में, बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के, ट्रैक्टर को खेत की निजी सीमा से बाहर घसीटकर सड़क पार दूसरी ओर खड़ा किया और डकैतों की तरह एकतरफा पंचनामा तैयार कर उसे सील कर दिया।
चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं ट्रैक्टर के टायर के निशान
प्रशासन की इस बेशर्म मनमानी की कलई खुद घटना स्थल पर मौजूद सबूत खोल रहे हैं। किसान तोषराम पटेल ने सीना ठोककर दावा किया है कि मेरे खेत की गीली मिट्टी में आज भी ट्रैक्टर को भीतर से जबरन घुमाकर बाहर सड़क की तरफ खींचने के स्पष्ट और ताजा निशान मौजूद हैं। यह साबित करने के लिए काफी है कि ट्रैक्टर सड़क पर नहीं, बल्कि खेत के अंदर खड़ा था।
जब मैंने इस अवैध जब्ती के संबंध में सरिया तहसीलदार (Sariya Tehsildar) कोमल प्रसाद साहू को वस्तुस्थिति से अवगत कराने की कोशिश की, तो उन्होंने मेरी एक न सुनी। उल्टा अपनी प्रशासनिक धौंस दिखाते हुए मुझे जेल भेजने और और बड़ी कार्रवाई करने की धमकी देकर दफ्तर से भगा दिया। इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ अब गांव के सरपंच, पंच, आसपास के खेतों के किसान और बड़ी संख्या में ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे इस बात के चश्मदीद गवाह हैं कि ट्रैक्टर पूरी तरह से खेत की सीमा के अंदर ही खड़ा था, उसे जबरन बाहर लाकर फंसाया गया है।
Sariya Tehsildar दाने-दाने को मोहताज करने की साजिश
जुलाई का यह महीना छत्तीसगढ़ (Sariya Tehsildar) के किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, जहां खरीफ की बुवाई और रोपाई का काम युद्ध स्तर पर चलता है। ऐसे संवेदनशील समय में तोषराम पटेल का एकमात्र ट्रैक्टर सील हो जाने से उसके खेतों में धान की बुवाई पूरी तरह ठप हो गई है। किसान का कहना है कि यदि समय पर बुवाई नहीं हुई तो उसका पूरा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा।
प्रशासन की इस दमनकारी नीति से आहत होकर तोषराम ने सोमवार को सारंगढ़ कलेक्टरेट पहुंचकर कलेक्टर और एसडीएम को लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। उसने मांग की है कि इस फर्जी और षड्यंत्रकारी पंचनामे को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए, दोषी अधिकारियों (Sariya Tehsildar) के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए और उसका ट्रैक्टर बिना शर्त तुरंत वापस दिलाया जाए।
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