धर्म-राशिफल

Sawan Somwar : हर-हर महादेव से गूंजे शिवालय, पहले सोमवार पर उमड़ा आस्था का सैलाब

Sawan Somwar : आज सावन का पहला सोमवार है। देशभर के शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सोमनाथ से काशी विश्वनाथ और बाबा बैद्यनाथ धाम तक जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी हैं। वहीं छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिवधामों में भी भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

Sawan Somwar सावन का पहला सोमवार आज पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। सावन सोमवार (Sawan Somwar) के अवसर पर सुबह से ही देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

गुजरात के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ से लेकर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम और दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर तक हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया।

श्रद्धालु भगवान शिव Sawan Somwar)  का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। मंदिरों में सुबह से लंबी कतारें लगी हुई हैं और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

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देशभर के शिवालयों में उमड़ी भक्तों की भीड़

काशी विश्वनाथ मंदिर Sawan Somwar)  में मंगला आरती के साथ दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। ओडिशा के पुरी स्थित लोकनाथ मंदिर, दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर और गुजरात के सोमनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।

सनातन परंपरा में सावन का महीना और विशेष रूप से इसका पहला सोमवार अत्यंत पावन माना गया है. (Photo: Social Media)

वहीं झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम में आज 2 से 3 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। देवघर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) सहित अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।

क्यों खास होता है सावन का पहला Sawan Somwar

सनातन परंपरा में सावन सोमवार (Sawan Somwar) का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इसी माह माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसलिए सावन में शिव पूजा, जलाभिषेक और व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Sawan

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छत्तीसगढ़ के इन 8 शिवधामों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

सावन के पहले सोमवार पर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शिवालयों में भी सुबह से भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे।

1. मधेश्वर महादेव धाम

जशपुर जिले के मयाली पहाड़ी पर स्थित यह प्राकृतिक शिवलिंग घने जंगलों और मनमोहक प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित है। सावन में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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2. भोरमदेव मंदिर (कवर्धा)

‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहलाने वाला यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट पत्थर नक्काशी और ऐतिहासिक स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है।

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3. हटकेश्वर महादेव मंदिर (रायपुर)

महादेव घाट स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर सावन में जलाभिषेक के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बन जाता है।

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4. कुलेश्वर महादेव (राजिम)

त्रिवेणी संगम पर स्थित इस मंदिर का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है।

5. लक्ष्मणेश्वर महादेव (खरौद)

प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है।

6. भूतेश्वर महादेव (गरियाबंद)

मरौदा गांव स्थित स्वयंभू शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि इसका आकार लगातार बढ़ रहा है।

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7. जलेश्वर महादेव (बारसूर, बस्तर)

प्राचीन शैव स्थापत्य का यह मंदिर बस्तर की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है।

8. जलेश्वर धाम (अमरकंटक मार्ग)

प्राकृतिक जलकुंड और शांत वातावरण के कारण यह शिवधाम श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र है।

 

धार्मिक पर्यटन को भी मिल रही नई पहचान

सावन Sawan Somwar)  और महाशिवरात्रि के दौरान इन सभी शिवधामों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, ये शिवधाम केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की अमूल्य पहचान भी हैं।

 

 

 

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