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Digital Arrest Scam : शिक्षिका से 4.50 लाख की बड़ी ठगी, झूठे जाल में फंसाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ

Ambikapur Cyber Fraud : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में साइबर अपराधियों (Digital Arrest Scam) ने एक बार फिर खौफ का सहारा लेकर एक शिक्षित महिला को अपना शिकार बनाया है। अंबिकापुर के एक मिडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षिका को सुनियोजित डिजिटल अरेस्ट स्कैममें फंसाकर ठगों ने साढ़े चार लाख रुपये लूट लिए। यह घटना तब शुरू हुई जब 19 मार्च 2026 को शिक्षिका परीक्षा ड्यूटी के बाद घर लौट रही थीं। उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया, जिसमें सामने वाले ने खुद को रायपुर क्राइम ब्रांच का बड़ा अधिकारी बताया।

अश्लील कंटेंट का झूठा आरोप और धमकी

ठगों ने शिक्षिका पर आरोप लगाया कि उनके मोबाइल नंबर से ऑनलाइन अश्लील सामग्री देखी गई है, जो कि एक गंभीर अपराध है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam) की कार्यप्रणाली के तहत ठगों ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने की धमकी दी। घबराई हुई शिक्षिका को विश्वास दिलाया गया कि यदि वह ‘सुरक्षा धन’ जमा करती हैं, तो उनकी गिरफ्तारी रुक सकती है और जांच के बाद यह राशि वापस कर दी जाएगी। सामाजिक प्रतिष्ठा और नौकरी जाने के डर से शिक्षिका पूरी तरह ठगों के प्रभाव में आ गईं।

किश्तों में वसूली और च्वाइस सेंटर का उपयोग

अपराधियों ने शिक्षिका को इस कदर डरा दिया कि उन्होंने बिना किसी से सलाह लिए पैसे देना शुरू कर दिया। 19 मार्च से 25 मार्च के बीच डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam) के जरिए ठगों ने यूपीआई (UPI) के माध्यम से कई किश्तों में कुल 4,50,000 रुपये ट्रांसफर करवाए। हैरान करने वाली बात यह है कि ठगों के दबाव में आकर शिक्षिका के पति ने भी कुछ राशि च्वाइस सेंटर के माध्यम से आरोपियों के खातों में भेजी। 25 मार्च को अंतिम बार कॉल कर ठगों ने पैसे लौटाने का वादा किया, लेकिन साथ ही मुंह खोलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी।

सहकर्मियों की सलाह पर खुला राज

कई दिनों तक मानसिक तनाव में रहने के बाद जब शिक्षिका ने अपनी आपबीती स्कूल की अन्य सहकर्मी शिक्षिकाओं को सुनाई, तब उन्हें पता चला कि वे एक शातिर डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam) का शिकार हो चुकी हैं। साइबर ठगी का एहसास होते ही पीड़िता ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। अंबिकापुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात मोबाइल नंबरों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।

साइबर सेल और पुलिस की जांच तेज

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam) करने वाले गिरोह अक्सर तकनीकी रूप से काफी चालाक होते हैं। वर्तमान में पुलिस मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह अंतरराज्यीय हो सकता है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर पैसे की मांग नहीं करता और न ही वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार करने का प्रावधान है।

सावधानी ही बचाव है Digital Arrest Scam

डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam) से बचने का एकमात्र तरीका जागरूकता है। यदि आपके पास भी ऐसा कोई फोन आता है जिसमें गिरफ्तारी या सीबीआई/पुलिस का डर दिखाया जाए, तो तुरंत फोन काटें और स्थानीय थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें। अंबिकापुर की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि साइबर ठग अब पढ़े-लिखे वर्ग को अपना निशाना बना रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam) की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरगुजा पुलिस अब जागरूकता अभियान भी चलाने की योजना बना रही है।

 

 

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