सारंगढ़ बिलाईगढ़

Crusher Road Controversy : सरकारी नाला पाटकर क्रशर का रास्ता! प्रशासन मौन, ग्रामीणों में उबाल

Crusher Road Controversy पहले से क्रशरों की धूल, धुएं और भारी वाहनों की मार झेल रहे ग्रामीणों की परेशानी अब और बढ़ती नजर आ रही है। सरकारी नाले की प्राकृतिक जल निकासी को बड़े पाइप डालकर पाटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि यह रास्ता प्रस्तावित क्रशर उद्योग तक पहुंच बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले में प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

Crusher Road Controversy : सरकारी नाला पाटकर क्रशर का रास्ता! प्रशासन मौन, ग्रामीणों में उबाल

करीब 30 मीटर हिस्से में बड़े पाइप डालकर नाले को समतल किए जाने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी जमीन और नाले की संरचना से छेड़छाड़ कर निजी उद्योग (Crusher Road Controversy)  के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया तहसील क्षेत्र में बोंदा-नौघटा पहुंच मार्ग के किनारे स्थित शासकीय बगई नाले में पाइप डालकर रास्ता बनाए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत बोंदा की सीमा में प्रस्तावित क्रशर उद्योग के लिए यह रास्ता तैयार किया जा रहा है।

 

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सरकारी नाला पाटकर बना रहे रास्ता

ग्रामीणों के अनुसार बगई नाले के करीब 30 मीटर हिस्से में बड़े-बड़े पाइप डाले गए हैं। इसके बाद मिट्टी डालकर नाले को समतल किया गया है, ताकि वाहनों की आवाजाही के लिए रास्ता तैयार हो सके। ग्रामीणों ने सरकारी नाला (Crusher Road Controversy) पाटे जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नाला बारिश के पानी की प्राकृतिक निकासी का जरिया है। इसे पाटने से आने वाले समय में जलभराव और खेतों में पानी भरने की समस्या बढ़ सकती है।

 

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किसकी अनुमति से सरकारी जमीन पर काम?

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि शासकीय नाले पर पाइप डालकर रास्ता बनाने की अनुमति आखिर किसने दी? ग्रामीणों के मुताबिक मौके पर किसी विभागीय अनुमति या स्वीकृति से संबंधित सूचना भी दिखाई नहीं दे रही है।

यदि बिना अनुमति सरकारी नाले और जमीन पर निर्माण किया गया है तो यह गंभीर मामला है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थल निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच कराने और दोषियों (Crusher Road Controversy)  पर कार्रवाई की मांग की है।

 

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7-8 क्रशरों से पहले ही परेशान गांव

नौघटा-बोंदा मार्ग पर पहले से करीब 7-8 क्रशर (Crusher Road Controversy)  संचालित होने की बात ग्रामीणों ने कही है। इन क्रशरों से निकलने वाली धूल-धुएं और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं। ग्रामीणों का दावा है कि मार्ग पर 12 टन से अधिक क्षमता वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही जारी है। इससे सड़क की हालत भी खराब हो चुकी है।

 

 

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पहले चक्काजाम, अब नाले पर कब्जे का आरोप

भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर नौघटा के ग्रामीण पहले भी चक्काजाम कर विरोध जता चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी समस्याओं का समाधान किए बिना अब नए क्रशर के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है।

क्रशर का रास्ता (Crusher Road Controversy) बनाने के लिए नाले की प्राकृतिक संरचना से छेड़छाड़ के आरोप ने ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन अगर समय रहते कार्रवाई नहीं करता है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

 

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Crusher Road Controversy  प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन पर खुलेआम काम होने के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है। शिकायतों के बाद भी मौके पर काम जारी रहने से ग्रामीण प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन की चुप्पी (Crusher Road Controversy) से निजी उद्योग को बढ़ावा मिलने का संदेश जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कर निर्माण कार्य रुकवाया जाए।

 

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तीन दशक पुराना नाला, अब रास्ते में तब्दील

ग्रामीणों का दावा है कि करीब तीन दशक पहले तक बगई नाला सक्रिय अवस्था में था और बारिश का पानी इसी रास्ते से निकलता था। अब नाले में पाइप डालकर उसे रास्ते में तब्दील किए जाने से प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने कहा कि शासकीय जमीन पर निर्माण (Crusher Road Controversy) की अनुमति और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

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तहसीलदार बोले- जानकारी नहीं, देखना पड़ेगा

मामले (Crusher Road Controversy)  में तहसीलदार सरिया पुष्पेन्द्र सिंह राज ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले को देखना पड़ेगा। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि शासकीय बगई नाले पर पाइप डालकर रास्ता बनाने के लिए किसी विभाग से अनुमति ली गई है या नहीं। फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।

 

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नया क्रशर, पुरानी मुसीबत और प्रशासन पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र पहले ही क्रशरों की धूल और भारी वाहनों से परेशान है। ऐसे में प्रस्तावित क्रशर के लिए सरकारी नाले को पाटकर रास्ता बनाए जाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। प्रस्तावित क्रशर विवाद (Crusher Road Controversy) अब सिर्फ रास्ता बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। मामला सरकारी जमीन, प्राकृतिक जल निकासी और प्रशासनिक अनुमति से जुड़ गया है। ग्रामीणों ने तत्काल जांच, स्थल निरीक्षण और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

 

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