Ghoghra Pond Controversy : निस्तारी तालाब बचाने ग्रामीणों का मोर्चा, डस्ट डंपिंग रुकवाई, चक्काजाम की चेतावनी
Ghoghra Pond Controversy एक गांव के सैकड़ों परिवारों और मवेशियों के लिए पानी का एकमात्र सहारा माने जा रहे तालाब पर संकट खड़ा हो गया है। जलग्रहण क्षेत्र के पास औद्योगिक डस्ट की डंपिंग को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। निस्तारी तालाब को बचाने की लड़ाई (Ghoghra Pond Controversy) अब सड़क तक पहुंच गई है।
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने खुद मौके पर पहुंचकर डंपिंग का काम रुकवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान डस्ट बहकर तालाब में पहुंचा तो पानी दूषित होने का खतरा है। अब ग्रामीणों ने प्रशासन को 24 घंटे का समय देते हुए डस्ट हटाने की मांग की है।
मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक के ग्राम घोघरा का है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव का यही प्रमुख निस्तारी तालाब है, जिस पर 200 से अधिक परिवार निस्तार, सिंचाई और मवेशियों के पानी के लिए निर्भर हैं। घोघरा के निस्तारी तालाब का विवाद (Ghoghra Pond Controversy) अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।
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जलग्रहण क्षेत्र में डंपिंग
ग्रामीणों के अनुसार तालाब में बारिश का पानी पहुंचाने वाली मुख्य नाली के ठीक बगल वाले खेत में बड़ी मात्रा में औद्योगिक डस्ट डंप किया जा रहा है। उनका आरोप है कि बारिश होने पर यह डस्ट बहकर नाली के रास्ते तालाब में पहुंच सकता है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि डस्ट तालाब में पहुंचने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इससे इंसानों के साथ मवेशियों और जलीय जीवों पर भी असर पड़ने की चिंता ग्रामीणों ने जाहिर की है। औद्योगिक डस्ट की डंपिंग का मामला (Ghoghra Pond Controversy) इसी वजह से तूल पकड़ रहा है।
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शिकायत के बाद भी नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि डंपिंग को लेकर जिला प्रशासन के समक्ष पहले ही लिखित शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद मौके पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही। इसी से नाराज होकर ग्रामीण एकजुट हुए और मौके पर पहुंचकर डंपिंग का काम रुकवा दिया। प्रशासन से कार्रवाई की मांग (Ghoghra Pond Controversy) को लेकर ग्रामीणों ने अब अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
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200 परिवारों की चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक तालाब गांव के 200 से अधिक परिवारों के लिए निस्तारी और सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके अलावा मवेशियों के पीने के पानी के लिए भी इसी तालाब पर निर्भरता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि डस्ट बारिश के पानी के साथ तालाब में पहुंचता है तो पानी दूषित होने की आशंका है। ऐसे में ग्रामीणों के साथ पशुधन और जलीय जीवों पर भी असर पड़ सकता है। तालाब के पानी को सुरक्षित रखने की मांग (Ghoghra Pond Controversy) को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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24 घंटे का अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को 24 घंटे का समय दिया है। उनका कहना है कि इस अवधि में डंप किया गया डस्ट पूरी तरह हटाया नहीं गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी दी है। फिलहाल डंपिंग को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बताई जा रही है। डस्ट हटाने की मांग पर आंदोलन की चेतावनी (Ghoghra Pond Controversy) के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर है।
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ग्रामीण बोले- तालाब बचाएंगे
घोघरा निवासी जोगेश्वर साव ने कहा कि ग्रामीण कई दिनों से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद लोगों ने खुद मौके पर पहुंचकर काम रुकवाया।
उन्होंने कहा कि यह बच्चों, परिवारों और मवेशियों के पानी से जुड़ा मामला है। ग्रामीण तालाब को किसी भी स्थिति में बर्बाद नहीं होने देना चाहते। ग्रामीणों की आपत्ति और विरोध (Ghoghra Pond Controversy) के बीच अब प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की जा रही है।
मामले में ग्रामीणों ने डंप किए गए औद्योगिक डस्ट को हटाने और भविष्य में जलग्रहण क्षेत्र में ऐसी डंपिंग रोकने की मांग की है। वहीं, लगाए गए आरोपों और डंपिंग की वास्तविक स्थिति पर प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
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