Sunita Yadav Teacher : बरमकेला खिचरी की पाठशाला से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची सुनीता यादव की नवाचार यात्रा
सारंगढ़-बिलाईगढ़ की शिक्षिका सुनीता यादव को नवाचारी शिक्षण के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बच्चों को बाजार में ले जाकर गणित सिखाने से लेकर लघु फिल्म, आडियो बुक और पाडकास्ट के जरिए पढ़ाई कराने तक उन्होंने कई प्रयोग किए। कमजोर विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने और स्कूल का माहौल बदलने के उनके प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने जा रही है।
Sunita Yadav Teacher किताबों की सीमाओं से बाहर निकलकर बच्चों को रोजमर्रा के अनुभवों से सीखने का अवसर देने वाली शिक्षिका सुनीता यादव की नवाचार यात्रा अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है। पढ़ाई को गतिविधियों और तकनीक से जोड़कर उन्होंने बच्चों के सीखने का तरीका बदला है। उनके इसी प्रयास के लिए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
Sunita Yadav Teacher बाजार बना कक्षा, बच्चे बने दुकानदार
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लाक से करीब तीन किलोमीटर दूर शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी में सुनीता यादव ने पढ़ाई के कई नए तरीके अपनाए हैं। बच्चों को बाजार में ले जाकर गणित सिखाने का प्रयोग इनमें खास है। कक्षा में बच्चे दुकानदार और गांव के लोग ग्राहक बनते हैं। खरीद-बिक्री की गतिविधि के जरिए बच्चे जोड़-घटाव, मुद्रा, लाभ-हानि और गणितीय संक्रियाएं सीखते हैं। यह प्रयोग बाजार आधारित गणित शिक्षा (Sunita Yadav Teacher) का उदाहरण है।
अंतिम पंक्ति के बच्चों पर खास ध्यान
सुनीता यादव की शिक्षण यात्रा का महत्वपूर्ण पक्ष उन बच्चों को आगे लाना है, जो कक्षा में सबसे पीछे रह जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर, मजदूर और कामगार परिवारों से आने वाले बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के साथ उनकी प्रतिभा को मंच देने का प्रयास किया गया।
साहित्य को शिक्षा से जोड़ते हुए अनुभव आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में समझ विकसित की जाती है। अंग्रेजी को समझकर पढ़ना, संख्या ज्ञान, गणितीय संक्रियाएं और घटनाओं को क्रम से व्यक्त करने जैसी क्षमताओं पर भी काम किया जाता है। इस नवाचारी शिक्षण पद्धति (Sunita Yadav Teacher) का उद्देश्य हर बच्चे को सीखने का समान अवसर देना है।
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स्कूल की तस्वीर बदली, सीखने का माहौल भी
जब सुनीता यादव ने शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी में पदभार संभाला, तब स्कूल में शौचालय और रैंप जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने जनसमुदाय को साथ लेकर रैंप और शौचालय बनवाए। स्कूल परिसर के सुंदरीकरण, पौधारोपण और प्रिंट रिच वातावरण तैयार करने पर भी काम किया।
बच्चों के लिए जूता-मोजा, टाई-बेल्ट, बैग, पानी की बोतल, स्टेशनरी, स्वेटर और शैक्षणिक सामग्री की व्यवस्था भी समुदाय के सहयोग से कराई गई। कोरोना काल में दो लैपटाप जुटाकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद की गई। स्कूल की सुविधाओं के साथ सरकारी स्कूल में बदलाव (Sunita Yadav Teacher) पर भी ध्यान दिया गया।
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लघु फिल्म और पाडकास्ट से पढ़ाई
सुनीता यादव ने तकनीक को भी कक्षा का साथी बनाया है। विषयों को समझाने के लिए लघु फिल्में तैयार की जाती हैं, जिनमें बच्चे और शिक्षिका स्वयं अभिनय करते हैं। आडियो बुक, पाडकास्ट, ब्लागिंग, रिपोर्टिंग और स्मार्ट क्लास जैसी गतिविधियों के जरिए बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई से आगे का अनुभव दिया जाता है।
पोषण को भी शिक्षा से जोड़ा गया है। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपने स्तर पर नियमित दूध वितरण किया जाता है। न्योता भोजन के माध्यम से भी बच्चों के पोषण पर ध्यान दिया जाता है। इस तरह डिजिटल और गतिविधि आधारित शिक्षा (Sunita Yadav Teacher) को कक्षा का हिस्सा बनाया गया है।
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बच्चों ने जिला से राष्ट्रीय स्तर तक बनाई पहचान
शाला के बच्चों ने विभिन्न स्तरों पर उपलब्धियां हासिल की हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शिक्षा समागम में छत्तीसगढ़ के 10 प्रतिभावान बच्चों में चयनित दो बच्चे शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी से थे। ‘सुग्घर पढ़वैया’ योजना के आकलन में स्कूल को प्लैटिनम ग्रेड मिला।
विश्व पावर चैंपियनशिप-23 में स्कूल की कक्षा चौथी की छात्रा छत्तीसगढ़ की विजेता बनी और उसे मुंबई में प्रदर्शन का अवसर मिला। मौखिक गणित कौशल और व्यक्तित्व विकास प्रतियोगिताओं में भी शाला के विद्यार्थियों ने जिला, संभाग और राज्य स्तर तक अपनी प्रतिभा दिखाई। इन उपलब्धियों ने स्कूल के बच्चों की प्रतिभा (Sunita Yadav Teacher) को व्यापक पहचान दिलाई।
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शिक्षण के साथ शोध पर भी काम
सुनीता यादव का काम कक्षा तक सीमित नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलाव पर शोध पत्र तैयार किया है। जिले की पहली महिला शिक्षिका के रूप में इस विषय पर शोध कार्य करना उनके शैक्षणिक सरोकार को दर्शाता है। शिक्षण में नए प्रयोगों के साथ शोध से जुड़ना भी शिक्षिका का शैक्षणिक नवाचार (Sunita Yadav Teacher) का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
कई सम्मान मिले, अब राष्ट्रीय पुरस्कार
सुनीता यादव को मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण और शिक्षादूत सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2023 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए उनका नामांकन हुआ था। वर्ष 2025 में शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन रायपुर में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के हाथों उन्हें डा. मुकुटधर पांडेय स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र, शाल और चेक प्रदान किया गया।
अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (Sunita Yadav Teacher) से सम्मानित होने जा रहीं सुनीता यादव की यात्रा गांव की पाठशाला से राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई है। उनके नवाचारी प्रयोगों ने बच्चों की पढ़ाई को अनुभव, तकनीक और गतिविधियों से जोड़ने का नया तरीका सामने रखा है।
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