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World Kidney Day : भारत में 13.8 करोड़ क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीज! ये खतरनाक आदतें पहुंचा रहीं नुकसान

World Kidney Day : आज 12 मार्च को पूरी दुनिया वर्ल्ड किडनी डे (World Kidney Day) मना रही है। तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और खराब खान-पान का असर अब शरीर के सबसे अहम फिल्टर यानी किडनी पर दिखाई देने लगा है।

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (Institute for Health Metrics and Evaluation-IHME) की रिसर्च में 1990 से 2023 के बीच 204 देशों के किडनी (World Kidney Day) हेल्थ डेटा का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में सामने आया कि क्रोनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease-CKD) अब दुनिया में मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 13.8 करोड़ लोग क्रोनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease-CKD) से पीड़ित हैं। यह संख्या दुनिया में चीन के बाद दूसरी सबसे ज्यादा है।

दिल्ली के सीके बिरला हॉस्पिटल (CK Birla Hospital) के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विक्रम कालरा ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि अनुसार किडनी (World Kidney Day) की बीमारी की सबसे डरावनी बात यह है कि यह धीरे-धीरे और चुपचाप बढ़ती है। जब तक इसके लक्षण साफ तौर पर सामने आते हैं, तब तक किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है।

 

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World Kidney Day  साइलेंट किलर है किडनी की बीमारी

विशेषज्ञों के मुताबिक क्रोनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease-CKD) को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है। शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। जब शरीर में सूजन, अत्यधिक थकान, पेशाब कम आना या हाई ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण दिखने लगते हैं, तब तक किडनी की कार्यक्षमता काफी प्रभावित हो चुकी होती है। इसलिए समय-समय पर ब्लड क्रिएटिनिन और यूरिन टेस्ट जैसे सामान्य जांच करवाना जरूरी माना जाता है।

पेनकिलर का ज्यादा इस्तेमाल बन सकता है खतरा

अक्सर लोग सिरदर्द या शरीर में दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर दवाएं ले लेते हैं। लेकिन यह आदत किडनी के लिए खतरनाक हो सकती है। नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drugs-NSAIDs) जैसे इबुप्रोफेन और डाइक्लोफेनाक का बार-बार इस्तेमाल किडनी तक जाने वाले रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। इससे धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

खराब खान-पान और लाइफस्टाइल जिम्मेदार

डॉक्टरों के अनुसार आजकल कम उम्र के लोगों में भी क्रोनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease-CKD) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे खराब खान-पान, मोटापा, अनियंत्रित डायबिटीज और लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली लाइफस्टाइल को मुख्य कारण माना जा रहा है।

इसके अलावा बढ़ता तनाव और कम पानी पीने की आदत भी शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है, जिससे किडनी (World Kidney Day) पर दबाव बढ़ जाता है। विशेषज्ञ नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन को किडनी की सेहत के लिए जरूरी मानते हैं।

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डायबिटीज मरीजों को रखना चाहिए खास ध्यान

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में क्रोनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease-CKD) बिना लक्षण के विकसित हो सकती है। शुरुआती नुकसान का पता लगाने के लिए यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो (Urine Albumin to Creatinine Ratio-UACR) और अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (Estimated Glomerular Filtration Rate-eGFR) जैसे टेस्ट काफी कारगर माने जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक डायबिटीज के मरीजों को साल में कम से कम एक बार अपनी किडनी (World Kidney Day) की जांच जरूर करवानी चाहिए ताकि समय रहते बीमारी को नियंत्रित किया जा सके।

 

 

Disclaimer : इस आर्टिकल में दी गई जानकारी डॉक्टर के इनपुट के आधार पर तैयार की गई है। इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या उपचार का विकल्प न मानें। यदि आपको कोई लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

 

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