Bastar Flood Crisis बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब के प्रभाव से पिछले तीन दिनों से बस्तर संभाग में लगातार बारिश हो रही है। इंद्रावती, सबरी सहित संभाग की प्रमुख नदियां उफान पर हैं और खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ओडिशा में इंद्रावती नदी स्थित खातीगुड़ा और इसकी सहायक नदी मुरान के बांध के गेट खोले जाने से स्थिति और बिगड़ गई है। बस्तर में बाढ़ संकट (Bastar Flood Crisis) के कारण 300 से अधिक गांव बाढ़ से घिरकर टापू बन गए हैं।
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नगरनार क्षेत्र के भेजापदर, तोकापाल के घाट धनोरा सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला है। बचाए गए ग्रामीणों को राहत शिविरों में भेजा गया है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार बाढ़ और बारिश के कारण 100 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में रेस्क्यू अभियान (Bastar Flood Crisis) लगातार चलाया जा रहा है।
रेल और सड़क यातायात प्रभावित
बाढ़ के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर रायपुर-कांकेर-कोटा मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग-63 पर जगदलपुर-बीजापुर-भोपालपत्तनम मार्ग कई जगह बाधित हो गया है। सड़क परिवहन पहले से ही प्रभावित है। दूसरी ओर किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन के कोरापुट रेलखंड में चार स्थानों पर भूस्खलन के कारण रेल पटरी क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके चलते ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई है। बस्तर में रेल और सड़क यातायात (Bastar Flood Crisis) प्रभावित होने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
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हैदराबाद-जगदलपुर-रायपुर उड़ान भी बंद
बाढ़ और खराब मौसम का असर हवाई सेवा पर भी पड़ा है। हैदराबाद-जगदलपुर-रायपुर फ्लाइट दो दिनों से बंद है। रेलमार्ग को बहाल करने में तीन से चार दिन का समय लगने की संभावना बताई गई है। फिलहाल सभी ट्रेनें रद कर दी गई हैं। इससे बस्तर का दूसरे क्षेत्रों से संपर्क प्रभावित हुआ है। बस्तर में परिवहन व्यवस्था प्रभावित (Bastar Flood Crisis) होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सातों जिलों में राहत और बचाव अभियान
बाढ़ आपदा को देखते हुए बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों में शुक्रवार को अवकाश घोषित किया गया। कोंटा नगर से लेकर जगदलपुर की निचली बस्तियों तक पानी भर गया है। कई मकान पानी में डूब गए हैं। प्रशासन ने सभी जिलों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। संभाग में 50 से अधिक राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है।
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सुकमा, बीजापुर और बस्तर में ज्यादा असर
बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिले में देखा जा रहा है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दल की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। सांसद महेश कश्यप भी बाढ़ प्रभावित टापू बने गांव भेजापदर पहुंचे और अधिकारियों के साथ मोटरबोट से प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। बस्तर के बाढ़ प्रभावित इलाकों (Bastar Flood Crisis) में राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
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