Raigarh Dairy Farm : 1,200 रुपये से शुरू किया कारोबार, 117 पशुओं तक पहुंचा फार्म; दूध से बढ़ी कमाई, 16 लोगों को रोजगार
Raigarh Dairy Farm महज 1,200 रुपये और एक गाय से शुरू किया गया दूध का कारोबार आज 117 पशुओं के डेयरी फार्म तक पहुंच गया है। शासकीय योजनाओं, ऋण, सब्सिडी, विभागीय मार्गदर्शन और मेहनत से डेयरी का विस्तार हुआ। इसका फायदा केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 42 किसान परिवारों से रोज करीब 300 लीटर दूध का संग्रहण हो रहा है। वहीं डेयरी से 16 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।

ग्रामीण क्षेत्र में छोटे स्तर से शुरू हुआ यह डेयरी व्यवसाय अब दूध उत्पादन और रोजगार का माध्यम बन चुका है। आसपास के किसान परिवारों को अपने दूध की नियमित बिक्री का जरिया मिला है। पशुपालन विभाग की तकनीकी सलाह से पशुओं के स्वास्थ्य और डेयरी प्रबंधन को भी बेहतर किया जा रहा है। इस तरह डेयरी फार्म (Raigarh Dairy Farm) ने व्यक्तिगत कारोबार के साथ दूसरे किसान परिवारों के लिए भी आय का रास्ता तैयार किया है।
साइकिल से घर-घर दूध बेचने से शुरुआत
रायगढ़ जिले के ग्राम जुर्डा निवासी राकेश पटेल ने शुरुआती दौर में एक गाय के साथ दूध उत्पादन शुरू किया था। करीब चार लीटर दूध रोज साइकिल से घर-घर पहुंचाकर वे अपनी आजीविका चलाते थे। संसाधन सीमित थे, लेकिन उन्होंने दूध के कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा। धीरे-धीरे पशुओं की संख्या बढ़ी और डेयरी का कारोबार भी विस्तार लेने लगा।
डेयरी के विस्तार के लिए उन्हें पांच लाख रुपये का ऋण मिला, जिसमें 2.50 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ मिला। इसके बाद डेयरी उद्यमिता योजना के तहत 12 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने 16 गायें खरीदीं। इससे डेयरी फार्म (Raigarh Dairy Farm) का विस्तार हुआ और वर्तमान में उनके फार्म में 117 पशु हैं।
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42 किसान परिवारों से रोज 300 लीटर दूध
राकेश पटेल ने डेयरी को केवल अपने व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा। आसपास के किसान परिवारों को भी दूध संग्रहण व्यवस्था से जोड़ा गया। वर्तमान में 42 किसान परिवारों से रोज लगभग 300 लीटर दूध एकत्र किया जा रहा है। इससे किसानों को दूध बेचने के लिए नियमित माध्यम मिला है और उनकी घरेलू आय में अतिरिक्त स्रोत जुड़ा है।
दूध उत्पादन और संग्रहण बढ़ने के साथ डेयरी कारोबार (Raigarh Dairy Farm) की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। इससे स्थानीय स्तर पर दूध के कारोबार को बढ़ावा मिला है और किसानों को बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
पशु स्वास्थ्य पर भी दिया जा रहा ध्यान
पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में डेयरी में कृत्रिम गर्भाधान, सॉर्टेड सीमेन और नियमित टीकाकरण जैसी सुविधाओं का उपयोग किया जा रहा है। विभागीय चिकित्सकों और कर्मचारियों के मार्गदर्शन से पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी तथा डेयरी प्रबंधन को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
16 लोगों को मिला प्रत्यक्ष रोजगार
डेयरी के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्तमान में 10 महिलाएं और छह युवा सहित कुल 16 लोग सीधे डेयरी से जुड़े हुए हैं। इससे गांव और आसपास के क्षेत्र में ही रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध हुए हैं। 117 पशुओं वाला डेयरी फार्म (Raigarh Dairy Farm) अब दूध उत्पादन के साथ स्थानीय रोजगार का भी माध्यम बन गया है।
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किसानों के पैरा से पशुओं का चारा
डेयरी को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा गया है। आसपास के गांवों के किसानों से पैरा एकत्र कर उसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है। इसके बदले किसानों को गोबर दिया जाता है, जिसका इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। इससे फसल अवशेष जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिलती है और डेयरी के लिए चारे की लागत भी घटती है।
योजनाओं से बदली डेयरी की तस्वीर
राकेश पटेल ने बताया कि किसानों और ग्रामीणों के लिए संचालित शासकीय योजनाओं तथा पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। एक गाय और 1,200 रुपये से शुरू हुआ सफर अब 117 पशुओं के डेयरी फार्म तक पहुंच चुका है।
117 पशुओं का यह डेयरी फार्म (Raigarh Dairy Farm) बताता है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया पशुपालन व्यवसाय योजनाओं के सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत से विस्तार पा सकता है। इससे दूध उत्पादन के साथ दूसरे किसान परिवारों के लिए बिक्री का माध्यम और स्थानीय युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार हुए हैं।











