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  • Raigarh Livestock Training : 10 गांवों के 274 किसानों को पशुधन स्वास्थ्य का प्रशिक्षण, पुरुषों से ज्यादा रहीं महिला किसान

    Raigarh Livestock Training : 10 गांवों के 274 किसानों को पशुधन स्वास्थ्य का प्रशिक्षण, पुरुषों से ज्यादा रहीं महिला किसान

    Raigarh Livestock Training पशुपालन को बेहतर तरीके से अपनाने के लिए रायगढ़ के 10 गांवों के 274 किसानों को पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण में 141 महिला और 133 पुरुष किसानों ने हिस्सा लिया। यानी पुरुषों की तुलना में 8 अधिक महिला किसान प्रशिक्षण में शामिल हुईं। प्रशिक्षण में पशुओं की नस्ल चयन से लेकर चारा, टीकाकरण, बीमारी की पहचान और रोकथाम तक की जानकारी दी गई।

    अदाणी पावर लिमिटेड रायगढ़ की सामाजिक सरोकार इकाई अदाणी फाउंडेशन के मार्गदर्शन और बाइफ (BAIF) के तकनीकी सहयोग से यह प्रशिक्षण 4 से 8 सितंबर तक आयोजित किया गया। गांवों में आयोजित पशुधन स्वास्थ्य प्रशिक्षण (Raigarh Livestock Training) के दौरान किसानों को पशुओं के स्वास्थ्य के साथ डेयरी और पशुपालन को बेहतर तरीके से संचालित करने की जानकारी भी दी गई।

    हर दिन दो सत्र, 10 गांवों तक पहुंचा प्रशिक्षण

    प्रशिक्षण श्रृंखला की शुरुआत ग्राम टपरदा से हुई। चार सितंबर को टपरदा और कथली, पांच सितंबर को अमलीभौना और रनभाठा, छह सितंबर को पुसल्दा और शंकरपाली, सात सितंबर को सुपा और तिलगी तथा आठ सितंबर को सरवानी और अमलीपाली में प्रशिक्षण दिया गया।

    प्रत्येक दिन दो सत्र आयोजित किए गए। इसमें किसानों को स्थानीय स्तर पर पशुपालन से जुड़ी समस्याओं और उनके वैज्ञानिक समाधान की जानकारी दी गई। पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन (Raigarh Livestock Training) से जुड़े प्रशिक्षण में किसानों को पशुओं की देखभाल के व्यावहारिक तरीके बताए गए।

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    नस्ल चयन से लेकर बीमारी की पहचान तक

    विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने किसानों को उन्नत नस्ल के चयन, संतुलित पशु आहार तैयार करने और वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के तरीके बताए। पशु आवास प्रबंधन, समय पर टीकाकरण और कृमिनाशन के महत्व की जानकारी भी दी गई।

    इसके अलावा स्वस्थ और बीमार पशुओं की पहचान, सामान्य रोगों की रोकथाम तथा पशुओं की देखभाल से जुड़े उपायों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। पशुधन आधारित उत्पादों के बेहतर विपणन के तरीके भी किसानों को बताए गए, ताकि उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।

    अप्रैल से अब तक 341 कृत्रिम गर्भाधान

    क्षेत्र में पशुओं की नस्ल सुधार के लिए अप्रैल 2026 से अब तक 341 कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं। इनमें 229 पारंपरिक विधि से और 113 सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक से किए गए हैं। इन प्रयासों के बाद अब तक 93 उन्नत नस्ल के बछड़ों का जन्म हुआ है।

    सेक्स-सॉर्टेड तकनीक से जन्मे बछड़ों में 47 मादा और आठ नर बछड़े शामिल हैं। वहीं पारंपरिक विधि से 14 मादा और 19 नर बछड़ों का जन्म हुआ है। डेयरी विकास के लिहाज से मादा बछड़ों की संख्या बढ़ने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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    22.6 एकड़ में नेपियर घास के प्रदर्शन प्लॉट

    पशुओं को सालभर पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने के लिए 22.6 एकड़ क्षेत्र में उन्नत नेपियर घास के प्रदर्शन प्लॉट विकसित किए गए हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय पशुपालकों को पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता और इसके उत्पादन की जानकारी देना है।

    चारे की उपलब्धता पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन से सीधे जुड़ी है। ऐसे में पशुधन विकास प्रशिक्षण (Raigarh Livestock Training) के साथ चारा उत्पादन पर भी किसानों को जानकारी दी जा रही है।

    महिला किसानों की भागीदारी रही अधिक

    प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कुल 274 किसानों में 141 महिलाएं और 133 पुरुष शामिल हुए। ग्रामीण परिवारों में पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए प्रशिक्षण में उनकी भागीदारी को उपयोगी माना जा रहा है। अमलीभौना के पशुपालक लक्ष्मी निषाद ने प्रशिक्षण और पशु चिकित्सा गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गांवों में आयोजित निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविरों और प्रशिक्षण से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और दुग्ध उत्पादन भी बढ़ा है।

     

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    पशुपालन से आजीविका मजबूत करने पर जोर

    पांच दिवसीय प्रशिक्षण में मिली जानकारी को किसान अपने स्तर पर पशुओं की देखभाल, चारा प्रबंधन, टीकाकरण और नस्ल सुधार में उपयोग कर सकते हैं। कृत्रिम गर्भाधान, हरे चारे के प्रदर्शन प्लॉट और पशु स्वास्थ्य प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाने से क्षेत्र में पशुधन आधारित आजीविका को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

    अदाणी फाउंडेशन के अनुसार इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने के साथ पशुधन विकास और महिला किसानों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

     

     

     

  • Raigarh Dairy Farm : 1,200 रुपये से शुरू किया कारोबार, 117 पशुओं तक पहुंचा फार्म; दूध से बढ़ी कमाई, 16 लोगों को रोजगार

    Raigarh Dairy Farm : 1,200 रुपये से शुरू किया कारोबार, 117 पशुओं तक पहुंचा फार्म; दूध से बढ़ी कमाई, 16 लोगों को रोजगार

    Raigarh Dairy Farm महज 1,200 रुपये और एक गाय से शुरू किया गया दूध का कारोबार आज 117 पशुओं के डेयरी फार्म तक पहुंच गया है। शासकीय योजनाओं, ऋण, सब्सिडी, विभागीय मार्गदर्शन और मेहनत से डेयरी का विस्तार हुआ। इसका फायदा केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 42 किसान परिवारों से रोज करीब 300 लीटर दूध का संग्रहण हो रहा है। वहीं डेयरी से 16 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।

    डेयरी उद्यमिता योजना से जुड़कर जुर्डा के राकेश पटेल ने खड़ी की सफल डेयरी

    ग्रामीण क्षेत्र में छोटे स्तर से शुरू हुआ यह डेयरी व्यवसाय अब दूध उत्पादन और रोजगार का माध्यम बन चुका है। आसपास के किसान परिवारों को अपने दूध की नियमित बिक्री का जरिया मिला है। पशुपालन विभाग की तकनीकी सलाह से पशुओं के स्वास्थ्य और डेयरी प्रबंधन को भी बेहतर किया जा रहा है। इस तरह डेयरी फार्म (Raigarh Dairy Farm) ने व्यक्तिगत कारोबार के साथ दूसरे किसान परिवारों के लिए भी आय का रास्ता तैयार किया है।

    साइकिल से घर-घर दूध बेचने से शुरुआत

    रायगढ़ जिले के ग्राम जुर्डा निवासी राकेश पटेल ने शुरुआती दौर में एक गाय के साथ दूध उत्पादन शुरू किया था। करीब चार लीटर दूध रोज साइकिल से घर-घर पहुंचाकर वे अपनी आजीविका चलाते थे। संसाधन सीमित थे, लेकिन उन्होंने दूध के कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा। धीरे-धीरे पशुओं की संख्या बढ़ी और डेयरी का कारोबार भी विस्तार लेने लगा।

    डेयरी के विस्तार के लिए उन्हें पांच लाख रुपये का ऋण मिला, जिसमें 2.50 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ मिला। इसके बाद डेयरी उद्यमिता योजना के तहत 12 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने 16 गायें खरीदीं। इससे डेयरी फार्म (Raigarh Dairy Farm) का विस्तार हुआ और वर्तमान में उनके फार्म में 117 पशु हैं।

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    42 किसान परिवारों से रोज 300 लीटर दूध

    राकेश पटेल ने डेयरी को केवल अपने व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा। आसपास के किसान परिवारों को भी दूध संग्रहण व्यवस्था से जोड़ा गया। वर्तमान में 42 किसान परिवारों से रोज लगभग 300 लीटर दूध एकत्र किया जा रहा है। इससे किसानों को दूध बेचने के लिए नियमित माध्यम मिला है और उनकी घरेलू आय में अतिरिक्त स्रोत जुड़ा है।

    दूध उत्पादन और संग्रहण बढ़ने के साथ डेयरी कारोबार (Raigarh Dairy Farm) की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। इससे स्थानीय स्तर पर दूध के कारोबार को बढ़ावा मिला है और किसानों को बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिली है।

    पशु स्वास्थ्य पर भी दिया जा रहा ध्यान

    पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में डेयरी में कृत्रिम गर्भाधान, सॉर्टेड सीमेन और नियमित टीकाकरण जैसी सुविधाओं का उपयोग किया जा रहा है। विभागीय चिकित्सकों और कर्मचारियों के मार्गदर्शन से पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी तथा डेयरी प्रबंधन को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

    16 लोगों को मिला प्रत्यक्ष रोजगार

    डेयरी के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्तमान में 10 महिलाएं और छह युवा सहित कुल 16 लोग सीधे डेयरी से जुड़े हुए हैं। इससे गांव और आसपास के क्षेत्र में ही रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध हुए हैं। 117 पशुओं वाला डेयरी फार्म (Raigarh Dairy Farm) अब दूध उत्पादन के साथ स्थानीय रोजगार का भी माध्यम बन गया है।

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    किसानों के पैरा से पशुओं का चारा

    डेयरी को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा गया है। आसपास के गांवों के किसानों से पैरा एकत्र कर उसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है। इसके बदले किसानों को गोबर दिया जाता है, जिसका इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। इससे फसल अवशेष जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिलती है और डेयरी के लिए चारे की लागत भी घटती है।

    योजनाओं से बदली डेयरी की तस्वीर

    राकेश पटेल ने बताया कि किसानों और ग्रामीणों के लिए संचालित शासकीय योजनाओं तथा पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। एक गाय और 1,200 रुपये से शुरू हुआ सफर अब 117 पशुओं के डेयरी फार्म तक पहुंच चुका है।

    117 पशुओं का यह डेयरी फार्म (Raigarh Dairy Farm) बताता है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया पशुपालन व्यवसाय योजनाओं के सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत से विस्तार पा सकता है। इससे दूध उत्पादन के साथ दूसरे किसान परिवारों के लिए बिक्री का माध्यम और स्थानीय युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार हुए हैं।