छत्तीसगढ़

Balrampur Medicine Scam  : बलरामपुर में दवा खरीदी में खेल, फाइल दबाकर बैठे अफसर, पार्षद ने खोला मोर्चा

Balrampur News : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर (Balrampur Medicine Scam) नगर पालिका में मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) के नाम पर हुए दवा खरीद घोटाले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। शासन की जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि होने के 7 महीने बाद भी दोषियों पर कोई गाज नहीं गिरी है, जिससे अब प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस दवा खरीद घोटाला को लेकर नगर पालिका के पार्षदों ने अब सीधे तौर पर उच्च अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

आंकड़ों की बाजीगरी और लाखों का हेरफेर

नगर पालिका प्रशासन भ्रष्टाचार को किस कदर छिपाने की कोशिश कर रहा है, इसका अंदाजा जांच रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। सरकारी पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार 3.20 लाख की दवाइयां एक्सपायर हो चुकी हैं, जबकि नगर पालिका के अधिकारी केवल 84 हजार का ही नुकसान दिखा रहे हैं। इस वित्तीय भ्रष्टाचार (Balrampur Medicine Scam) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कागजों में बड़ी हेराफेरी की गई है। यहां अधिकारियों ने जवाब देने के बजाय मामले को घुमाने की कोशिश की है।

MRP से ज्यादा रेट पर खरीदी गईं दवाइयां

भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब जांच में यह पाया गया कि नगर पालिका ने दवाइयों को उनके अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से भी ज्यादा कीमत पर खरीदा है। नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी खजाने को हजारों रुपये की चपत लगाई गई। इस सुनियोजित अनियमितता (Balrampur Medicine Scam) ने शासन के जीरो टॉलरेंस की नीति को ठेंगा दिखा दिया है।

गायब रिकार्ड और संदेहास्पद भूमिका

जांच दल जब नगर पालिका पहुंचा, तो वहां न तो स्टाक रजिस्टर मिला और न ही दवाओं का मांग पत्र। बिना किसी नोटशीट और प्रॉपर एंट्री के ही लाखों के बिल पास कर दिए गए। रिकॉर्ड संधारण में बरती गई यह लापरवाही (Balrampur Medicine Scam) दरअसल भ्रष्टाचार के सबूतों को मिटाने की एक कोशिश मानी जा रही है। जांच प्रतिवेदन में प्रणव राय, सुमित गुप्ता, वसुंधरा भगत, आशीष विश्वास और हर्ष राजपूत की भूमिका को संदिग्ध पाया गया है, लेकिन रसूख के चलते अब तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ Balrampur Medicine Scam

नगर पालिका ने न केवल वित्तीय घाटा पहुंचाया, बल्कि ऐसी दवाइयां खरीदीं जिनकी एक्सपायरी डेट बेहद करीब थी। कुछ दवाइयां तो एक्सपायर होने के बाद भी स्टाक में दिखाई गईं। शासन द्वारा प्रतिबंधित ब्रांड्स की दवाइयां खरीदकर इस पूरे मामले को एक संगीन अपराध बना दिया गया है। जहां एक ओर जनता इलाज के लिए भटक रही है, वही दूसरी ओर संसाधनों की बंदरबांट की गई। 7 महीने बीत जाने के बाद भी दोषियों का खुलेआम घूमना इस घोटाले (Balrampur Medicine Scam) के पीछे किसी बड़ी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

 

 

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