Single Teacher Schools : छत्तीसगढ़ के 2,461 स्कूलों में एक शिक्षक, 72,940 बच्चों की पढ़ाई
छत्तीसगढ़ के 2,461 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक (Single Teacher Schools) के भरोसे पढ़ाई चल रही है। यू-डाइस प्लस की रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, इन स्कूलों में कुल 72,940 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। छात्र-शिक्षक अनुपात सुधारने के लिए युक्तियुक्तकरण नीति लागू होने के बावजूद कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
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युक्तियुक्तकरण के बाद भी नहीं बदली स्थिति
दो साल पहले छात्र-शिक्षक अनुपात (Single Teacher Schools) सुधारने के उद्देश्य से युक्तियुक्तकरण यानी रैशनलाइजेशन नीति लागू की गई थी। इसके बावजूद प्रदेश के 2,461 स्कूलों में एक ही शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संचालित हो रही है। ऐसे स्कूलों में शिक्षक को एक साथ अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
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धमतरी में 71 स्कूल एकल शिक्षकीय
धमतरी जिले में समायोजन नीति के बाद भी 71 स्कूल एक शिक्षक (Single Teacher Schools) के भरोसे चल रहे हैं। जिले में 543 प्राथमिक शालाओं में से इन स्कूलों में अब भी शिक्षकों की कमी है। चालू शैक्षणिक सत्र 2026-27 में जिले की पहली कक्षा में 6,814 नवप्रवेशी बच्चों ने दाखिला लिया है। ऐसे में शुरुआती कक्षाओं में शिक्षकों की कमी बच्चों की बुनियादी शिक्षा को प्रभावित कर सकती है।
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सुकमा में शिक्षकों की गैरहाजिरी बनी चुनौती
सुकमा के दूरस्थ और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षकों की अनुपस्थिति भी पढ़ाई के लिए बड़ी चुनौती है। पोटकपल्ली प्राथमिक शाला में पहली से पांचवीं कक्षा तक 30 बच्चे पढ़ते हैं। यहां पदस्थ शिक्षक (Single Teacher Schools) के अक्सर बिना सूचना अनुपस्थित रहने की शिकायत सामने आई है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
बिलासपुर में 100 से अधिक बच्चों पर एक शिक्षक
बिलासपुर जिले के मस्तूरी, तखतपुर और कोटा विकासखंडों के कई सरकारी स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी है। यहां कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में 100 से अधिक विद्यार्थियों की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर है। ऐसे में अलग-अलग कक्षाओं को संभालने के साथ प्रत्येक विद्यार्थी पर पर्याप्त ध्यान देना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
Single Teacher Schools राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर असंतुलन
केंद्रीय आंकड़ों के मुताबिक देशभर में एक लाख से अधिक स्कूल पूरी तरह एकल शिक्षकीय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी से बच्चों की बुनियादी साक्षरता और गणितीय दक्षता प्रभावित हो सकती है। छत्तीसगढ़ में भी Single Teacher Schools की समस्या दूर करने के लिए जरूरत के अनुसार शिक्षकों की तैनाती और प्रभावी निगरानी जरूरी है।
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