छत्तीसगढ़

Illegal Limestone Syndicate Timarlaga : सफेदपोशों की सरपरस्ती में ‘पाताल’ चीर रहे खनन माफिया

टिमरलगा (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga) के उस अवैध साम्राज्य का सच जितना गहरा है, उससे कहीं ज्यादा डरावना है वहां का ‘सिस्टम’। पहले एपिसोड में हमने बताया था कि कैसे नेशनल हाईवे के किनारे सरेआम डकैती चल रही है। आज एपिसोड-2 में हम पर्दाफाश करेंगे उस ‘अदृश्य सिंडिकेट’ का, जिसने रायगढ़ से लेकर रायपुर तक अपनी जड़ें जमा ली हैं। टिमरलगा में जो कुछ भी हो रहा है, वह बिना किसी ‘बड़े हाथ’ के संभव नहीं है। यहां खनिज माफियाओं (Mining Mafia) ने सिर्फ जमीन नहीं खोदी है, बल्कि कानून की रूह को भी छलनी कर दिया है।

काली रात का काला कारोबार

दिन के उजाले में तो आठ पोकलेन मशीनें दिखती ही हैं, लेकिन टिमरलगा (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga)  का असली डरावना चेहरा रात के सन्नाटे में बाहर आता है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, रात 10 बजे के बाद इस खनिज माफियाओं की काली करतूत (Mining Mafia) की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। जब पूरी दुनिया सोती है, तब टिमरलगा की वादियों में पोकलेन की गर्जना और हाईवा के हॉर्न का शोर गूंजता है। बिना किसी लाइट के, केवल मशीनों की हेडलाइट के भरोसे सैकड़ों टन लाइमस्टोन निकाला जाता है।

क्या जिला प्रशासन को यह नहीं पता कि रात के अंधेरे में हाईवे पर दौड़ते ये बिना नंबर के हाईवा किसके हैं? सच्चाई यह है कि इन गाड़ियों को रोकने की हिम्मत किसी सिपाही में नहीं है। खनिज माफियाओं के (Mining Mafia) गुर्गे लग्जरी गाड़ियों में सडकों पर गश्त करते हैं, ताकि कोई ‘ईमानदार’ अधिकारी गलती से भी इस तरफ न भटक जाए। यह किसी युद्ध क्षेत्र की घेराबंदी जैसा है, जहां दुश्मन कोई बाहरी नहीं, बल्कि अपने ही देश की संपदा लूटने वाले गद्दार हैं।

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फाइलों में सब ‘ऑल इज वेल’ Illegal Limestone Syndicate Timarlaga

हैरानी की बात यह है कि खनिज विभाग के दफ्तर में जब इन अवैध खदानों (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga)  के बारे में पूछा जाता है, तो जवाब मिलता है “जांच जारी है।” यह ‘जांच’ पिछले कई सालों से चल रही है, लेकिन आज तक एक भी रसूखदार खनिज माफियाओं (Mining Mafia) का सदस्य जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा। इस सिंडिकेट ने विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक ऐसी ‘सेटिंग’ कर रखी है कि छापा पड़ने से आधे घंटे पहले ही मशीनों के पहिए थम जाते हैं।

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15 मार्च की घटना के बाद, जिसमें एसडीएम ने मशीनें पकड़ी थीं, उम्मीद थी कि कड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन दबाव में आकर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आखिर वह कौन सा ‘अदृश्य फोन’ था जिसने कलेक्टर और एसडीएम के हाथ बांध दिए? आखिर क्यों जब्त की गई मशीनों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने में खनिज विभाग के हाथ कांप रहे हैं? यह चुप्पी गवाही देती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं।

पावर प्लांट और ‘ऐश’ का खेल (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga)

टिमरलगा  (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga)  के इस अवैध केजीएफ में अब एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। माफियाओं ने जिस जमीन को खोखला किया है, उसे पाटने के लिए भारी-भरकम रकम का सौदा हुआ है। आसपास के पावर प्लांटों से निकलने वाली ‘फ्लाई ऐश’ (राख) को इन खदानों में डंप करने की तैयारी है।

इस अवैध खनन को दोहरा फायदा होने वाला है। पहले तो इन्होंने पत्थर बेचकर करोड़ों कमाए, अब उसी गढ्ढे को राख से भरने के लिए पावर प्लांटों से करोड़ों वसूलेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरण विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारी, खनिज माफियाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। जो जमीन कभी उपजाऊ थी, वह अब जहरीली राख का ढेर बनने वाली है। क्या तहसीलदार और पटवारी को यह नहीं पता कि ‘लो लाइंग एरिया’ के नाम पर खनिज माफियाओं को क्लीन चिट दी जा रही है?

यहां फैसले टेबल के नीचे होते हैं (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga)

रायगढ़ के रसूखदार क्रशर मालिकों ने अपना एक सिंडिकेट बना लिया है। इस सिंडिकेट की अपनी अदालत है और अपना कानून। यदि कोई नया खिलाड़ी इस क्षेत्र में खनन करना चाहता है, तो उसे पहले इस माफिया सिंडिकेट की अनुमति लेनी पड़ती है। अधिकारियों को मिलने वाली ‘मंथली’ का हिस्सा भी इसी सिंडिकेट के जरिए तय होता है।

टिमरलगा (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga)  में पहुंचने पर छोटे मोटे चेहरों का सामने आना सिर्फ एक बानगी है। इनके पीछे जो असली खिलाड़ी हैं, वे वातानुकूलित कमरों में बैठकर इस तबाही का नक्शा खींचते हैं। इन माफियाओं के पास अपनी एक ‘इंटेलिजेंस विंग’ है, जो मीडिया और प्रशासन की हर हलचल पर नजर रखती है। यही कारण है कि जब भी कोई बड़ी कार्रवाई की योजना बनती है, तो उसकी खबर पहले लग जाती है।

अरबों का चूना, विकास के नाम पर ठेंगा

सरकारी आंकड़ों में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला भले ही पिछड़ा हो, लेकिन यहां के खनिज माफिया (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga)   प्रदेश के सबसे अमीर लोगों में शुमार हैं। हर दिन 4000 टन लाइमस्टोन की डकैती का मतलब है सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये की रायल्टी का नुकसान। यह वह पैसा है जिससे सड़कें, स्कूल और अस्पताल बन सकते थे। लेकिन यह पैसा जा रहा है खनिज माफियाओं की तिजोरियों में और उन अफसरों के आलीशान बंगलों में, जिन्होंने अपनी अंतरात्मा को बेच दिया है।

रायपुर के खनिज संचालनालय में बैठे कुछ ‘सफेदपोश’ अधिकारी इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। जब तक इन ‘आकाओं’ पर गाज नहीं गिरेगी, टिमरलगा (Illegal Limestone Syndicate Timarlaga)  की धरती ऐसे ही लहूलुहान होती रहेगी। खनिज माफियाओं का यह नंगा नाच रुकने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि कानून के रखवाले ही अब इनके ‘पार्टनर’ बन चुके हैं। जो अब लोकतंत्र के लिए कैंसर बन चुका है।

 

 

 

 

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