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Undeclared Power Cut : “ये तो अन्याय है कलेक्टर साहब…!” आपके बंगले में रौशनी, ग्रामीणों के हिस्से अंधेरा क्यों..!

Mungeli News : छत्तीसगढ़ देश का बिजली (Undeclared Power Cut) सरप्लस राज्य होने के बावजूद प्रदेश की जनता को लगातार अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जहां एक ओर शहरों में प्रशासनिक अधिकारियों के बंगलों में बिजली 24 घंटे बहाल रहती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अंधेरे में जीने को मजबूर हैं।

मुंगेली जिले के ग्राम चारभाठा के निवासी राजेश सिंह राजपूत का कहना है कि कोदवा पंप फीडर से जुड़े गांवों में रोजाना शाम 5 बजे से लेकर रात 11 बजे तक बिजली (Undeclared Power Cut) काट दी जाती है। जब ग्रामीण बिजली विभाग से शिकायत करते हैं तो कर्मचारियों का जवाब होता है—”कलेक्टर साहब का आदेश है।”

इस पंप फीडर से 20 से ज्यादा गांव जुड़े हुए हैं, यानी हजारों लोग इस आदेश की कीमत चुका रहे हैं। चिलचिलाती गर्मी में छह घंटे की बिजली कटौती केवल असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता की मिसाल बन चुकी है।

सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हो रहा है जो रबी सीजन में ट्यूबवेल के सहारे धान और सब्जियों की खेती कर रहे हैं। पर्याप्त बिजली (Undeclared Power Cut) न मिलने के कारण फसलें सूखने की कगार पर हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

प्रशासन की यह दोहरी नीति सवालों के घेरे में है। एक ओर अधिकारी एयरकंडीशंड कमरों में रहकर सुविधाओं का आनंद लेते हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता, खासकर किसान, गर्मी और अंधेरे में अपनी रातें काटने को मजबूर हैं।

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अगर वास्तव में बिजली (Undeclared Power Cut) की कोई तकनीकी या प्रशासनिक जरूरत है, तो ग्रामीणों को जानकारी देकर कोई समाधान निकाला जाना चाहिए, न कि “कलेक्टर का आदेश है” कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेना। समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी जनता की पीड़ा समझें और प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता लाएं, वरना यह असंतोष सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं रहेगा।

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