कृषि समाचार

Fisheries Farming : प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बदली ग्रामीण तस्वीर, मछली पालन बना आय का आधार

Raigarh News : ग्रामीण अंचलों में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में मत्स्य पालन (Fisheries Farming) तेजी से उभरता हुआ एक सशक्त माध्यम बन रहा है। शासन की योजनाओं और वैज्ञानिक तकनीकों के सहयोग से अब ग्रामीण किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन को अपनाकर बेहतर आमदनी अर्जित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से तालाब निर्माण, उन्नत मत्स्य बीज, प्रशिक्षण और अनुदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मत्स्य कृषकों को सीधा लाभ मिल रहा है।

रायगढ़ विकासखंड के ग्राम कलमी निवासी हरिशंकर पटेल इसका जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत स्वयं की भूमि में तालाब निर्माण योजना का लाभ लेते हुए 0.607 हेक्टेयर क्षेत्र में तालाब का निर्माण कराया और वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन (Fisheries Farming) की शुरुआत की। सामान्य वर्ग के मत्स्य कृषक होने के कारण उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान मिला, जिससे प्रारंभिक निवेश का बोझ काफी हद तक कम हुआ।

मत्स्य पालन विभाग द्वारा उन्हें रोहु, कतला और मृगल जैसी उन्नत प्रजातियों के मत्स्य बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही उन्होंने पंगास और रूपचंदा जैसी प्रजातियों को भी शामिल किया, जिससे उत्पादन में विविधता आई। बेहतर प्रबंधन, समय पर बीज संचयन और वैज्ञानिक पद्धति के कारण उनके तालाब से निरंतर अच्छा उत्पादन मिल रहा है।

वर्तमान में हरिशंकर पटेल प्रतिवर्ष 60 से 70 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहे हैं। बाजार में उचित मूल्य मिलने से उन्हें सालाना 2.50 लाख से 3 लाख रुपये तक की आय हो रही है। यह आय न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि मत्स्य पालन (Fisheries Farming) को एक स्थायी आजीविका के रूप में स्थापित कर रही है।

उन्नत तकनीक व अनुदान से बढ़ा मछली उत्पादन, सालाना 3 लाख तक की आय

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मत्स्य पालन से बढ़ी आमदनी (Fisheries Farming)

निजी भूमि पर तालाब निर्माण से लागत में कमी

रोहु, कतला, मृगल, पंगास व रूपचंदा प्रजातियों का उत्पादन

50 प्रतिशत तक अनुदान पर मत्स्य बीज की उपलब्धता

सालाना 60–70 क्विंटल मछली उत्पादन

2.50 से 3 लाख रुपये तक शुद्ध आय

कम जोखिम में आय का साधन बन रहा

मत्स्य विभाग के अनुसार मत्स्य पालन (Fisheries Farming) ग्रामीण क्षेत्रों में कम जोखिम और सुनिश्चित आय का साधन बन रहा है। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार सुविधा के विस्तार से आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अधिक संभावनाएं सृजित होंगी। यह योजना ग्रामीण युवाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।

 

 

 

 

 

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