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  • Elephant Herd Attack : नन्हे शावक की मौत से तड़पा झुंड, मां की ममता के बीच रातभर हाथियों का उत्पात, देखें वीडियो

    Elephant Herd Attack : नन्हे शावक की मौत से तड़पा झुंड, मां की ममता के बीच रातभर हाथियों का उत्पात, देखें वीडियो

    Elephant Herd Attack  छत्तीसगढ़ के जंगलों से सामने आया हाथियों का यह दृश्य बेहद मार्मिक है। खेतों की फसल बचाने के लिए लगाए गए करंट की चपेट में एक नन्हे हाथी की मौत हो गई। इसके बाद 27 हाथियों का झुंड घटनास्थल के आसपास पहुंचा और रातभर चिंघाड़ता रहा।

    शावक की मौत के बाद झुंड की बेचैनी ने ग्रामीणों को भी दहशत में डाल दिया।  सरगुजा के उदयपुर वन परिक्षेत्र में हुई इस घटना के बाद शावक की मौत के बाद हाथियों की बेचैनी (Elephant Herd Attack) ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया। वन विभाग ने जंगल से लगे गांवों को खाली कराया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा।

     

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    शावक की मौत से तड़पा झुंड

    फसल बचाने के लिए खेत के आसपास लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आकर नन्हे हाथी की मौत हुई। घटना के बाद करीब 27 हाथियों का दल वहां पहुंच गया। झुंड ने पूरी रात इलाके में डेरा डाले रखा और लगातार चिंघाड़ने की आवाजें सुनाई देती रहीं।

    नन्हे शावक के शव के आसपास मंडराता झुंड और रातभर आती चिंघाड़ की आवाजें ग्रामीणों के लिए बेहद भावुक और डरावना अनुभव बनीं। मां की ममता और शावक की मौत से जुड़ा यह मार्मिक दृश्य (Elephant Herd Attack) इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

     

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    Elephant Herd Attack गांवों में पसरी दहशत

    हाथियों का दल महेशपुर उपकापारा इलाके के आसपास मौजूद रहा। झुंड की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने जंगल से सटे गांवों के लोगों को बाहर निकाला। ग्रामीणों को हाथियों के नजदीक नहीं जाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई। वन विभाग की निगरानी के बीच 27 हाथियों के झुंड का उत्पात (Elephant Herd Attack) ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। विभाग की टीमें लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

     

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    पांच दिन में तीन मौत

    छत्तीसगढ़ में पिछले पांच दिनों के भीतर हाथियों की मौत की तीन घटनाएं सामने आई हैं। इनमें दो मामलों में बिजली के तार की चपेट में आने की बात सामने आई है। वहीं एक घटना में तालाब में हाथी के बच्चे का शव मिला था। रायगढ़ के तमनार वन परिक्षेत्र में बुधवार को एक नन्हे हाथी का शव तालाब में मिला था। प्रारंभिक जांच में उसके झुंड द्वारा धकेले या रौंदे जाने के बाद पानी में गिरने और डूबने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, अंतिम स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होनी है।

     

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    जंगल-खेत सीमा पर तार

    जशपुर के दुलदुला वन परिक्षेत्र में शनिवार को एक नर हाथी की मौत बिजली के तार की चपेट में आने से हुई। वन विभाग के अनुसार जंगल और खेत की सीमा के करीब करीब डेढ़ किलोमीटर तक बिजली का तार लगाए जाने की बात सामने आई है। विभाग ने इसे वन्यजीवों के शिकार से जोड़कर भी जांच शुरू की है।

    इन घटनाओं ने खेतों की सुरक्षा के लिए अवैध तरीके से बिजली के तार लगाने के गंभीर खतरे को सामने ला दिया है। एक ओर फसल बचाने की कोशिश में वन्यजीवों की जान जा रही है, वहीं दूसरी ओर शावक की मौत के बाद झुंड का आक्रामक व्यवहार (Elephant Herd Attack) इंसानी बस्तियों के लिए भी खतरा बढ़ा रहा है।

    बिजली तार की चपेट में आने से हाथी शावक की मौत हो गई।

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    मां की ममता का दर्द Elephant Herd Attack

    नन्हे शावक की मौत के बाद घंटों तक घटनास्थल के आसपास हाथियों का झुंड मौजूद रहा। रातभर आती चिंघाड़ ने उस दर्दनाक घटना को और भी मार्मिक बना दिया। जंगल में रहने वाले इन विशाल जीवों के बीच मां और बच्चे का रिश्ता कितना गहरा होता है, यह दृश्य उसी की तस्वीर पेश करता है।

    वन विभाग के सामने अब चुनौती दोहरी है। हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर लौटाना और साथ ही गांवों को किसी संभावित घटना से बचाना। शावक की मौत के बाद झुंड का यह उत्पात (Elephant Herd Attack) मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर भी सामने लाता है।

     

     

  • 2027 ODI World Cup Schedule : आस्ट्रेलिया से अभियान की शुरूआत, 3 दिन बाद PAK से भिड़ंत, देखें वर्ल्ड कप 2027 में भारत का शेड्यूल

    2027 ODI World Cup Schedule : आस्ट्रेलिया से अभियान की शुरूआत, 3 दिन बाद PAK से भिड़ंत, देखें वर्ल्ड कप 2027 में भारत का शेड्यूल

    2027 ODI World Cup Schedule आईसीसी ने 2027 वनडे वर्ल्ड कप का शेड्यूल जारी कर दिया है। भारत अपने अभियान की शुरुआत 7 अक्टूबर को केपटाउन में मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगा। इसके तीन दिन बाद 10 अक्टूबर को जोहानिसबर्ग में पाकिस्तान से महामुकाबला होगा। भारत ग्रुप-A में ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और एक क्वालिफायर के साथ है। भारत का पूरा वर्ल्ड कप शेड्यूल (2027 ODI World Cup Schedule) क्रिकेट फैंस के लिए बेहद रोमांचक होने वाला है।

     

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    7 अक्टूबर को केपटाउन में अभियान की शुरुआत

    2027 वनडे वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का पहला मुकाबला 7 अक्टूबर को केपटाउन के न्यूलैंड्स स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होगा। पिछली बार की उपविजेता भारतीय टीम इस बार खिताब जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगी। इसके बाद 10 अक्टूबर को भारत और पाकिस्तान के बीच महामुकाबला खेला जाएगा। दोनों टीमें जोहानिसबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। भारत के वर्ल्ड कप शेड्यूल (2027 ODI World Cup Schedule) में यह मुकाबला सबसे हाई-वोल्टेज मैचों में से एक होगा।

     

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    अफगानिस्तान और क्वालिफायर से भी होगा मुकाबला

    भारत को ग्रुप-A में ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, सह-मेजबान जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और एक क्वालिफायर टीम (2027 ODI World Cup Schedule)  के साथ रखा गया है। भारतीय टीम 14 अक्टूबर को सेंचुरियन में अफगानिस्तान के खिलाफ खेलेगी। इसके बाद 17 अक्टूबर को ब्लूमफोंटेन में क्वालिफायर टीम से मुकाबला होगा। ग्रुप स्टेज का आखिरी मैच 24 अक्टूबर को विक्टोरिया फॉल्स स्टेडियम में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेला जाएगा।

     

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    सुपर 7 में फिर भिड़ सकते हैं भारत-पाकिस्तान

    ग्रुप स्टेज के बाद 25 अक्टूबर से सुपर 7 का दौर शुरू होगा। दोनों ग्रुप की शीर्ष तीन टीमें और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम सुपर 7 में जगह बनाएगी। आईसीसी की सीडिंग के मुताबिक भारत को A1, ऑस्ट्रेलिया को A2 और पाकिस्तान को A3 सीडिंग मिली है। इंग्लैंड को B4, जबकि न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका को क्रमशः B1, B2 और B3 सीडिंग दी गई है।

     

    अगर भारत और पाकिस्तान दोनों सुपर 7 के लिए क्वालिफाई करते हैं तो 7 नवंबर को केपटाउन में एक बार फिर दोनों टीमें आमने-सामने होंगी। वहीं भारत 28 अक्टूबर को विक्टोरिया फॉल्स में ऑस्ट्रेलिया से भी भिड़ेगा। ऐसे में भारत का वर्ल्ड कप शेड्यूल (2027 ODI World Cup Schedule) आगे भी बड़े मुकाबलों से भरा रहेगा।

     

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    17 और 18 नवंबर को होंगे सेमीफाइनल

    वनडे वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल 17 नवंबर को केपटाउन और दूसरा सेमीफाइनल 18 नवंबर को सेंचुरियन में खेला जाएगा। टूर्नामेंट का फाइनल 21 नवंबर को जोहानिसबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में होगा।

     

    2027 ODI World Cup Schedule 12 वेन्यू पर खेले जाएंगे मुकाबले

    2027 वनडे वर्ल्ड कप के मुकाबले कुल 12 वेन्यू पर खेले जाएंगे। नामीबिया के विंडहोक में तीन सुपर सीरीज मैच और तीन ग्रुप मुकाबले होंगे। जिम्बाब्वे में हरारे, बुलावायो और विक्टोरिया फॉल्स को मेजबानी मिलेगी। दक्षिण अफ्रीका में केपटाउन, पार्ल, जोहानिसबर्ग, त्श्वाने यानी सेंचुरियन, ब्लूमफोंटेन, डरबन, कुगोंपो सिटी और गकेबरहा में मुकाबले होंगे।

     

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    भारत के ग्रुप मुकाबलों की पूरी लिस्ट

    तारीखमुकाबलावेन्यू
    7 अक्टूबरभारत vs ऑस्ट्रेलियाकेपटाउन
    10 अक्टूबरभारत vs पाकिस्तानजोहानिसबर्ग
    14 अक्टूबरभारत vs अफगानिस्तानसेंचुरियन
    17 अक्टूबरभारत vs क्वालिफायर Aब्लूमफोंटेन
    24 अक्टूबरजिम्बाब्वे vs भारतविक्टोरिया फॉल्स

    भारत के वर्ल्ड कप मुकाबले (2027 ODI World Cup Schedule)  को लेकर क्रिकेट फैंस में अभी से उत्साह है। खासकर 10 अक्टूबर को होने वाला भारत-पाकिस्तान मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मैचों में शामिल रहेगा।

     

     

     

  • Tiger Cubs Viral Video : कीचड़ के पानी में टाइगर के बच्चों की ‘पूल पार्टी’, मां की निगरानी ने जीता दिल

    Tiger Cubs Viral Video : कीचड़ के पानी में टाइगर के बच्चों की ‘पूल पार्टी’, मां की निगरानी ने जीता दिल

    Tiger Cubs Viral Video टाइगर का नाम सुनते ही जेहन में उसकी दहाड़, ताकत और शिकार की तस्वीर उभरती है। लेकिन महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से सामने आया टाइगर के बच्चों का यह वीडियो (Tiger Cubs Viral Video) जंगल की दुनिया का बेहद प्यारा चेहरा दिखा रहा है। वायरल वीडियो में नन्हे शावक कीचड़ भरे पानी में जमकर मस्ती करते नजर आ रहे हैं, जबकि उनकी मां दूर बैठकर लगातार उन पर नजर रख रही है।

     

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    कीचड़ वाले पानी में शावकों की मस्ती

    वायरल वीडियो (Tiger Cubs Viral Video) में 3 से 4 नन्हे टाइगर एक छोटे से पानी के गड्ढे में अठखेलियां करते दिखाई दे रहे हैं। पानी भले ही कीचड़ से भरा हो, लेकिन शावकों की मस्ती में कोई कमी नहीं है। कोई पानी में उतरकर खेल रहा है तो कोई कीचड़ में लेटकर आराम फरमा रहा है। शावकों की उछल-कूद देखकर ऐसा लग रहा है जैसे जंगल में उन्हें अपना ही छोटा-सा स्विमिंग पूल मिल गया हो। यही मासूम अंदाज इस टाइगर वीडियो (Tiger Cubs Viral Video) को खास बना रहा है।

     

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    बच्चों की मस्ती, मां की पैनी नजर

    वीडियो का सबसे प्यारा हिस्सा शावकों की मां है। मादा टाइगर पानी से कुछ दूरी पर बैठकर लगातार अपने बच्चों पर नजर रख रही है। शावक जहां बेफिक्र होकर पानी में खेल रहे हैं, वहीं मां पूरी सतर्कता के साथ उनकी निगरानी कर रही है। एक पल में मादा टाइगर पानी की तरफ झुकती भी नजर आती है। उसका यह अंदाज देखकर लगता है कि वह बच्चों की मस्ती के बीच भी अपनी जिम्मेदारी नहीं भूल रही। मां और शावकों का यह खूबसूरत पल (Tiger Cubs Viral Video) सोशल मीडिया यूजर्स को खूब पसंद आ रहा है।

     

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    IFS अधिकारी ने शेयर किया वीडियो

    बताया जा रहा है कि यह वीडियो सबसे पहले इंस्टाग्राम पर राहुल मंगाम ने शेयर किया था, जो ताडोबा रिजर्व से जुड़े हैं। इसके बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी सुशांत नंदा ने इसे एक्स पर शेयर किया। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने इसे अपने देखे हुए सबसे शानदार ‘पूल पार्टी’ के अनुभवों में से एक बताया। इसके बाद टाइगर शावकों का यह वीडियो (Tiger Cubs Viral Video) तेजी से वायरल हो गया और लोग इसे बार-बार देख रहे हैं।

     

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    यूजर्स बोले- जंगल की सबसे प्यारी पूल पार्टी

    नन्हे शावकों की उछल-कूद और उनकी मां की सतर्क निगाहों ने इंटरनेट यूजर्स का दिल जीत लिया है। वीडियो पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। किसी को शावकों की मस्ती पसंद आ रही है तो कोई उनकी मां के केयरिंग अंदाज की तारीफ कर रहा है। जंगल के बीच कीचड़ भरे पानी में टाइगर परिवार का यह पल (Tiger Cubs Viral Video) वाकई बेहद खूबसूरत है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है।

     

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  • Chandalpur Name Change : छत्तीसगढ़ के इस गांव का बदला नाम, अब चंडालपुर नहीं चंदनपुर के नाम से जाना जाएगा

    Chandalpur Name Change : छत्तीसगढ़ के इस गांव का बदला नाम, अब चंडालपुर नहीं चंदनपुर के नाम से जाना जाएगा

    Chandalpur Name Change जिस नाम को लेकर ग्रामीण दशकों से बदलाव की मांग कर रहे थे, आखिरकार वह पूरी हो गई। बारिश के बीच जब सरकार की ओर से जारी राजपत्र की प्रति गांव पहुंची तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वर्षों पुरानी मांग पूरी होने पर ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई और नई पहचान का स्वागत किया।

     वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, राजपत्र लेकर गांव पहुंचे उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, चंदनपुर को मिली नई पहचान

    राजपत्र लेकर पहुंचे उप मुख्यमंत्री

    तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण इस खास मौके पर जुटे। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्रामीणों को राजपत्र की प्रति सौंपकर बधाई दी। गांव के नाम परिवर्तन (Chandalpur Name Change) के बाद अब सरकारी दस्तावेजों और शासकीय पोर्टल पर भी नई पहचान दर्ज होगी।

    यह मामला कबीरधाम जिले के ग्राम चंडालपुर से जुड़ा है। शासन ने अब इसका आधिकारिक नाम बदलकर ‘चंदनपुर’ कर दिया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को विधिवत मंजूरी मिल गई है।

     

     

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    दस्तावेजों में भी बदलेगा नाम

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीणों को नाम बदलने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए विशेष शिविर लगाया जाएगा। शिविर में आधार कार्ड सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों में गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों से रोजमर्रा के व्यवहार और बोलचाल में भी ‘चंदनपुर’ नाम का इस्तेमाल करने की अपील की, ताकि आने वाली पीढ़ियां गांव को इसी नई पहचान से जानें।

     

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    Chandalpur Name Change कैसे पूरी हुई वर्षों पुरानी मांग

    ग्रामीण लंबे समय से गांव का नाम बदलने की मांग कर रहे थे। स्थानीय लोगों की भावनाओं को देखते हुए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया। इसके बाद मंत्रिमंडल स्तर पर चर्चा हुई और राज्यपाल की स्वीकृति के बाद राजपत्र में नाम परिवर्तन का प्रकाशन किया गया। अब सरकारी अभिलेखों में नाम परिवर्तन (Chandalpur Name Change) के बाद गांव की नई पहचान स्थायी रूप से दर्ज हो जाएगी।

     

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    विकास के लिए 11.70 लाख की घोषणा

    नाम परिवर्तन की खुशी के बीच उप मुख्यमंत्री ने गांव के विकास के लिए भी बड़ी घोषणा की। सीसी रोड और सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 11.70 लाख रुपये देने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि गांव का नाम केवल किसी स्थान की पहचान नहीं होता, बल्कि उससे स्थानीय इतिहास, संस्कृति, परंपरा और लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं। ‘चंदनपुर’ नाम मिलना ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही भावना के सम्मान का प्रतीक है।

     

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    नई पहचान से ग्रामीणों में खुशी Chandalpur Name Change

    राजपत्र की प्रति मिलने के बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही मांग के पूरा होने से गांव को नई पहचान मिली है। चंदनपुर की नई पहचान (Chandalpur Name Change) अब सरकारी रिकॉर्ड से लेकर ग्रामीणों की रोजमर्रा की पहचान का हिस्सा बनने जा रही है।

     

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  • Bottle Gourd Farming : लौकी की खेती से किसान ने कमाए 2.07 लाख, 80 हजार की लागत में 250 क्विंटल से ज्यादा उत्पादन

    Bottle Gourd Farming : लौकी की खेती से किसान ने कमाए 2.07 लाख, 80 हजार की लागत में 250 क्विंटल से ज्यादा उत्पादन

    Bottle Gourd Farming पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन को अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इसका उदाहरण एक किसान ने पेश किया है। लौकी की खेती से एक हेक्टेयर में 250 से 300 क्विंटल तक उत्पादन मिला। करीब 80 हजार रुपये की लागत के बाद 2 लाख 7 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।

    लौकी की खेती से वासुदेव प्रधान की बढ़ी आमदनी, एक हेक्टेयर में कमाए 2.07 लाख रुपये

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    80 हजार की लागत

    किसान ने उद्यानिकी विभाग की सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर एक हेक्टेयर में लौकी की खेती की। फसल की तैयारी से लेकर प्रबंधन तक जरूरी कृषि कार्य समय पर किए गए। पूरी खेती में करीब 80 हजार रुपये की लागत आई। इसके बाद उत्पादन से लगभग 2 लाख 87 हजार रुपये की कुल आय प्राप्त हुई। लागत निकालने के बाद लौकी की फसल (Bottle Gourd Farming) से करीब 2 लाख 7 हजार रुपये का शुद्ध लाभ मिला।

     

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    300 क्विंटल तक उत्पादन Bottle Gourd Farming

    उचित फसल प्रबंधन और विभागीय तकनीकी सलाह से एक हेक्टेयर में करीब 250 से 300 क्विंटल लौकी का उत्पादन हुआ। बाजार में सब्जी की मांग ने किसान को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने में मदद की। इस तरह सब्जी उत्पादन (Bottle Gourd Farming) पारंपरिक खेती की तुलना में अतिरिक्त आमदनी का जरिया बना।

     

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    योजना से मिला सहारा

    उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के तहत किसानों को फसल चयन, उत्पादन तकनीक और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी दी जाती है। इसी मार्गदर्शन का लाभ लेकर किसान ने लौकी की खेती को व्यवस्थित तरीके से किया। समय पर खेत की तैयारी, फसल प्रबंधन और विभागीय सलाह का पालन करने से उत्पादन बेहतर रहा। इससे उद्यानिकी खेती (Bottle Gourd Farming) को लेकर किसान का भरोसा भी बढ़ा।

     

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    लौकी की खेती से वासुदेव प्रधान की बढ़ी आमदनी, एक हेक्टेयर में कमाए 2.07 लाख रुपये

     

    Bottle Gourd Farming गांव पोड़ी के किसान

    यह सफलता सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम पोड़ी निवासी किसान वासुदेव प्रधान की है। उन्होंने खरीफ मौसम में एक हेक्टेयर क्षेत्र में लौकी की खेती की। वासुदेव के मुताबिक पहले पारंपरिक खेती से आमदनी सीमित थी। उद्यानिकी फसल अपनाने के बाद कम समय में उत्पादन और आय बढ़ाने का अवसर मिला।

     

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    दूसरे किसानों को संदेश Bottle Gourd Farming

    वासुदेव अब दूसरे किसानों को भी उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्नत तकनीक, सही फसल प्रबंधन और विशेषज्ञों की सलाह से सब्जी उत्पादन को लाभकारी बनाया जा सकता है। उनके अनुभव से किसान की बढ़ी आमदनी (Bottle Gourd Farming) यह दिखाती है कि बाजार की मांग वाली फसलों को अपनाकर खेती से अतिरिक्त आय का रास्ता बनाया जा सकता है।

     

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    Bottle Gourd Farming खेती को बनाया कारोबार

    उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ता रुझान किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय के नए विकल्प दे रहा है। लौकी जैसी सब्जियों की बाजार मांग होने के कारण सही समय पर उत्पादन और बिक्री से बेहतर आमदनी की संभावना रहती है। वासुदेव प्रधान की लाभकारी लौकी खेती (Bottle Gourd Farming) से 2.07 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला है। विभागीय मार्गदर्शन के साथ उन्होंने खेती को अधिक व्यवस्थित तरीके से करने का प्रयास किया।

     

     

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  • Sarita Malhotra Gas Cylinder : चुनावी वादा याद दिलाकर सरिता मल्होत्रा ने CM को लिखा पत्र, 500 रुपये में गैस सिलेंडर की मांग

    Sarita Malhotra Gas Cylinder : चुनावी वादा याद दिलाकर सरिता मल्होत्रा ने CM को लिखा पत्र, 500 रुपये में गैस सिलेंडर की मांग

    Sarita Malhotra Gas Cylinder कांग्रेस नेता सरिता मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर चुनाव के दौरान किए गए वादों को याद दिलाया है। उन्होंने गैस सिलेंडर की मांग (Sarita Malhotra Gas Cylinder) को लेकर सरकार से तत्काल पहल करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने आम लोगों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था शुरू करने का भी आग्रह किया है।

     

    500 रुपये में गैस सिलेंडर देने की मांग

    छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश सचिव सरिता मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का वादा किया गया था। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच रसोई गैस की कीमतों का असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि चुनावी वादे को पूरा करते हुए प्रदेश की महिलाओं को वर्ष में कम से कम चार घरेलू गैस सिलेंडर 500 रुपये की दर से उपलब्ध कराने की योजना जल्द लागू की जाए।

     

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    मध्यमवर्गीय परिवारों को भी मिले लाभ

    सरिता मल्होत्रा ने पत्र में कहा कि गैस सिलेंडर की यह सुविधा केवल गरीब वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। मध्यमवर्गीय और अन्य पात्र महिला उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलना चाहिए, ताकि महंगाई के दौर में अधिक से अधिक परिवारों को आर्थिक राहत मिल सके।

     

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    Sarita Malhotra Gas Cylinder चुनावी वादों को पूरा करने की मांग

    सरिता मल्होत्रा ने कहा कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से चुनावी वादा पूरा करने की मांग (Sarita Malhotra Gas Cylinder) करते हुए कहा कि महंगाई और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाना चाहिए। पत्र के जरिए उन्होंने सरकार का ध्यान महिलाओं, गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक परेशानियों की ओर आकर्षित किया है।

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  • Sarangarh Drainage System : जलभराव से बेहाल सारंगढ़, प्रदेश कांग्रेस सचिव ने डिप्टी सीएम को लिखा पत्र

    Sarangarh Drainage System : जलभराव से बेहाल सारंगढ़, प्रदेश कांग्रेस सचिव ने डिप्टी सीएम को लिखा पत्र

    Sarangarh Drainage System सारंगढ़ नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न वार्डों, गलियों और सड़कों के किनारे जलभराव व गंदगी की समस्या को लेकर कांग्रेस प्रदेश सचिव सरिता मल्होत्रा ने पहल की है। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन व विकास मंत्री अरुण साव को पत्र भेजकर नागरिकों की समस्या के समाधान के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। जलभराव की समस्या (Sarangarh Drainage System) को लेकर उन्होंने वार्डवार सर्वे कराने का सुझाव दिया है।

     

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    Sarangarh Drainage System बारिश में बढ़ जाती है जलभराव

    सरिता मल्होत्रा ने पत्र में बताया कि बारिश के दौरान नगर के कई वार्डों, मोहल्लों और मुख्य मार्गों के किनारे पानी जमा हो जाता है। लंबे समय तक पानी की निकासी नहीं होने से कीचड़ और दुर्गंध की स्थिति बनती है। इसके साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से नागरिकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

     

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    Sarangarh Drainage System पेवर्स ब्लॉक लगाने से मिलेगी राहत

    उन्होंने विशेष रूप से सड़क किनारे मौजूद कच्ची या खाली जमीन वाले स्थानों पर इंटरलॉकिंग पेवर्स ब्लॉक लगाने का सुझाव दिया है। इससे सतह समतल और व्यवस्थित होगी तथा बारिश के दौरान कीचड़ और गंदगी की समस्या को कम किया जा सकेगा। साथ ही शहर के सौंदर्यीकरण में भी मदद मिलेगी।

     

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    वार्डवार सर्वे कर चिन्हित किए जाएं जलभराव वाले स्थान

    कांग्रेस प्रदेश सचिव ने पूरे शहर का वार्डवार सर्वे कराने की मांग की है। इसके जरिए उन स्थानों को चिन्हित किया जा सकेगा, जहां नियमित रूप से पानी जमा होता है या दुर्गंध की समस्या बनी रहती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार ड्रेनेज व्यवस्था (Sarangarh Drainage System) को दुरुस्त करने की मांग की गई है।

     

    सोख्ता गड्ढे और रेनवॉटर रिचार्ज की व्यवस्था

    पत्र में आवश्यक स्थानों पर सोख्ता गड्ढे बनाने और रेनवॉटर रिचार्ज की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है। इससे बारिश के पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा और जलभराव की समस्या को स्थायी रूप से कम करने में मदद मिल सकती है।

     

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    पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित मार्ग पर जोर

    सरिता मल्होत्रा ने सड़क किनारे खाली स्थानों को व्यवस्थित कर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और समतल मार्ग तैयार करने की मांग की है। इसके अलावा खाली स्थानों पर हरियाली विकसित करने का सुझाव दिया गया है, जिससे शहर का वातावरण और स्वरूप बेहतर हो सके।

     

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    रखरखाव की जिम्मेदारी तय करने की मांग

    उन्होंने निर्मित पेवर्स ब्लॉक और नालियों के नियमित रखरखाव व सफाई की जिम्मेदारी (Sarangarh Drainage System)  तय करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि केवल निर्माण कराने के बजाय उसकी नियमित देखरेख भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि नागरिकों को लंबे समय तक इसका लाभ मिल सके।

     

    सरिता मल्होत्रा ने उम्मीद जताई है कि नगरीय प्रशासन विभाग इस मामले में जल्द संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगा और सारंगढ़वासियों को जलभराव, गंदगी व मच्छरों की समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।

     

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  • Chhattisgarh Rainfall Alert : डीप डिप्रेशन से छत्तीसगढ़ में 23 से 25 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट

    Chhattisgarh Rainfall Alert : डीप डिप्रेशन से छत्तीसगढ़ में 23 से 25 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट

    Chhattisgarh Rainfall Alert बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया मौसमी सिस्टम छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के मौसम को प्रभावित करने वाला है। पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अब तेजी से मजबूत हो रहा है। इसके 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन (Deep Depression) में बदलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ में 23 से 25 सितंबर के बीच कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

     

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    24 सितंबर को दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अति भारी बारिश

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार छत्तीसगढ़ में 20 से 26 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। 20 से 22 सितंबर और 26 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं 23 से 25 सितंबर के दौरान कई जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। 24 सितंबर को दक्षिणी छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर अति भारी बारिश (Chhattisgarh Rainfall Alert) की आशंका जताई गई है। ऐसे में बस्तर संभाग सहित दक्षिणी जिलों में विशेष सतर्कता की जरूरत होगी।

     

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    बंगाल की खाड़ी में लगातार मजबूत हो रहा सिस्टम

    19 सितंबर की शाम उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र 20 सितंबर की सुबह पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे लगे उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर केंद्रित था। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग (Chhattisgarh Rainfall Alert)  के मुताबिक 21 सितंबर को यह सिस्टम डिप्रेशन और 22 सितंबर को पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर डीप डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके बाद 23 सितंबर की सुबह तक इसके उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों के करीब पहुंचने की संभावना है।

     

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    ओडिशा और आंध्र में अत्यंत भारी बारिश का खतरा

    इस मौसम प्रणाली का सबसे ज्यादा प्रभाव दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश में देखने को मिल सकता है। 22 से 24 सितंबर के दौरान उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और 22 से 25 सितंबर तक दक्षिणी ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश (Chhattisgarh Rainfall Alert) का पूर्वानुमान है। 23 और 24 सितंबर को दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश भी हो सकती है। इन इलाकों में तेज हवाओं और खराब समुद्री परिस्थितियों को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है।

     

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    छत्तीसगढ़ के साथ तेलंगाना और विदर्भ भी प्रभावित

    मौसम विभाग (Chhattisgarh Rainfall Alert)  ने 23 से 25 सितंबर के बीच तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। विदर्भ में 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश का दौर रह सकता है। तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर के दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। झोंकों की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

     

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    पिछले 24 घंटे में भी कई राज्यों में जोरदार बारिश

    पिछले 24 घंटों के दौरान तेलंगाना, रायलसीमा और तमिलनाडु में 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। ओडिशा, मध्य प्रदेश, अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, असम, नागालैंड और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश रिकॉर्ड हुई। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में भी बारिश का प्रभाव कई राज्यों में बना रहेगा।

     

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    Chhattisgarh Rainfall Alert मानसून की वापसी भी शुरू

    देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 19 सितंबर को मानसून की वापसी रेखा रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी और खाजूवाला से होकर गुजरी। अगले दो से तीन दिनों में राजस्थान के कुछ और हिस्सों के साथ पंजाब, सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ क्षेत्रों से भी मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

     

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    समुद्र में तूफानी हवाओं का अलर्ट

    बंगाल की खाड़ी में मौसम प्रणाली के मजबूत होने के साथ समुद्र में भी स्थिति खराब रहने की संभावना है। 22 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी में हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। झोंकों के दौरान गति 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। 23 से 24 सितंबर की शाम तक पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में हवा की गति 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। झोंकों की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है।

     

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    मछुआरों के लिए विशेष सावधानी की सलाह

    मौसम विभाग (Chhattisgarh Rainfall Alert)  के अनुसार 21 से 24 सितंबर के बीच बंगाल की खाड़ी के मध्य और उत्तर-पश्चिम हिस्सों में समुद्र की स्थिति बेहद खराब रह सकती है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में भी समुद्री परिस्थितियां प्रतिकूल रहने की आशंका है। ऐसे में मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने और तटीय क्षेत्रों में प्रशासन एवं मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

     

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    Chhattisgarh Rainfall Alert  इन हिस्सों में भी बारिश का असर

    पूर्वी भारत में ओडिशा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में आने वाले दिनों में बारिश (Chhattisgarh Rainfall Alert)  का दौर जारी रह सकता है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की संभावना है। मध्य भारत में छत्तीसगढ़ के साथ विदर्भ और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश हो सकती है। पश्चिम भारत में कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में बारिश का असर देखने को मिल सकता है।

     

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    छत्तीसगढ़ में अगले चार दिन अहम

    बंगाल की खाड़ी में बन रहा डीप डिप्रेशन छत्तीसगढ़ के लिए अगले कुछ दिनों में महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम साबित हो सकता है। खासकर 23 से 25 सितंबर के बीच बारिश बढ़ने और 24 सितंबर को दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी होने वाले ताजा अलर्ट पर नजर रखना जरूरी होगा। बारिश का अलर्ट (Chhattisgarh Rainfall Alert) खासकर दक्षिणी जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • Dhan Fasal Keet Rog : धान की फसल पर मंडराया कीट-रोग का खतरा, किसान अभी कर लें ये काम, कृषि वैज्ञानिकों ने दी जरूरी सलाह

    Dhan Fasal Keet Rog : धान की फसल पर मंडराया कीट-रोग का खतरा, किसान अभी कर लें ये काम, कृषि वैज्ञानिकों ने दी जरूरी सलाह

    Dhan Fasal Keet Rog खरीफ सीजन में खेतों में पर्याप्त नमी और अनुकूल वातावरण के कारण धान की फसल में कीट एवं रोगों के प्रकोप की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में किसानों को फसल खराब होने का इंतजार करने के बजाय अभी से खेतों की नियमित निगरानी शुरू करने की सलाह दी गई है।

    कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही अनुशंसित उपाय अपनाने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। धान की फसल में कीट-रोग का खतरा (Dhan Fasal Keet Rog) बढ़ने की स्थिति में किसानों को खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

    कृषि विज्ञान केंद्र बलौदाबाजार भाटापारा के वैज्ञानिकों ने किसानों को खेत में धान के पत्तों, तनों और पौधों की बढ़वार का बारीकी से निरीक्षण करने की सलाह दी है। केवल खेत के एक स्थान पर खड़े होकर फसल देखने के बजाय अलग-अलग स्थानों से पौधों की जांच करनी चाहिए। इससे कीटों के शुरुआती प्रकोप का पता समय पर लगाया जा सकता है और नियंत्रण के लिए उचित कदम उठाए जा सकते हैं।

     

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    तना छेदक की ऐसे करें पहचान

    धान में तना छेदक कीट की सुंडी पौधे के तने में प्रवेश कर अंदर के हिस्से को नुकसान पहुंचाती है। फसल की अवस्था के अनुसार इसके प्रकोप से सूखा केंद्रीय तना और बालियां निकलने के बाद सफेद बाली जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खेत का निरीक्षण करते समय किसानों को असामान्य रूप से सूख रहे पौधों और सूखे केंद्रीय तनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    तना छेदक के प्रकोप वाले पौधों की पहचान होने पर खेत के अलग-अलग हिस्सों की भी जांच करनी चाहिए। यदि कीट का प्रकोप अधिक दिखाई देता है तो कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार कर्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50 डब्ल्यूपी 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। तना छेदक से फसल बचाने की निगरानी (Dhan Fasal Keet Rog) समय पर करना जरूरी है।

     

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    Dhan Fasal Keet Rog पत्ती मोड़क कीट पर रखें नजर

    पत्ती मोड़क अथवा पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप में सुंडियां धान की पत्तियों को लंबाई में मोड़कर या लपेटकर उसके अंदर छिप जाती हैं। ये पत्तियों के हरे भाग को खुरचकर खाती हैं, जिससे प्रभावित पत्तियों पर सफेद धारियां या झिल्ली जैसे लंबे निशान दिखाई देते हैं।

    अधिक प्रकोप होने पर पत्तियों का हरा भाग नष्ट हो सकता है। इससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ वृद्धि और विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को नियमित रूप से खेत में मुड़ी और लिपटी हुई धान की पत्तियों की जांच करनी चाहिए।

     

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    Dhan Fasal Keet Rog गंगई में दिखे ये लक्षण

    धान में गंगई के प्रकोप की भी नियमित निगरानी जरूरी है। इसके कारण पौधों की नई बढ़वार प्रभावित होती है। संक्रमित पौधे में सामान्य पत्ती के स्थान पर लंबी, पतली और नलीनुमा संरचना दिखाई दे सकती है, जिसे सामान्य तौर पर सिल्वर शूट या प्याज पत्ती के लक्षण के रूप में पहचाना जाता है।

    प्रभावित पौधों का सामान्य विकास नहीं हो पाता और बालियों का विकास भी प्रभावित हो सकता है। गंगई के लक्षण दिखाई देने पर पिफ्रोनील 5 प्रतिशत ईसी 1000 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है। गंगई के शुरुआती लक्षणों की पहचान (Dhan Fasal Keet Rog) कर किसान समय रहते नियंत्रण उपाय अपना सकते हैं।

     

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    Dhan Fasal Keet Rog भूरा माहू से ऐसे बचाएं फसल

    भूरा माहू धान के पौधों के निचले हिस्से में रहकर रस चूसता है। खेत का निरीक्षण करते समय पौधों के तने के निचले हिस्से और पानी की सतह के आसपास विशेष रूप से जांच करनी चाहिए। इसके अधिक प्रकोप में पौधे कमजोर और पीले दिखाई दे सकते हैं तथा पौधों के समूह तेजी से पीले होकर सूखने लगते हैं।

    इस स्थिति को हॉपर बर्न कहा जाता है। भूरा माहू की स्थिति में खेत में अनावश्यक और अत्यधिक उर्वरक के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है। नियमित निगरानी करते हुए कीट की स्थिति का आकलन करना चाहिए। नियंत्रण के लिए ब्यूप्रोफेजिन 25 प्रतिशत एससी 800 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा पाइमेट्रोजिन 50 डब्ल्यूजी प्रति हेक्टेयर के उपयोग की सलाह दी गई है। भूरे माहू के प्रकोप से बचाव (Dhan Fasal Keet Rog) के लिए किसान खेत की निचली सतह और पानी के आसपास लगातार निगरानी रखें।

     

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    शुरुआती लक्षण दिखते ही करें उपाय

    कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि किसी भी कीट या रोग का लक्षण दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान करें और उसके बाद ही अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाएं। बिना जरूरत कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। खेत की नियमित निगरानी और शुरुआती स्तर पर नियंत्रण से उत्पादन में होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

    वर्तमान मौसम में खेतों में पर्याप्त नमी होने के कारण कीटों के लिए वातावरण अनुकूल बना हुआ है। ऐसे में किसानों को पत्तियों, तनों और पौधों की बढ़वार पर लगातार नजर रखनी चाहिए। धान की फसल को कीटों से बचाने की तैयारी (Dhan Fasal Keet Rog) अभी से करने पर फसल को गंभीर नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।

     

     

  • Raigarh Airport Land Acquisition : रायगढ़ में एयरपोर्ट का रास्ता साफ! 477 करोड़ का प्रस्ताव भेजा, 4 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    Raigarh Airport Land Acquisition : रायगढ़ में एयरपोर्ट का रास्ता साफ! 477 करोड़ का प्रस्ताव भेजा, 4 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    रायगढ़ में नए एयरपोर्ट (Raigarh Airport Land Acquisition) की तैयारी फिर तेज हो गई है। लंबे समय से हवाई सेवा का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह बड़ी खबर है। एयरपोर्ट के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और भू-अर्जन, पुनर्वास तथा परिसंपत्तियों के मुआवजे के लिए 477 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि किसानों की पुनर्वास संबंधी मांग के कारण परियोजना के सामने नया पेंच भी खड़ा हो गया है।

     

    जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट के लिए आवश्यक जमीन का सर्वे और प्रभावित परिवारों से जुड़ी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया पूरी की है। इसके बाद प्रभावित जमीन के लिए धारा 11 का प्रकाशन किया गया। चार गांवों में सामाजिक समाघात की प्रक्रिया भी पूरी की गई है। अब आपत्तियों के निराकरण के बाद भू-अर्जन की अगली कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। रायगढ़ एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण (Raigarh Airport Land Acquisition) को लेकर प्रशासन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

     

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    477 करोड़ का भेजा प्रस्ताव

    एयरपोर्ट के लिए प्रभावित निजी भूमि के भू-अर्जन और पुनर्वास पर करीब 477 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसी अनुमान के आधार पर जिला प्रशासन ने विमानन विभाग को राशि की मांग भेजी है। प्रस्ताव भेजने के साथ ही जमीन लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    प्रशासन की ओर से चारों प्रभावित गांवों की जमीन का सर्वे कर किसानों और परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई है। इसके आधार पर मुआवजे और पुनर्वास की राशि का आकलन किया गया है। एयरपोर्ट निर्माण के लिए 477 करोड़ का प्रस्ताव (Raigarh Airport Land Acquisition) अब परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

     

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    चार गांवों की जमीन प्रभावित

    एयरपोर्ट के लिए कोड़ातराई, औरदा, बेलपाली और जकेला गांव की जमीन प्रभावित होगी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कोड़ातराई में 184 किसान और 53.90 हेक्टेयर जमीन, औरदा में 75 किसान और 26.54 हेक्टेयर जमीन प्रभावित है।

    इसी तरह बेलपाली में 44 किसानों की 50.83 हेक्टेयर तथा जकेला में 132 किसानों की 86.82 हेक्टेयर जमीन प्रभावित हो रही है। इस तरह चारों गांवों में बड़ी संख्या में किसान भू-अर्जन की प्रक्रिया से प्रभावित होंगे। चार गांवों में जमीन अधिग्रहण (Raigarh Airport Land Acquisition) की प्रक्रिया के कारण किसानों की नजर अब मुआवजे और पुनर्वास के प्रावधानों पर है।

     

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    रोजगार की मांग से बढ़ा पेंच

    सामाजिक समाघात के दौरान प्रभावित किसानों ने पुनर्वास को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। किसानों की मांग है कि पुनर्वास के तहत केवल एकमुश्त राशि देने के बजाय प्रभावित परिवारों को रोजगार भी उपलब्ध कराया जाए। हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि इस परियोजना में पुनर्वास के तहत रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान संभव नहीं है।

    सामाजिक समाघात के दौरान सामने आई आपत्तियों से शासन को भी अवगत कराया गया है। अब इन आपत्तियों के निराकरण पर आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी। किसानों की पुनर्वास मांग और भू-अर्जन (Raigarh Airport Land Acquisition) के बीच प्रशासन को रास्ता निकालना होगा।

     

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    अब आपत्तियों का होगा निराकरण

    एसडीएम महेश शर्मा के अनुसार एयरपोर्ट के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सामाजिक समाघात के दौरान प्राप्त आपत्तियों का निराकरण किया जा रहा है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    रायगढ़ में लंबे समय से एयरपोर्ट की मांग और हवाई सेवा शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है। अब 477 करोड़ रुपए के प्रस्ताव और जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू होने से उम्मीद बढ़ी है। हालांकि परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए भू-अर्जन और पुनर्वास की प्रक्रिया (Raigarh Airport Land Acquisition) को जल्द पूरा करना बड़ी चुनौती होगी।