Har Ghar Munga Campaign : अब घर-घर उगेगा मुनगा, 52,553 आंगनबाड़ी केंद्र लगाएंगे 15-15 पौधे; 7.88 लाख परिवार जुड़ेंगे
हर आंगनबाड़ी केंद्र में लगाए जाएंगे 15 मुनगा पौधे, 7.88 लाख परिवारों को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य; कुपोषण और एनीमिया से लड़ने पर जोर
Har Ghar Munga Campaign छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया से लड़ने के लिए मुनगा को घर-घर पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। तीजा-पोरा पर्व पर मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने राज्यव्यापी ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की। अभियान (Har Ghar Munga Campaign) के तहत प्रदेश के 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से करीब 7.88 लाख परिवारों को जोड़ा जाएगा। हर आंगनबाड़ी केंद्र क्षेत्र में 15 मुनगा पौधे लगाने की जिम्मेदारी तय की गई है।
52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ेगा अभियान
प्रदेश में शुरू किए गए (Har Ghar Munga Campaign) का उद्देश्य मुनगा को ग्रामीण परिवारों के भोजन का हिस्सा बनाकर पोषण स्तर सुधारना है। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और पोषण वाटिकाओं के साथ ग्रामीण परिवारों की बाड़ियों में भी मुनगा के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों का वितरण भी किया जाएगा।
अभियान के माध्यम से करीब 7.88 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। परिवारों को सप्ताह में कम से कम तीन बार मुनगा की फलियां और भाजी भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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हर केंद्र में 15 पौधे लगाने की जिम्मेदारी
अभियान के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र क्षेत्र में 15 मुनगा पौधे लगाने की जिम्मेदारी तय की गई है। पौधों की उपलब्धता और रोपण से लेकर उनके रखरखाव की निगरानी के लिए मैदानी अमले को जिम्मेदारी दी गई है।
मंत्रालय से लेकर पंचायत स्तर तक अभियान (Har Ghar Munga Campaign) के लिए जवाबदेही तय की गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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डिजिटल डैशबोर्ड से होगी निगरानी
मुनगा पौधों के रोपण और अभियान की प्रगति की निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी। इससे अभियान की गतिविधियों और मैदानी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी पर नजर रखी जा सकेगी।
मंत्रालय से मैदानी अमले तक जिम्मेदारी तय होने के साथ डिजिटल निगरानी व्यवस्था को (Har Ghar Munga Campaign) की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों के स्तर पर होने वाली गतिविधियों की जानकारी भी इसी व्यवस्था के माध्यम से जुटाई जाएगी।
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मुनगा में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन
मुनगा की फलियों, पत्तियों और फूलों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और कई जरूरी विटामिन मौजूद होते हैं। कैल्शियम हड्डियों की मजबूती, आयरन हीमोग्लोबिन निर्माण और पोटेशियम रक्तचाप को सामान्य रखने में मदद करता है। विटामिन-ए आंखों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उपयोगी है।
मुनगा को भोजन में शामिल करने से पोषण बढ़ाया जा सकता है। इसी पोषण मूल्य को देखते हुए अभियान (Har Ghar Munga Campaign) में मुनगा को प्रमुखता दी गई है।
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Har Ghar Munga Campaign मुनगा पोषण का प्राकृतिक उपहार
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुनगा (सहजन) आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होता है। उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, पोषण वाटिकाओं और ग्रामीण घरों तक मुनगा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मुनगा को भोजन में शामिल करने से परिवारों के पोषण स्तर को बेहतर करने में मदद मिल सकती है। राज्य में शुरू किया गया (Har Ghar Munga Campaign) इसी उद्देश्य से व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा।
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तमिलनाडु में 10.50 लाख महिलाओं को दिए जा रहे पौधे
मुनगा को पोषण अभियान से जोड़ने की पहल दूसरे राज्यों में भी की जा रही है। तमिलनाडु में 10.50 लाख स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दो-दो मुनगा पौधे दिए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी मुनगा के पौधों को आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, पोषण वाटिकाओं और ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
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प्रमुख आंकड़े
| बिंदु | आंकड़ा |
|---|---|
| आंगनबाड़ी केंद्र | 52,553 |
| अभियान से जुड़ने वाले परिवार | करीब 7.88 लाख |
| प्रत्येक केंद्र में पौधे | 15 |
| पौधों की निगरानी | डिजिटल डैशबोर्ड |
| परिवारों में मुनगा सेवन | सप्ताह में कम से कम 3 बार |
| तमिलनाडु में लाभार्थी महिलाएं | 10.50 लाख |












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