छत्तीसगढ़

Crusher Dust Pollution : क्रशर की धूल से बर्बाद हो रही धान की फसल, किसान बोले-विस्तार से बढ़ेगा संकट

RAIGARH News : सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कटंगपाली–साल्हेओना क्षेत्र में संचालित क्रशर उद्योगों (Crusher Dust Pollution) से फैल रहे प्रदूषण को लेकर किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। जोतपुर-बोंदा के पास संचालित आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स क्रशर से उड़ने वाली धूल के कारण आसपास के खेतों में फसल प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि क्रशर से निकलने वाली धूल खेतों तक पहुंच रही है, जिससे धान की फसल को नुकसान हो रहा है। क्षेत्र में बढ़ती इस समस्या को लेकर क्रशर धूल प्रदूषण की चर्चा तेज हो गई है।

ये भी पढ़े : Crusher Expansion Protest : क्रशर विस्तार की जनसुनवाई से पहले गांवों में उबाल, विरोध की तैयारी तेज

स्थानीय किसानों का कहना है कि जब से क्रशर का संचालन शुरू हुआ है, तब से खेतों और पेड़-पौधों पर धूल की मोटी परत जमने लगी है। इसका असर सीधे खेती पर पड़ रहा है। किसानों के अनुसार धूल के कारण फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है और उत्पादन में कमी आने लगी है। इसी कारण क्षेत्र में क्रशर धूल प्रदूषण (Crusher Dust Pollution) को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16 (1)
WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16
Apex-hospital

किसान ने बताई समस्या Crusher Dust Pollution

दुलमपुर गांव के किसान मधुसूदन पटेल ने बताया कि उनके पास लगभग तीन एकड़ खेतिहर जमीन है, जिसमें वे दोहरी धान की खेती करते हैं। उनका कहना है कि क्रशर से उड़ने वाली धूल सीधे उनके खेतों तक पहुंच रही है और धान की फसल पर जम रही है।

WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.07
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (1)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (1)
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (2)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 16.26.10
IMG-20260814-WA0019
IMG-20260815-WA0012
IMG-20260822-WA0004
IMG-20260830-WA0020
IMG-20260814-WA0017
IMG-20260902-WA0013
IMG-20260815-WA0020
IMG-20260822-WA0004
IMG-20260815-WA0019
IMG-20260815-WA0026(1)
IMG-20260907-WA0004
IMG-20260907-WA0003
IMG-20260909-WA0011
IMG-20260909-WA0012
Oplus_131072

उन्होंने बताया कि खेतों में धूल जमा होने के कारण पौधों की वृद्धि प्रभावित हो रही है और फसल का उत्पादन भी कम हो रहा है। किसान का कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रही तो भविष्य में खेती करना और मुश्किल हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि क्रशर का विस्तार किया गया तो क्रशर धूल प्रदूषण (Crusher Dust Pollution) का असर और अधिक बढ़ जाएगा।

खेतों और पेड़-पौधों पर जम रही धूल

ग्रामीणों के अनुसार क्रशर से निकलने वाली धूल आसपास के खेतों, घरों और पेड़-पौधों पर लगातार जमा हो रही है। कई जगह पेड़ों की पत्तियां सफेद डस्ट से ढकी दिखाई देती हैं।

किसानों का कहना है कि धूल के कारण मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा खेतों में काम करने वाले किसानों को भी सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों में क्रशर धूल प्रदूषण (Crusher Dust Pollution) अब केवल खेती ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

क्रशर विस्तार से बढ़ सकती है समस्या

जानकारी के अनुसार आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स द्वारा क्रशर की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में जहां उत्पादन लगभग एक लाख टन प्रतिवर्ष बताया जा रहा है, वहीं विस्तार के बाद इसे लगभग दो लाख टन से अधिक तक बढ़ाने की योजना है।

ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि यदि उत्पादन बढ़ाया जाता है तो पत्थर की तोड़ाई और क्रशिंग की गतिविधियां भी बढ़ेंगी। इससे धूल और प्रदूषण का स्तर भी बढ़ सकता है। किसानों को आशंका है कि उत्पादन बढ़ने के साथ क्रशर धूल प्रदूषण (Crusher Dust Pollution) की समस्या भी दोगुनी हो जाएगी।

किसानों ने जताई चिंता

क्षेत्र के कई किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। यदि खेतों में लगातार धूल जमा होती रही तो फसल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा और उनकी आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होगी।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही क्षेत्र में कई क्रशर संचालित हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में यदि किसी क्रशर का विस्तार किया जाता है तो इसका सीधा असर किसानों और खेती पर पड़ेगा। इसलिए किसान अब इस मुद्दे को लेकर अपनी चिंता खुलकर व्यक्त कर रहे हैं और क्रशर धूल प्रदूषण (Crusher Dust Pollution) की समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं।

 

ये भी पढ़े :

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button