कृषि समाचारछत्तीसगढ़

Balrampur Farmer : हाई कोर्ट के आदेश के बाद खुला खरीदी केंद्र, बैंड-बाजे के साथ धान बेचने पहुंचा किसान

Balrampur Farmer Band Baaja Rice Procurement : हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद किसान (Balrampur Farmer) ने अनोखे अंदाज में मनाई जीत। बैंड-बाजे के साथ धान खरीदी केंद्र पहुंचकर कराया तौल। समय सीमा खत्म होने का हवाला देकर पहले प्रशासन ने किया था इनकार। न्यायालय के आदेश के बाद समिति खोली गई और 525 बोरा धान की खरीदी सुनिश्चित की गई।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां ग्राम चितविश्रामपुर के (Balrampur Farmer) किसान राजदेव मिंज ने अपनी कानूनी जीत का जश्न अलग अंदाज में मनाया। किसान बैंड-बाजे के साथ बरदर धान खरीदी केंद्र पहुंचे और अपने धान की तौल कराई। यह दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। किसान की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई।

जानकारी के अनुसार किसान राजदेव मिंज का करीब 525 बोरा धान ऑनलाइन टोकन नहीं कट पाने के कारण समय पर सरकारी खरीदी केंद्र में नहीं बिक सका था। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने का हवाला देते हुए प्रशासन ने धान खरीदी से इनकार कर दिया था। इससे परेशान होकर किसान ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत में सुनवाई के बाद निर्णय किसान के पक्ष में आया और प्रशासन को धान खरीदी (Balrampur Farmer) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

धान खरीदी समिति को विशेष रूप से खोला Balrampur Farmer

न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने बरदर धान खरीदी समिति (Balrampur Farmer) को विशेष रूप से खोला। इसके बाद किसान बैंड-बाजे के साथ केंद्र पहुंचे और विधिवत तरीके से धान की तौल कराई गई। किसान राजदेव मिंज ने बताया कि बैंड-बाजा न्यायालय के सम्मान में बजाया गया, क्योंकि उन्हें न्यायालय की वजह से ही न्याय मिल सका। उन्होंने कहा कि यदि वे कानूनी लड़ाई नहीं लड़ते तो उनका धान खराब हो जाता और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता।

इस दौरान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे और किसान का समर्थन किया। जिला उपाध्यक्ष रिपुजित सिंह देव, ब्लॉक अध्यक्ष समीर सिंह देव, जिला महामंत्री विश्वजीत सिंह देव, जिला कोषाध्यक्ष सुनील गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष प्रशांत विश्वास, रामदेव जगते और बुद्धदेव पोया सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने किसान को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने अधिकार के लिए संघर्ष किया और अंततः सरकार को धान खरीदी करनी पड़ी।

 

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