कृषि समाचार

Grafted Brinjal Farming : ग्राफ्टेड बैंगन ने किसान की बदली तकदीर, कोलकाता तक पहुंची उपज; 19.50 क्विंटल की बिक्री

स्थानीय बाजार से निकलकर कोलकाता तक पहुंची बैंगन की उपज ने एक किसान की मेहनत और आधुनिक खेती का शानदार उदाहरण पेश किया है। ग्राफ्टेड किस्म से तैयार फसल को 27 से 38 रुपये किलो तक भाव मिला। अब तक 19.50 क्विंटल बिक्री हो चुकी है। उद्यानिकी, वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर बाजार संपर्क ने खेती को कमाई का नया रास्ता दिया है।

Grafted Brinjal Farming खेत में तैयार फसल जब स्थानीय मंडी की सीमा पार कर बड़े शहर के बाजार तक पहुंचती है, तो किसान के लिए यह सिर्फ बिक्री नहीं, बल्कि उसकी मेहनत को मिला नया बाजार होता है। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) से यही कहानी सामने आई है। अब तक 19.50 क्विंटल बैंगन बिक चुका है और अलग-अलग समय पर 27 से 38 रुपये प्रति किलो तक भाव मिला है।

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कोलकाता तक पहुंची बैंगन की उपज

गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बाजार से सीधे जुड़ाव ने किसान को बेहतर दाम दिलाने में मदद की। 30 सितंबर 2026 तक 19.50 क्विंटल बैंगन की बिक्री हो चुकी है। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) से तैयार उपज पश्चिम बंगाल के कोलकाता बाजार में भेजी जा रही है। बिक्री अभी जारी है, जिससे आने वाले दिनों में उत्पादन और आय बढ़ने की संभावना है।

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27 जुलाई से शुरू हुई पहली तुड़ाई

इस सफलता के पीछे उन्नत किस्म और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन है। वीएनआर-212 ग्राफ्टेड बैंगन की बुआई 15 जून 2026 को की गई थी। इसके बाद 27 जुलाई से पहली तुड़ाई और बिक्री शुरू हुई। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) में गुणवत्तापूर्ण पौधों के चयन का फायदा उत्पादन और बाजार दोनों में मिला।

 

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बतौली के बटईकेला में किसान ने अपनाई नई राह

सरगुजा जिले के विकासखंड बतौली के ग्राम बटईकेला निवासी कृषक हरिहर साय पिता ढोला ने बैंगन उत्पादन को व्यवसायिक रूप दिया है। उनके पास कुल चार हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) के साथ उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बाजार आधारित कृषि को अपनाया है।

 

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एक खेत में कई फसलें, आय के कई रास्ते

हरिहर साय केवल बैंगन उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। वे शेडनेट हाउस में वीएनआर करेला और वीएनआर मिर्च के बीज उत्पादन का काम भी कर रहे हैं। अलग-अलग फसलों और तकनीकों को अपनाने से उनके खेत में विविधता आई है और आय के कई अवसर तैयार हुए हैं।

 

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दूसरे किसानों के लिए बना उदाहरण

हरिहर साय की सफलता बताती है कि उत्पादन के साथ बाजार की समझ भी खेती में अहम भूमिका निभाती है। ग्राफ्टेड पौधों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बेहतर बाजार संपर्क के जरिए किसान अपनी उपज को दूरस्थ बाजारों तक पहुंचा सकते हैं। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती है।

 

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