Gomarda Abhyaran Tourism : 275 वर्ग किमी में फैले गोमर्डा अभ्यारण्य को विकसित करने की मांग, CM साय को लिखा पत्र
छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में गोमर्डा अभ्यारण्य (Gomarda Abhyaran Tourism) को विकसित करने की मांग उठी है। जैव-विविधता, घने जंगल, पहाड़ी और पठारी क्षेत्र, जलप्रपात तथा वन्यजीवों से समृद्ध यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है। सुविधाओं और प्रचार-प्रसार का विस्तार होने से यहां प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

सारंगढ़ के पास स्थित गोमर्डा अभ्यारण्य 275 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की इस प्राकृतिक धरोहर को समग्र और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से विकसित करने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश सचिव सरिता मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि विकास की पूरी प्रक्रिया में वन्यजीव और प्राकृतिक आवास के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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जलप्रपात और पठारी क्षेत्र बनें आकर्षण
सरिता मल्होत्रा ने पत्र में कहा है कि गोमर्डा अभ्यारण्य (Gomarda Abhyaran Tourism) में प्राकृतिक जलप्रपातों, जलाशयों, पहाड़ियों और पठारी क्षेत्रों के कारण पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। इसके बावजूद वर्तमान में आवश्यक पर्यटक सुविधाओं और पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने प्राकृतिक स्थलों का वैज्ञानिक और सुरक्षित विकास करने के साथ प्रमुख स्थानों पर व्यू-पॉइंट, ट्रेकिंग मार्ग और प्रकृति भ्रमण पथ विकसित करने का सुझाव दिया है।

उन्होंने पर्यटकों के लिए स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, देखने के क्षेत्र, प्रसाधन और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की मांग की है। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल रिसॉर्ट, कॉटेज और उपयुक्त स्थानों पर ट्री-हाउस जैसी संरचनाएं विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हो लेकिन जंगल और वन्यजीवों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
Gomarda Abhyaran Tourism बोटिंग और राफ्टिंग को बढ़ावा
पत्र में जलाशयों और उपयुक्त जल क्षेत्रों में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित बोटिंग और बांस राफ्टिंग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। गोमर्डा पर्यटन विकास (Gomarda Abhyaran Tourism) के तहत स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति को भी पर्यटन से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक गतिविधियों को पर्यटकों के सामने लाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सरिता मल्होत्रा ने स्थानीय युवाओं को पर्यटक गाइड, आतिथ्य सेवाओं और वाहन संचालन से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण देने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे बाहर से रोजगार तलाशने वाले युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही गोमर्डा को प्रदेश के प्रमुख ईको-टूरिज्म सर्किट से जोड़कर व्यापक स्तर पर प्रचारित करने की जरूरत बताई गई है।
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हिरण से जंगली भैंसे तक वन्यजीव
गोमर्डा अभ्यारण्य की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी समृद्ध वन्यजीव विविधता शामिल है। यहां विभिन्न प्रजातियों के हिरण और जंगली भैंसा प्रमुख आकर्षण हैं। इसके अलावा सांभर, गौर, जंगली कुत्ता, सियार और नीलगाय सहित कई अन्य वन्यजीव भी पाए जाते हैं। जंगल, पहाड़ी क्षेत्र और वन्यजीवों की मौजूदगी इसे प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल बनाती है।
इसी प्राकृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए गोमर्डा अभ्यारण्य का विकास (Gomarda Abhyaran Tourism) पर्यावरण संरक्षण के साथ करने पर जोर दिया गया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि विकास की प्रक्रिया में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। प्रकृति संरक्षण को पर्यटन विकास की बुनियाद बनाकर ही लंबे समय तक इस क्षेत्र को आकर्षक पर्यटन स्थल बनाया जा सकता है।
Gomarda Abhyaran Tourism सर्वे के बाद बने कार्ययोजना
सरिता मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री से विशेषज्ञों के माध्यम से गोमर्डा अभ्यारण्य (Gomarda Abhyaran Tourism) का विस्तृत सर्वेक्षण कराने और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और कार्ययोजना तैयार कराने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि योजनाबद्ध विकास से यहां पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने कहा है कि गोमर्डा के पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन विकास (Gomarda Abhyaran Tourism) में प्रकृति संरक्षण और स्थानीय रोजगार दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है। यदि जलप्रपात, पठारी क्षेत्र, वन्यजीव, स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प को एक पर्यटन योजना के तहत जोड़ा जाता है, तो गोमर्डा छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।











