Forest Department Regularization : वन विभाग के 3,630 कर्मचारियों के नियमितीकरण की तैयारी
10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा लाभ, 966 तृतीय और 2,664 चतुर्थ श्रेणी के पद शामिल
Forest Department Regularization वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत 3,630 कार्यभारित और आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण (Forest Department Regularization) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनमें 966 तृतीय श्रेणी और 2,664 चतुर्थ श्रेणी के पद शामिल हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की सहमति के बाद अब सेवा शर्तों और भर्ती नियमों का प्रारूप तैयार करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति नियमितीकरण की प्रक्रिया से जुड़े नियमों और सेवा शर्तों का प्रारूप तैयार करेगी।
10 वर्ष से अधिक समय से कर रहे हैं काम
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग छत्तीसगढ़ में लंबे समय से कार्यरत कार्यभारित और आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। कर्मचारियों के नियमितीकरण (Forest Department Regularization) के लिए 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों को आधार बनाया गया है। इनमें तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं।
विभाग में 3,630 कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। इनमें 966 पद तृतीय श्रेणी और 2,664 पद चतुर्थ श्रेणी के हैं। जीएडी की सहमति मिलने के बाद अब इन पदों से संबंधित सेवा शर्तों और भर्ती नियमों का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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चार सदस्यीय समिति करेगी नियमों का प्रारूप तैयार
सामान्य प्रशासन विभाग की सहमति के बाद सरकार ने सेवा शर्तों और भर्ती नियमों का प्रारूप तैयार करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति वन विभाग में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े प्रावधानों का प्रारूप तैयार करेगी।
नियमितीकरण (Forest Department Regularization) की प्रक्रिया में सेवा अवधि, पदों की श्रेणी और संबंधित सेवा शर्तों को ध्यान में रखते हुए नियमों का प्रारूप तैयार किया जाएगा। समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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2019 में बनी थी अनियमित कर्मचारियों की जानकारी जुटाने समिति
राज्य सरकार ने 11 दिसंबर 2019 को प्रमुख सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग तथा सार्वजनिक उपक्रम विभाग की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। इस समिति को प्रदेश के सरकारी विभागों, निगमों और संस्थाओं में कार्यरत अनियमित, दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों की जानकारी एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समिति ने प्रदेश के विभिन्न विभागों और संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों से संबंधित जानकारी जुटाई थी। हालांकि, नियमितीकरण को लेकर समिति की ओर से कोई सिफारिश नहीं की गई थी। अब वन विभाग में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।
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ऊर्जा और नगरीय प्रशासन में सबसे ज्यादा अनियमित कर्मचारी
प्रदेश के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में अनियमित और आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ऊर्जा विभाग में करीब 27,000 और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में करीब 25,000 अनियमित कर्मचारी कार्यरत हैं।
लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में करीब 9,000, सहकारिता विभाग में 7,600 और वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग में 7,500 कर्मचारी कार्यरत हैं। वन विभाग में 3,630 कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब चार सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और प्रस्तावित सेवा शर्तों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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Forest Department Regularization प्रदेश में 1,01,166 आउटसोर्स कर्मचारी
विभिन्न प्रमुख विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या भी एक लाख से अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 1,01,166 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें ऊर्जा विभाग में 27,000 और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में 25,000 कर्मचारी हैं।
लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 9,000, सहकारिता विभाग में 7,600 और वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग में 7,500 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। वन विभाग में 3,630 कर्मचारियों के नियमितीकरण (Forest Department Regularization) की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब चार सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और प्रस्तावित सेवा शर्तों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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| श्रेणी | संख्या |
|---|---|
| नियमितीकरण वाले कर्मचारी | 3,630 |
| तृतीय श्रेणी | 966 |
| चतुर्थ श्रेणी | 2,664 |
| कुल आउटसोर्स कर्मचारी | 1,01,166 |
| ऊर्जा विभाग | 27,000 |
| नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग | 25,000 |
| लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग | 9,000 |
| सहकारिता विभाग | 7,600 |
| वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग | 7,500 |












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