कृषि समाचारछत्तीसगढ़

Vishnu Government Fertilizer Issue : विष्णु के सुशासन में डीएपी और यूरिया के लिए तरसे ‘अन्नदाता, समितियों से खाली हाथ लौट रहे किसान

राजधानी टाइम्स छत्तीसगढ़, 10 जुलाई 2025 : छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन के दावों के बीच खरीफ सीजन की शुरुआत में ही किसानों (Vishnu Government Fertilizer Issue) को खाद के लिए जूझना पड़ रहा है। अंचल की सहकारी समितियों में डीएपी, यूरिया और सुपर फास्फेट जैसे प्रमुख रसायनिक खाद की भारी कमी देखी जा रही है। जिससे किसानों को तय मात्रा में खाद न मिल पाने से खेती-किसानी प्रभावित हो रही है।

राज्य सरकार के सुशासन की हकीकत अब खेतों में साफ नजर आ रही है। खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही अन्नदाता किसान रसायनिक खाद (Vishnu Government Fertilizer Issue) के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सहकारी समितियों में डीएपी, यूरिया और सुपर फास्फेट खाद की भारी कमी है, जिससे किसान जरूरत भर खाद न मिलने के कारण नाराज और परेशान हैं।

(Vishnu Government Fertilizer Issue) आधी खाद देकर किसानों को भेजा घर

बुधवार को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलातंर्गत बरमकेला विकासखंड के सहकारी समिति साल्हेओना में खाद वितरण की सूचना पर दूर-दराज गांवों से सैकड़ों किसान पहुंचे, परंतु उन्हें केवल आधी मात्रा में खाद देकर लौटा दिया गया। किसानों ने बताया कि वे कई दिनों से खाद के इंतजार में थे, और बुधवार को दूसरी बार वितरण की खबर मिलते ही विश्वासपुर, मानिकपुर बड़े, बरगांव, धोबनीपाली, छुहीपाली, कटंगपाली, दुलमपुर आदि गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।

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मजबूरी में व्यापारियों का रुख

सहकारी समिति द्वारा जिन किसानों ने तीन दिन पहले किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत दस्तावेज जमा किए थे, उन्हें प्राथमिकता पर खाद दी गई। लेकिन वितरण में हर किसान को जरूरत से आधी खाद दी गई। जबकि कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के मानक अनुसार प्रति एकड़ एक बोरी डीएपी, दो बोरी यूरिया और एक बोरी सुपर फास्फेट देना अनिवार्य होता है।

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इतनी कीमत में खरीदने को मजबूर

इस बार खाद (Vishnu Government Fertilizer Issue) के खुदरा मूल्य इस प्रकार हैं – डीएपी: 1350 प्रति बोरी, यूरिया: 266 प्रति बोरी, सुपर फास्फेट: 516 प्रति बोरी। पर्याप्त खाद न मिलने की स्थिति में किसान निजी विक्रेताओं से दोगुने दाम में खाद खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। लेकिन इससे जनता पर शासन कर रहे लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता। वे तो मैनपाट सरगुजा में रील्स बनाने में व्यस्त हैं।

 

कई किसान लौटे खाली हाथ

बुधवार को रमेश पटेल (दुलमपुर), हेमलाल पटेल (दुलमपुर), कुबेर चरण पटेल (धोबनीपाली), मकरध्वज मालाकार (छुहीपाली), जगन्नाथ मालाकार (बरगांव) जैसे दर्जनों किसान बिना खाद पाए वापस लौट गए, जबकि उन्होंने डिमांड बुक पहले ही जमा की थी। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक अव्यवस्था और अपर्याप्त भंडारण के कारण उन्हें एक-एक बोरी खाद के लिए जूझना पड़ रहा है।

पोटाश के दाम को लेकर भी असमंजस

एक तरफ जिले भर में डीएपी और यूरिया की भारी मांग है, वहीं पोटाश खाद की अधिक मात्रा में उपलब्धता के बावजूद कीमत को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस वर्ष पोटाश की कीमत ₹1535 प्रति बोरी है, जो पिछले साल से कम है। बावजूद इसके कई सहकारी समितियों ने पोटाश की आपूर्ति नहीं मंगाई है, क्योंकि किसान महंगे दामों के कारण इसे खरीद नहीं पा रहे।

प्रबंधन का दावा – मांग पत्र भेजा जा रहा
सहकारी समिति साल्हेओना के प्रबंधक बंशीधर पटेल ने कहा, “हमें उच्च स्तर से खाद की आपूर्ति पूरी नहीं मिल पाई है। बचे हुए किसानों के लिए पुनः मांग पत्र भेजा जा रहा है। जैसे ही अगली खेप आती है, वितरण शुरू किया जाएगा।”

 

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