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India Toll Tax Collection : सड़क पर दौड़ती गाड़ियां, टोल कमाई से सरकार का भर रहा खजाना

Highway Revenue Growth : टोल टैक्स (India Toll Tax Collection) अब सरकार की आय का एक प्रमुख स्रोत बन चुका है। देश में हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार के साथ वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर टोल वसूली पर दिखाई दे रहा है।

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वित्तीय वर्ष 2026 (अप्रैल–दिसंबर 2025) की पहली तिमाही में ही 50,345 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा न केवल एक बड़ा रिकॉर्ड है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो पिछले वर्ष का कुल संग्रह भी जल्द ही पीछे छूट सकता है। यह उछाल सड़क ढांचे और ट्रैफिक वृद्धि दोनों को दर्शाता है ।

पिछले वर्षों में कितनी हुई कमाई

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025 में कुल 61,408 करोड़ रुपये का टोल टैक्स वसूला गया था। इससे पहले 2024 में 55,882 करोड़ रुपये और 2023 में 48,032 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था। 2022 में यह आंकड़ा 33,929 करोड़ रुपये और 2021 में 27,927 करोड़ रुपये रहा।

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यदि 2021 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों को जोड़ें तो सरकार ने लगभग 2.78 लाख करोड़ रुपये टोल के माध्यम से जुटाए हैं। पांच वर्षों में 120 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि इस बात का संकेत है कि देश का हाईवे नेटवर्क और ट्रैफिक लोड लगातार बढ़ रहा है। यही प्रवृत्ति टोल टैक्स कलेक्शन (India Toll Tax Collection) को नई ऊंचाई दे रही है।

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India Toll Tax Collection टोल वसूली बढ़ने की बड़ी वजह

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, टोल संग्रह कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें हाईवे की लंबाई, वाहनों की संख्या और उनकी श्रेणी प्रमुख हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) सिस्टम ने प्रक्रिया को काफी तेज और पारदर्शी बनाया है।

पहले मैनुअल व्यवस्था में एक वाहन को टोल पार करने में औसतन 12 मिनट से अधिक समय लगता था, जिससे जाम और देरी होती थी। अब NETC प्रोग्राम के तहत यह समय घटकर लगभग 40 सेकंड रह गया है। इससे न केवल ट्रैफिक जाम में कमी आई है, बल्कि वसूली की गति भी बढ़ी है।

इन पांच राज्यों का सबसे ज्यादा योगदान

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि टोल कलेक्शन में पांच राज्यों का योगदान सबसे अधिक रहा है। इनमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु शामिल हैं। 2021 से 2025 के बीच राजस्थान ने 24,310 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया।

उत्तर प्रदेश करीब 23,900 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रहा। महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु ने भी लगातार बढ़त दर्ज की। इन पांच राज्यों की हिस्सेदारी कुल टोल कलेक्शन का लगभग 48 प्रतिशत है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि India Toll Tax Collection में इन राज्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

मजबूत हाईवे नेटवर्क का असर

इन राज्यों में अधिक टोल वसूली का प्रमुख कारण उनका विस्तृत और घना हाईवे नेटवर्क है। जहां बेहतर सड़क ढांचा और एक्सप्रेसवे उपलब्ध हैं, वहां वाहनों की आवाजाही स्वाभाविक रूप से ज्यादा होती है। औद्योगिक गतिविधियां, व्यापारिक परिवहन और इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी भी ट्रैफिक को बढ़ाती हैं। यही वजह है कि इन क्षेत्रों में टोल कलेक्शन तेजी से बढ़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टोल से प्राप्त राजस्व को सड़क सुरक्षा, यात्री सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर उन्नयन में निवेश किया जाए, तो इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। बढ़ती आय से यह उम्मीद भी की जा रही है कि India Toll Tax Collection के साथ-साथ सड़क गुणवत्ता और सेवाओं में भी समान अनुपात में सुधार होगा।

 

 

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