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Nua Baat : हथियार छोड़ अब हाथों में थामे औजार

Surrendered Maoists Bastar : बस्तर अंचल, जो लंबे समय तक हिंसा और माओवाद की छाया (Nua Baat)  में रहा, अब धीरे-धीरे बदलाव की राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी बदलाव की जीवंत तस्वीर (Nua Baat) के रूप में सामने आ रही है, जहां हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी अब हुनर और मेहनत के जरिए नया जीवन गढ़ने में जुटे हैं। जिला प्रशासन की इस पहल ने न केवल इन लोगों के जीवन की दिशा बदली है, बल्कि बस्तर में शांति और विकास की उम्मीद को भी मजबूती दी है।

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इसी क्रम में मंगलवार को कलेक्टर आकाश छिकारा आड़ावाल स्थित नुवा बाट परिसर पहुँचे। यह दौरा मात्र एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि उन 28 आत्मसमर्पित माओवादियों के प्रति शासन की संवेदनशीलता और पुनर्वास की प्रतिबद्धता का स्पष्ट संदेश भी था, जो अब जंगलों की भटकन छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट चुके हैं।

प्रशिक्षण की हकीकत जानने खुद पहुँचे कलेक्टर

कलेक्टर श्री छिकारा ने (Nua Baat) के तहत संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि आत्मसमर्पित माओवादियों को किस प्रकार का कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, प्रशिक्षण की गुणवत्ता कैसी है और कहीं उन्हें किसी तरह की समस्या या कठिनाई का सामना तो नहीं करना पड़ रहा।
इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षुओं से सीधे संवाद कर उनके अनुभव, अपेक्षाएं और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी जानकारी ली।

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कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि शासन का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण कराना नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन देना भी है। (Nua Baat) इसी सोच का परिणाम है, जिसमें पुनर्वास, कौशल विकास और सामाजिक स्वीकार्यता को एक साथ जोड़ा गया है।

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Nua Baat  हथियार से औजार तक का बदलाव

नुवा बाट परिसर में प्रशिक्षण ले रहे ये 28 आत्मसमर्पित माओवादी अब हथियारों के बजाय औजारों को अपना साथी बना चुके हैं। कोई बढ़ईगीरी सीख रहा है, कोई वेल्डिंग, तो कोई इलेक्ट्रिकल और अन्य तकनीकी कार्यों में दक्षता हासिल कर रहा है।
यह बदलाव केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और स्वाभिमान की नई भावना भी पैदा कर रहा है।

प्रशासन का मानना है कि (Nua Baat) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जब इन लोगों को हुनर मिलता है, तो वे न केवल खुद के लिए रोजगार सृजित कर पाते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक भूमिका भी निभाते हैं।

अधिकारियों की मौजूदगी में व्यवस्थाओं की समीक्षा

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  प्रतीक जैन और डिप्टी कलेक्टर सुश्री नंदिनी साहू भी उपस्थित रहीं। अधिकारियों ने प्रशिक्षण कक्ष, उपकरणों, आवासीय व्यवस्थाओं और भोजन सहित अन्य सुविधाओं का जायजा लिया। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि प्रशिक्षण में किसी तरह की लापरवाही न हो और सभी आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध रहें।  (Nua Baat) के तहत संचालित यह केंद्र प्रशासन और सुरक्षा बलों के समन्वय से बस्तर में स्थायी शांति की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास

कलेक्टर छिकारा ने कहा कि आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए उन्हें न केवल कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि आगे रोजगार, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद इन युवाओं को रोजगार के ठोस अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे दोबारा भटकाव की ओर न जाएं।

बस्तर में शांति की नई इबारत

बंदूक छोड़कर औजार थामने वाले इन युवाओं की कहानी बस्तर में शांति और विकास की नई इबारत लिख रही है। (Nua Baat) जैसी पहल यह साबित करती है कि संवाद, संवेदनशीलता और अवसर के जरिए हिंसा का रास्ता छोड़ चुके लोगों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिया जा सकता है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह के प्रयासों से न केवल आत्मसमर्पित माओवादियों का भविष्य सुधरेगा, बल्कि क्षेत्र में सक्रिय अन्य भटके हुए युवाओं को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी।

संदेश और भविष्य की राह

नुवा बाट परिसर में दिख रहा यह बदलाव केवल 28 लोगों तक सीमित नहीं है। यह बस्तर के लिए एक संदेश है कि विकास और शांति का रास्ता हथियारों से नहीं, बल्कि हुनर, रोजगार और विश्वास से होकर गुजरता है। आने वाले समय में (Nua Baat) मॉडल को और विस्तार देने की दिशा में प्रशासन लगातार कार्य कर रहा है।

 

 

 

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