Tag: Drip Irrigation Farming

  • Horticulture Department Scheme : 80 हजार से 5 लाख तक पहुंची कमाई, आधुनिक खेती से चमकी किसान की किस्मत

    Horticulture Department Scheme : 80 हजार से 5 लाख तक पहुंची कमाई, आधुनिक खेती से चमकी किसान की किस्मत

    उद्यानिकी विभाग की योजनाओं (Horticulture Department Scheme) का लाभ लेकर कोरबा जिले के किसान छत्रपाल सिंह कंवर ने खेती का तरीका बदलकर अपनी आमदनी बढ़ाई है। कटघोरा विकासखंड के ग्राम धनरास निवासी कंवर पहले मुख्य रूप से धान की परंपरागत खेती करते थे। सिंचाई के सीमित साधनों और आधुनिक कृषि उपकरणों की कमी के कारण उनकी सालाना आय 70 से 80 हजार रुपये तक थी। अब धान के साथ मौसमी सब्जियों की खेती से उनकी वार्षिक आय बढ़कर चार से पांच लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से छत्रपाल सिंह कंवर ने संवारी खेती, सालाना आय बढ़कर 4-5 लाख रुपये तक पहुंची

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    धान के साथ सब्जियों की खेती

    छत्रपाल सिंह कंवर को वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना, राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सहायता मिली। इन योजनाओं (Horticulture Department Scheme) के माध्यम से उन्हें ड्रिप सिंचाई संयंत्र, फेंसिंग, प्लास्टिक मल्चिंग, पावर टिलर और पावर स्प्रेयर जैसी सुविधाओं के लिए अनुदान मिला। इन संसाधनों की मदद से उन्होंने धान के साथ मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी शुरू किया।

     

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    ड्रिप और मल्चिंग से फायदा

    ड्रिप सिंचाई से पानी का बेहतर प्रबंधन करने, मल्चिंग से फसलों की देखभाल और पावर टिलर से कृषि कार्य आसान बनाने में मदद मिली। आधुनिक तकनीक अपनाने से उत्पादन और फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ। खेती में तकनीकी सुविधाओं (Horticulture Department Scheme) के उपयोग ने उनकी आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

     

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    80 हजार से 5 लाख तक आय

    छत्रपाल सिंह कंवर ने बताया कि पहले सिंचाई के पर्याप्त साधन और आधुनिक उपकरण नहीं होने से उनकी आमदनी सीमित थी। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं (Horticulture Department Scheme) से सहायता मिलने के बाद उन्होंने खेती का तरीका बदला। अब धान के साथ मौसमी सब्जियां भी उगा रहे हैं और सालाना चार से पांच लाख रुपये तक कमा रहे हैं। उन्होंने दूसरे किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही। कंवर ने किसानों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।

     

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  • Grafted Brinjal Farming : 1 एकड़ में 23 टन बैंगन का उत्पादन,  युवा किसान ने कमाए 2.65 लाख रुपए

    Grafted Brinjal Farming : 1 एकड़ में 23 टन बैंगन का उत्पादन, युवा किसान ने कमाए 2.65 लाख रुपए

    Grafted Brinjal Farming पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। ऐसे ही किसान गौरव कुठारे ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) अपनाकर बेहतर उत्पादन हासिल किया। उन्हें एक एकड़ में करीब 23 टन बैंगन का उत्पादन मिला। करीब 20 रुपए प्रति किलो की दर से बिक्री से उन्हें लगभग 2.65 लाख रुपए की सकल आमदनी हुई।

    सेवा संकल्प अभियान: ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से गुलझर के किसान गौरव की बढ़ी आमदनी

    धान के साथ शुरू की उद्यानिकी फसलों की खेती

    महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम गुलझर निवासी गौरव कुठारे पहले मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। बाद में उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाया।

    गौरव अपने 1.60 हेक्टेयर खेत में वर्षभर टमाटर, बैंगन, सेम और गेंदा जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं। इससे उन्हें अलग-अलग मौसम में आय के अवसर मिल रहे हैं। आधुनिक बैंगन खेती (Grafted Brinjal Farming) में तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन बेहतर करने में मदद मिली।

     

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    ड्रिप और मल्चिंग से घटाई उत्पादन लागत

    गौरव ने खेती में ड्रिप और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया है। इन तकनीकों के साथ कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिली। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से बेहतर उत्पादन हासिल करने का अवसर मिला। धान की खेती के मुकाबले उद्यानिकी फसलों में उन्हें उत्पादन और बाजार मूल्य के बेहतर अवसर मिले। इसी वजह से उन्होंने सब्जी उत्पादन का दायरा बढ़ाया।

     

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    Grafted Brinjal Farming  30 हजार रुपए का अनुदान

    वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के घटक ग्राफ्टेड बैंगन, टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन के तहत गौरव को एक एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की फसल के लिए 30 हजार रुपए का अनुदान मिला। यह राशि डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में दी गई। ग्राफ्टेड बैंगन अनुदान (Grafted Brinjal Farming) मिलने से उन्हें आधुनिक तरीके से फसल तैयार करने में आर्थिक सहायता मिली।

     

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    23 टन उत्पादन, 2.65 लाख की सकल आमदनी

    गौरव के अनुसार ग्राफ्टेड बैंगन की फसल से उन्हें करीब 23 टन उत्पादन प्राप्त हुआ। उन्होंने बैंगन को लगभग 20 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचा। इससे करीब 2 लाख 65 हजार रुपए की सकल आमदनी हुई। ड्रिप, मल्चिंग और कृषि यंत्रों के उपयोग से लागत को नियंत्रित करने में भी सहायता मिली। बैंगन उत्पादन से आमदनी (Grafted Brinjal Farming) बढ़ने से गौरव को खेती में नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

     

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    दूसरे किसानों को भी दे रहे सब्जी खेती की सलाह

    गौरव की सफलता आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। वे खुद अन्य किसानों को पारंपरिक धान की खेती के साथ सब्जी और दूसरी उद्यानिकी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका अनुभव बताता है कि पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय के नए स्रोत तैयार कर सकते हैं।

     

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  • Grfted Tomato Brinjal Farming : रायगढ़ में बंजर जमीन पर लहलहाई ग्राफ्टेड बैंगन व टमाटर, किसान ने कमाए 4.25 लाख

    Grfted Tomato Brinjal Farming : रायगढ़ में बंजर जमीन पर लहलहाई ग्राफ्टेड बैंगन व टमाटर, किसान ने कमाए 4.25 लाख

    ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती (Grfted Tomato Brinjal Farming) ने रायगढ़ के एक किसान की बंजर पड़ी जमीन की तस्वीर बदल दी है। लैलूंगा विकासखंड के ग्राम झारआमा निवासी किसान एतवार साय पैकरा ने आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ऐसी जमीन पर ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती की, जहां सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण पारंपरिक खेती करना मुश्किल था। किसान ने 187 क्विंटल उत्पादन से 4.25 लाख रुपये की बिक्री की।

    रायगढ़ के किसान ने ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती से कमाए 4.25 लाख

    ग्राफ्टेड सब्जियों में नीचे जंगली बैंगन का रूटस्टॉक और ऊपर टमाटर या हाइब्रिड बैंगन का सायन लगाया जाता है। इस तकनीक से तैयार पौधे रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। अधिक पानी, लंबे समय तक सूखा और भारी बारिश जैसी परिस्थितियों को भी ये पौधे अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से सहन कर सकते हैं।

     

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    बंजर जमीन पर शुरू की खेती

    ग्राफ्टेड सब्जी खेती (Grfted Tomato Brinjal Farming) की शुरुआत किसान एतवार साय पैकरा ने गांव से दूर जंगल के समीप स्थित अपनी अनुपयोगी जमीन पर की। सिंचाई साधनों के अभाव के कारण यहां खेती करना चुनौतीपूर्ण था। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में किसान ने पहले जमीन का समतलीकरण कराया।

    इसके बाद सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक और नमी संरक्षण के लिए मल्चिंग पद्धति अपनाई। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में किसान ने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड सब्जियों की खेती शुरू की।

    रायगढ़ के किसान ने ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती से कमाए 4.25 लाख

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    टमाटर से 1.75 लाख, बैंगन से 2.50 लाख की बिक्री

    किसान ने ग्राफ्टेड टमाटर की खेती (Grfted Tomato Brinjal Farming) से 87 क्विंटल उत्पादन हासिल किया। इससे 1 लाख 75 हजार रुपये की बिक्री हुई। वहीं ग्राफ्टेड बैंगन से 100 क्विंटल उत्पादन मिला और 2 लाख 50 हजार रुपये की बिक्री हुई। इस तरह दोनों फसलों से कुल 187 क्विंटल उत्पादन हुआ और 4 लाख 25 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की गई।

     

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    1.45 लाख की लागत, 2.80 लाख रुपये का शुद्ध लाभ

    किसान के अनुसार दोनों फसलों की खेती में कुल 1 लाख 45 हजार रुपये की लागत आई। इसके बाद 4.25 लाख रुपये की बिक्री से उन्हें 2 लाख 80 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। ग्राफ्टेड टमाटर-बैंगन खेती (Grfted Tomato Brinjal Farming) से हुई इस आमदनी ने किसान को पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर विकल्प दिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार आधुनिक तकनीक और उचित प्रबंधन से कम क्षेत्र में भी बेहतर उत्पादन और आय हासिल की जा सकती है।

     

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    अभी जारी है बैंगन का उत्पादन

    वर्तमान में ग्राफ्टेड बैंगन की फसल से उत्पादन जारी है। किसान को आने वाले समय में 150 से 200 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन की उम्मीद है। इससे करीब 4 से 5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। किसान एतवार साय पैकरा की सफलता से गांव के दूसरे किसान भी ग्राफ्टेड सब्जी खेती (Grfted Tomato Brinjal Farming) की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उद्यानिकी विभाग की ओर से भी किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

     

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    रोग प्रतिरोधी पौधों से खेती में फायदा

    ग्राफ्टिंग तकनीक में मजबूत रूटस्टॉक का उपयोग किए जाने से पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके साथ ही ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से पानी की बचत तथा मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। रायगढ़ के किसान की यह पहल बताती है कि उचित तकनीक, विभागीय मार्गदर्शन और आधुनिक सिंचाई पद्धति अपनाकर अनुपयोगी जमीन को भी लाभदायक कृषि क्षेत्र में बदला जा सकता है।

     

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  • Organic Farming Success Story : बी-फार्मेसी छोड़ किसान बना रमेश, 5 एकड़ में लाखों की कमाई

    Organic Farming Success Story : बी-फार्मेसी छोड़ किसान बना रमेश, 5 एकड़ में लाखों की कमाई

    Sarangarh Bilaigarh Former News : सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम जमगहन के युवा किसान रमेश प्रेमी (Organic Farming Success Story) आज आधुनिक और जैविक खेती के माध्यम से एक सफल किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने अपनी मेहनत, नई तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ खेती को न केवल लाभदायक बनाया है, बल्कि गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। वर्तमान में वे लगभग 5 एकड़ भूमि में खेती कर रहे हैं और लगातार अपनी आय बढ़ाते हुए खेती को और उन्नत करने में जुटे हैं।

    Organic Farming Success Story

    रमेश प्रेमी मुख्य रूप से सब्जी की खेती करते हैं, जिसमें खीरा, लौकी, करेला, टमाटर और बैंगन जैसी फसलें शामिल हैं। इनमें करेला उनकी प्रमुख फसल है, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिलता है। इसके साथ ही वे इंटरक्रॉपिंग पद्धति अपनाते हुए चना, प्याज, अदरक और हल्दी की खेती भी करते हैं, जिससे उनकी जमीन का बेहतर उपयोग होता है और आय के अतिरिक्त स्रोत भी बनते हैं।

    Organic Farming Success Story जैविक व आधुनिक तकनीक से सफलता

    रमेश प्रेमी की खेती की सबसे बड़ी खासियत उनकी जैविक खेती की सोच है। वे रासायनिक उर्वरकों का कम उपयोग करते हैं और प्राकृतिक व जैविक तरीकों से खेती करते हैं। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। उन्होंने अपनी खेती में ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीक को अपनाया है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को सही मात्रा में पोषण मिलता है।

    Organic Farming Success Story

    रमेश प्रेमी को खेती के क्षेत्र में बिलाईगढ़ कृषि और उद्यानिकी विभाग से समय-समय पर सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है। वे नई तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर अपनी खेती को लगातार उन्नत बना रहे हैं। उनकी खेती (Organic Farming Success Story) से न केवल उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि वे गांव की 10 ग्रामीण महिलाओं को पूरे साल रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और गांव में आत्मनिर्भरता का माहौल बन रहा है।

    उन्नत किसान रमेश प्रेमी की प्रेरक यात्रा

    युवा किसान रमेश प्रेमी ने बी-फार्मेसी की पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक मेडिकल और हॉस्पिटल क्षेत्र में काम भी किया, लेकिन वर्ष 2016 में उन्होंने खेती को अपना मुख्य व्यवसाय बनाने का निर्णय लिया। कोरोना काल के बाद उन्होंने पूरी तरह से हॉस्पिटल का काम छोड़कर खेती में ही अपना पूरा समय देना शुरू कर दिया।

    मेडिकल क्षेत्र से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने खेती को अपनाकर यह साबित किया कि यदि खेती को वैज्ञानिक तरीके और नई तकनीकों के साथ किया जाए तो यह किसी भी नौकरी से कम नहीं है। शुरुआत में उनके इस फैसले को लोगों ने अटपटा माना, लेकिन आज उनकी सफलता (Organic Farming Success Story) उन सभी के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

    रमेश प्रेमी बताते हैं कि “मैंने मेडिकल फील्ड की पढ़ाई की है, लेकिन मुझे लगा कि खेती में ज्यादा संभावनाएं हैं। कई किसान बिना पढ़ाई के भी अच्छी खेती कर रहे हैं, इसलिए मैंने सोचा कि अगर मैं पढ़ाई और नई तकनीक के साथ खेती करूं तो इससे बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। आज उसका परिणाम सामने है।”

    वे युवाओं को संदेश देते हैं कि जैविक खेती और सब्जी उत्पादन के माध्यम से किसान अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। अगर युवा आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ खेती करें तो यह एक सफल और सम्मानजनक व्यवसाय बन सकता है। उनका मानना है कि आज के समय में युवा वर्ग केवल नौकरी के पीछे भाग रहा है, जबकि खेती में भी अपार संभावनाएं हैं।

    Organic Farming Success Story

    आज ग्राम जमगहन के युवा किसान रमेश प्रेमी अपनी मेहनत, नवाचार और दूरदर्शिता के दम पर न केवल खुद सफल हो रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गए हैं। उनकी यह सफलता (Organic Farming Success Story) यह साबित करती है कि यदि खेती को नई सोच और आधुनिक तकनीक के साथ किया जाए तो गांव में रहकर भी उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है।

     

     

  • Chhattisgarh Tomato Farming : धान से नहीं हुई इतनी कमाई, टमाटर ने बदल दी किसान की आमदनी

    Chhattisgarh Tomato Farming : धान से नहीं हुई इतनी कमाई, टमाटर ने बदल दी किसान की आमदनी

    National Horticulture Mission : राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक कृषि (Chhattisgarh Tomato Farming) प्रणाली से जोड़ने के उद्देश्य से लगातार नई पहल कर रही है। इसी दिशा में राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) किसानों के लिए एक प्रभावी योजना साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और उन्नत बागवानी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उत्पादन और मुनाफे दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

    प्रदेश में कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें बाजार आधारित खेती और आधुनिक संसाधनों से जोड़ना है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के अंतर्गत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, गुणवत्तायुक्त बीज और आधुनिक सिंचाई पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

    टमाटर की अपनाई उन्नत खेती

    जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत टेम्पू के किसान सुनील भगत इस योजना की सफलता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आए हैं। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में टमाटर (Chhattisgarh Tomato Farming) की उन्नत खेती अपनाई और बेहतर परिणाम प्राप्त किए। विभागीय सलाह के अनुसार उन्होंने जीके देशी किस्म का टमाटर लगाया, जिससे प्रति एकड़ लगभग 9 टन उत्पादन हासिल हुआ। यह उत्पादन पारंपरिक खेती की तुलना में काफी अधिक माना जा रहा है।

    Chhattisgarh Tomato Farming कम समय में बेहतर आय

    किसान सुनील भगत बताते हैं कि वे मौसम और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए सब्जी फसलों की खेती करते हैं। वर्तमान सीजन में टमाटर (Chhattisgarh Tomato Farming) उत्पादन से उन्हें लगभग 85 हजार 500 रुपये की आय प्राप्त हुई। लागत व्यय निकालने के बाद करीब 55 हजार 500 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के तहत वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान कम समय में बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

    Chhattisgarh Tomato Farming किसानों को नई तकनीक से जोड़ रहे

    उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना है, ताकि पानी, खाद और श्रम लागत को कम करते हुए उत्पादन बढ़ाया जा सके। इसी क्रम में अब किसान ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और उन्नत पौध प्रबंधन तकनीकों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) किसानों को टिकाऊ खेती मॉडल की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    अन्य गांवों के किसान भी हुए प्रेरित

    सुनील भगत की सफलता से ग्राम पंचायत टेम्पू सहित आसपास के गांवों के किसान भी प्रेरित हुए हैं। कई किसानों ने अब पारंपरिक धान आधारित खेती के साथ सब्जी और बागवानी फसलों को अपनाने की योजना बनाई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य में बागवानी आधारित खेती किसानों के लिए अधिक लाभकारी विकल्प बन सकती है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को आधुनिक कृषि की दिशा मिल रही है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रहे हैं। आने वाले समय में यह योजना ग्रामीण विकास और कृषि आधारित रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    राज्य सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ें और आधुनिक खेती (Chhattisgarh Tomato Farming) के जरिए अपनी आय दोगुनी करने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें। उन्नत तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग का यह समन्वय प्रदेश की कृषि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है।

     

     

  • Ranchi Ormanjhi Farming Training : 47 कृषि सखियों ने झारखंड के ओरमांझी में सीखी आधुनिक खेती की तकनीकें

    Ranchi Ormanjhi Farming Training : 47 कृषि सखियों ने झारखंड के ओरमांझी में सीखी आधुनिक खेती की तकनीकें

    Jashpur News : जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड में कार्यरत 47 कृषि सखियों ने झारखंड राज्य के रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड में सफल एवं प्रगतिशील किसानों (Ranchi Ormanjhi Farming Training) के खेतों का शैक्षणिक परिभ्रमण किया। यह भ्रमण कार्यक्रम 6 जनवरी 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें कृषि सखियों को आधुनिक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

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    इस शैक्षणिक दौरे के दौरान कृषि सखियों ने झारखंड सरकार एवं भारत सरकार द्वारा सम्मानित कृषक गणशू महतो तथा प्रगतिशील (Ranchi Ormanjhi Farming Training) महिला किसान संगीता देवी के खेतों में किए जा रहे नवाचारों और आधुनिक कृषि पद्धतियों का गहन अवलोकन किया। इस भ्रमण का उद्देश्य कृषि सखियों को सफल किसानों के अनुभवों से जोड़ते हुए उन्हें नवीन तकनीकों से परिचित कराना था, ताकि वे अपने क्षेत्र में किसानों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

    परिभ्रमण के दौरान गोभी, मटर, मूली, मिर्च सहित विभिन्न साग-सब्जियों की उन्नत खेती के तरीकों की जानकारी दी गई। किसानों द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक कृषि (Ranchi Ormanjhi Farming Training) तकनीकों जैसे मल्चिंग का उपयोग, जैविक खेती की तैयारी, मृदा परीक्षण की आवश्यकता, उपयुक्त उर्वरकों का चयन, मचान खेती, ड्रिप इरीगेशन प्रणाली एवं फसल प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को कृषि सखियों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा।

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    यह प्रेरणादायक पहल कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास के नेतृत्व में तथा जिला पंचायत जशपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत कृषि सखियों की क्षमता वृद्धि करना और उन्हें नवाचार आधारित खेती से जोड़ना है।

    झारखंड सरकार द्वारा सम्मानित कृषक गणशू महतो, ग्राम सदमा (ओरमांझी) ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी साझा (Ranchi Ormanjhi Farming Training) करते हुए बताया कि वे कभी मात्र 50 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी करते थे, लेकिन वैज्ञानिक खेती की जानकारी अपनाकर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी। वर्तमान में वे आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी सुनकर कृषि सखियाँ बेहद उत्साहित और प्रेरित हुईं।

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    इसी प्रकार प्रगतिशील (Ranchi Ormanjhi Farming Training) महिला किसान संगीता देवी, ग्राम कच्चू (ओरमांझी) ने बताया कि उन्होंने लीज पर भूमि लेकर सब्जी एवं अन्य फसलों की उन्नत खेती (Ranchi Ormanjhi Farming Training) प्रारंभ की। वर्तमान में वे 8 एकड़ भूमि पर खेती कर लाखों रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। उनके अनुभवों ने महिला कृषि सखियों में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की नई ऊर्जा का संचार किया।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं जिला प्रशासन की इस संयुक्त पहल से जशपुर जिले में कृषि आधारित आजीविका को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम महिला कृषकों को सशक्त बनाते हुए उन्हें “लखपति दीदी” के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।