Breaking News

Mayor Faints During Protest : धरने पर बैठीं महापौर की बिगड़ी तबीयत, अचानक चक्कर आने पर अस्पताल में भर्ती

Bhilai News   :  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के  रिसाली नगर निगम में सफाई ठेके को लेकर चल रहा विवाद (Mayor Faints During Protest) सोमवार को उस समय और गहरा गया, जब ठेका कर्मचारियों ने महापौर शशि सिन्हा के घर का घेराव कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों और महापौर के बीच लंबी चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच निगम में चल रहा विरोध प्रदर्शन और धरना पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा।

सुबह से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन के चलते नगर निगम के विभिन्न वार्डों में सफाई कार्य पूरी तरह ठप रहा। सफाई नहीं होने के कारण कई इलाकों में अव्यवस्था की स्थिति बन गई और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों की नाराजगी और प्रदर्शन के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी रही और यह मामला धीरे-धीरे एक बड़े धरना-प्रदर्शन (Mayor Faints During Protest) का रूप लेता गया।

आयुक्त कक्ष के सामने धरने पर बैठीं महापौर

निगम कार्यालय खुलने के बाद महापौर शशि सिन्हा आयुक्त मोनिका वर्मा के कक्ष के सामने धरने पर बैठ गईं। उनके समर्थन में कांग्रेस के कई पार्षद भी मौजूद थे और उन्होंने भी महापौर के साथ बैठकर विरोध दर्ज कराया। निगम कार्यालय परिसर में माहौल काफी गर्म रहा और इस दौरान चल रहे धरना-प्रदर्शन (Mayor Faints During Protest) को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

लंबे समय तक धरने पर बैठे रहने के दौरान दोपहर के समय अचानक महापौर की तबीयत बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महापौर शशि सिन्हा को चक्कर आया और वह अचेत होकर गिर पड़ीं। घटना से मौके पर मौजूद पार्षदों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद उन्हें तुरंत भिलाई के सेक्टर-9 अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया। इस घटना के बाद नगर निगम में चल रहा विवाद और विरोध प्रदर्शन (Civic Protest) और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गया।

(Mayor Faints During Protest) सफाई ठेके को लेकर लंबे समय से विवाद

बताया जा रहा है कि रिसाली नगर निगम के गठन से पहले यह क्षेत्र भिलाई नगर निगम के अंतर्गत आता था। वर्ष 2016 में सफाई व्यवस्था के लिए किवार कंपनी को ठेका दिया गया था। नियमों के अनुसार ठेका कंपनी को कर्मचारियों का भविष्य निधि यानी पीएफ शासन के खाते में जमा करना था, लेकिन आरोप है कि कंपनी ने यह राशि जमा नहीं की। इसी वजह से इस मामले को लेकर समय-समय पर विवाद और विरोध (Mayor Faints During Protest) की स्थिति बनती रही।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने आदेश जारी किया था कि श्रमिकों की नियुक्ति केवल एजेंसी के माध्यम से ही की जाएगी। 23 अप्रैल 2020 को जारी आदेश के मुताबिक रिसाली नगर निगम को सफाई कार्य के लिए केवल 288 कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रमिक रखने की अनुमति दी गई थी और यह कार्य प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए कराया जाना था।

एमआईसी के फैसले के बाद बढ़ा विवाद

आम तौर पर सफाई का ठेका एक वर्ष के लिए दिया जाता है, लेकिन वर्ष 2020-21 और 2022-23 में महापौर परिषद ने इसे दो साल तक बढ़ाने का निर्णय लिया था। वर्ष 2024-25 की निविदा अवधि समाप्त होने के बाद परिषद ने दो महीने का अतिरिक्त समय भी दिया था।

हाल ही में एमआईसी की बैठक में यह फैसला लिया गया कि निगम अब सीधे सफाई कर्मियों से काम कराएगा और उनका वेतन सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा। इसी फैसले के बाद ठेका कर्मचारियों और प्रशासन के बीच विवाद गहराता गया और यह मामला बड़े विरोध प्रदर्शन (Civic Protest) में बदल गया। फिलहाल प्रशासन स्थिति को संभालने और समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button