छत्तीसगढ़

मर जाएंगे, मगर अडानी को अपनी एक इंच भी जमीन नहीं देंगे

राजधानी टाइम्स छत्तीसगढ़ ,रायगढ़  —मर जाएंगे, मगर अडानी को अपनी एक इंच भी जमीन नहीं देंगे

पुसौर के ग्राम कोतमरा के शताधिक ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन में भरी हुंकार, कृषि भूमि के औद्योगिक प्रयोजन और भूमि अर्जन पर रोक लगाने की मांग की, नहीं तो आंदोलन और जलसमाधि से लेकर इच्छामृत्यु का बनाया मूड

रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक के ग्राम कोतमरा के शताधिक ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में हल्ला बोलते हुए अडानी के खिलाफ जमकर हुंकार भरी। किसानों ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन सौंपते हुए एक पखवाड़े के अंदर समस्या का निदान नहीं होने पर आंदोलन करने की बात कही। वहीं, चौका चूल्हा छोड़कर अपने मासूम बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं ने तो यह ऐलान कर दिया कि वे मर जाएंगे, लेकिन अपनी एक इंच जमीन अडानी के नाम नहीं करेंगे।

वैसे तो सोमवार को कलेक्टर जनदर्शन में कई फरियादी पहुंचे, मगर पुसौर विकासखंड के ग्राम कोतमरा से किराए की पिकअप वाहन में सवार होकर तकरीबन 23 किलोमीटर का सफर तय कर रायगढ़ आए शताधिक ग्रामीणों ने अडानी के विरोध में जिस कदर अपनी भड़ास निकाली, उससे प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सरपंच अमीन पटेल के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट में हल्लाबोल करने वाले ग्रामीणों ने कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की गैरहाजिरी में डिप्टी कलेक्टर अपूर्व टोप्पो को 11 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए यह घोषणा भी की कि अगर 15 रोज में उनकी समस्याओं का हल नहीं निकला तो सोलहवें दिन से वे धरना आंदोलन का सिलसिला शुरू करते हुए जलसमाधि, इच्छामृत्यु जैसे बेहद संवेदनशील प्रदर्शन का भी मूड बना चुके हैं।

जिलाधीश के नाम प्रेषित ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि औद्योगिक प्रयोजन हेतु निजी भूमि अर्जन किया जाना प्रस्तावित है। इसमें ग्राम कोतमरा का 116.344 हेक्टेयर खेती भूमि भी शामिल है। इस भूमि को ग्राम कोतमरा के भूमि धारक कृषक किसी भी उद्योग या कम्पनी को देना नहीं चाहते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि अधिकांश जमीन पूर्वजों से प्राप्त पैतृक जमीन व कृषि ही जीवन यापन का मुख्य साधन है। भू- अर्जन से कृषक भूमिहीन व बेरोजगार हो जायंगे और उन्हें अपने परिवार के पालन पोषण के लिए आय का जरिया समाप्त हो जायेगा। प्रस्तावित भूमि सिंचित एवं दो फसली है जो आय का मुख्य साधन है। गांव का कोई भी किसान अपना जमीन कम्पनी को देना नहीं चाहता, इसलिये इस संबंध में ग्राम सभा आयोजित कर जमीन नहीं देने के लिये 2 बार ग्रामसभा में प्रस्ताव भी पारित कर लिया गया है।

प्रस्तावित भूमि में गाँव का 2 शासकीय तालाबों में डोंगिया और बेहरा डभरी तालाब को गाँव के 4 व्यक्तियों का मत्स्य पालन के लिये लीज पर दिया गया है। इसमें 4 व्यक्तियों के परिवार का भरण-पोषण हो रहा है और गर्मी के दिनों में यहाँ निस्तारी होता है। डोंगिया तालाब के पास श्मशान घाट भी है। प्रस्तावित भूमि शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेलगा है। प्रस्तावित भूमि ग्राम पंचायत कोतमरा के पंचायत भवन से लगा है। प्रस्तावित भूमि से यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली राशन दुकान से लगा हुआ है। प्रस्तावित भूमि में गाँव के जगन्नाथ मन्दिर का भोग जमीन भी शामिल है। प्रस्तावित भूमि कोतमरा बरती के अधिकांश घरों से लगा है। कुछ लोगों का घर प्रस्तावित भूमि में ही बना है जिससे वे आवासहीन हो जायेंगे।

बरसात के दिनों जतरी बहरा का पानी इन्हीं खेतों के द्वारा आगे निकासी होता है। इन जमीन के बीच में ही सेवा सहकारी समिति मर्यादित बड़े भण्डार का मुख्य मार्ग है, जिसमें कोतमरा के साथ कई गाँव के लोग अपना धान बेचने के लिये जाते हैं। ग्राम कोतमरा का 50 एकड़ का सबसे बड़ा टार तालाब का पानी इन्हीं जमीनों को सिंचित करता है। ग्राम कोटवार का कोटवारी जमीन भी इसमें शामिल है। प्रस्तावित कृषि भूमि में ही गाँव के खेतीहर मजदरों के परिवारों का पालन-पोषण होता है। प्रस्तावित कृषि भूमि के भू-अर्जन से कई कृषक भूमिहीन हो जायेंगे। बेरोजगार जायेंगे। उनके आय का जरिया समाप्त हो जायेगा। इससे उनके परिवार का भरण-पोषण मुश्किल जायेगा। उद्योग के कारण वायु एव पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है।

यही वजह है कि गांव का कोई कृषक अपनी कृषि भूमि औद्योगिक प्रयोजन के लिये नहीं चाहते हैं। इसके विरोध पूर्व में कलेक्टर और एसडीएम से लेकर शासन-प्रशासन के अफसरों को आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है, इसलिए गाँव के सैकड़ों कृषक एवं ग्रामीण भूमि अर्जन के विरोध में रैली कर कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन दे रहे है ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

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