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  • Nal Jal Yojana : नल-जल योजना ने ग्रामीणों की बढ़ाई मुसीबत, टूटी नाली-सीसी रोड से घरों में घुस रहा गंदा पानी

    Nal Jal Yojana : नल-जल योजना ने ग्रामीणों की बढ़ाई मुसीबत, टूटी नाली-सीसी रोड से घरों में घुस रहा गंदा पानी

    जनपद पंचायत बरमकेला के ग्राम पंचायत बुदबुदा में नल-जल योजना (Nal Jal Yojana) ग्रामीणों के लिए सुविधा की जगह मुसीबत बन गई है। पाइपलाइन बिछाने के दौरान कावेरी कंपनी ने गांव की नाली और सीसी रोड को क्षतिग्रस्त कर दिया, लेकिन महीनों बाद भी इसकी समुचित मरम्मत नहीं कराई गई। नाली टूटने से बारिश के पानी की निकासी बाधित है और गंदा पानी सड़कों से होते हुए ग्रामीणों के घरों तक पहुंच रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों और विभागीय अधिकारियों को लगातार सूचना देने के बावजूद जिम्मेदारों की ओर से अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

    पाइपलाइन के लिए सड़क खोदी, नाली तोड़ी और छोड़ दिया

    गांव में नल-जल योजना (Nal Jal Yojana) के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क की खुदाई की गई थी। इस दौरान नाली बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। सीसी रोड को भी नुकसान पहुंचा, लेकिन काम पूरा होने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की जिम्मेदारी जैसे भुला दी गई।

    नाली टूटने के कारण बारिश का पानी बाहर निकलने के बजाय सड़क और घरों की ओर बह रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हल्की बारिश में भी जलभराव की स्थिति बन जाती है। गंदा पानी घरों में घुसने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

     

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    शिकायत पर शिकायत, फिर भी जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी

    समस्या को लेकर ग्रामीण हेमंत पटेल, अजय चौहान और खेमानिधि प्रधान ने जून माह में जिला कलेक्टर सारंगढ़ को लिखित शिकायत दी थी। इसके अलावा कावेरी कंपनी के ठेकेदार, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों और ग्राम पंचायत सचिव पंडितराम सिदार को भी कई बार दूरभाष के माध्यम से समस्या से अवगत कराया गया।

    इसके बावजूद क्षतिग्रस्त नाली और सीसी रोड की स्थायी मरम्मत नहीं हो सकी। नल-जल योजना (Nal Jal Yojana) के नाम पर गांव में बिछाई गई पाइपलाइन के बाद ग्रामीणों को टूटी सड़क, जाम नाली और जलभराव की समस्या झेलनी पड़ रही है।

    ग्रामीणों का सवाल है कि यदि किसी योजना (Nal Jal Yojana)  के निर्माण कार्य के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी है और शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

     

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    जगन्नाथ पटेल के घर में घुस रहा गंदा पानी, जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा

    गांव में सबसे ज्यादा परेशानी जगन्नाथ पटेल के परिवार को हो रही है। उनके घर से लगी नाली क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी की निकासी पूरी तरह प्रभावित है। थोड़ी सी बारिश होते ही नाली का गंदा पानी उनके घर में भर जाता है।

    जाम नाली के कारण सांप, मेंढक और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के घर में घुसने का खतरा भी बना हुआ है। इससे परिवार में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नाली की स्थायी मरम्मत नहीं हुई तो बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    नल-जल योजना (Nal Jal Yojana) का उद्देश्य ग्रामीणों तक पानी पहुंचाना है, लेकिन बुदबुदा में इसी योजना के काम के बाद जलनिकासी व्यवस्था बिगड़ने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।

     

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    Nal Jal Yojana असली समस्या जस की तस

    ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए अब ग्राम पंचायत बुदबुदा ने नाली (Nal Jal Yojana)  की सफाई का काम शुरू किया है। इससे नाली में जमा गंदगी हटने और कुछ हद तक पानी की निकासी में सुधार होने की उम्मीद है। पंचायत की पहल से ग्रामीणों को फिलहाल थोड़ी राहत मिल सकती है।

    हालांकि, केवल नाली की सफाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई नाली और सीसी रोड की मरम्मत अभी भी बाकी है। जब तक टूटे हिस्से को व्यवस्थित तरीके से दुरुस्त नहीं किया जाता, बारिश में जलभराव की समस्या फिर खड़ी होने की आशंका बनी रहेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि सफाई के साथ-साथ क्षतिग्रस्त नाली और सीसी रोड की मरम्मत तत्काल कराई जाए।

     

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    अधिकारी बोले- पेमेंट का इश्यू है, पैसा आते ही कराएंगे मरम्मत

    मामले (Nal Jal Yojana)  में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एसडीओ बी.के. खरे ने कहा कि बुदबुदा गांव की सीसी रोड की मरम्मत कराना है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पेमेंट को लेकर कुछ समस्या है। पेमेंट मिलते ही मरम्मत का काम करा दिया जाएगा।

    अधिकारी के इस जवाब से साफ है कि ग्रामीणों को जिस मरम्मत के लिए महीनों से इंतजार करना पड़ रहा है, वह अब भुगतान की प्रक्रिया में अटकी हुई है। सवाल यह है कि बारिश के दौरान जलभराव और घरों में गंदा पानी घुसने की समस्या का सामना कर रहे ग्रामीण कब तक इंतजार करेंगे।

    नल-जल योजना (Nal Jal Yojana) के काम के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक सुविधा की मरम्मत में देरी ने योजना के क्रियान्वयन और विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित कंपनी और विभाग को तत्काल मरम्मत के निर्देश देने की मांग की है।

     

     

    बयान:
    “बुदबुदा के बारे में जानकारी है। वहां सीसी रोड की मरम्मत करवाना है। पेमेंट का थोड़ा इश्यू है। पेमेंट आते ही करवा देंगे।”
    बी.के. खरे, एसडीओ, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

     

  • Drinking Water Crisis Solution : राजधानी टाइम्स की खबर का असर, गौरडीह गांव में महीनों से बंद बोरिंग चालू

    Drinking Water Crisis Solution : राजधानी टाइम्स की खबर का असर, गौरडीह गांव में महीनों से बंद बोरिंग चालू

    Baramkela News : छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ बिलाईगढ़ Drinking Water Crisis Solution) जिले से प्रशासन की तत्परता का एक सकारात्मक मामला सामने आया है। बरमकेला जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम गौरडीह के लगभग 300 परिवारों के लिए यह सप्ताह राहत भरी खबर लेकर आया। महीनों से गहराते पेयजल संकट ( से जूझ रहे ग्रामीणों की समस्या को जब राजधानी टाइम्स छत्तीसगढ़ ने प्रमुखता से उठाया, तो सोया हुआ प्रशासन अचानक जाग उठा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने मीडिया की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर नया बोरिंग स्थापित कर ग्रामीणों को राहत प्रदान की।

    ग्राम गौरडीह में निवास करने वाले परिवारों की स्थिति पिछले कुछ महीनों से अत्यंत दयनीय बनी हुई थी। गांव की उचित मूल्य की दुकान के सामने स्थित एकमात्र मुख्य हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़ा था और बोरिंग ने भी पानी देना बंद कर दिया था। इस गंभीर जल किल्लत (Drinking Water Crisis Solution) के कारण ग्रामीणों को भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा था। मजबूरी में लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए 500 मीटर दूर दूसरे के घरों या निजी स्रोतों पर निर्भर थे। 45 डिग्री के झुलसा देने वाले तापमान में बुजुर्गों और महिलाओं के लिए पानी ढोना एक बड़ी चुनौती बन गया था।

     

    सिर्फ मिल रहा था आश्वासन Drinking Water Crisis Solution

    ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या (Drinking Water Crisis Solution) के सुधार के लिए विभाग को कई बार लिखित और मौखिक सूचना दी थी, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही मिले। मैदानी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा था। जैसे ही यह मामला स्थानीय मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हुआ, शासन के उच्च अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया।

    खबर का असर इतना व्यापक रहा कि PHE के कार्यपालन अभियंता ने तत्काल संज्ञान लेते हुए विभाग की टीम को बोरिंग पाइप और भारी मशीनों के साथ गांव भेजा। कर्मचारियों ने युद्धस्तर पर काम करते हुए नया बोरिंग (Drinking Water Crisis Solution) तैयार किया और पानी की सप्लाई सुचारू रूप से शुरू कर दी। अब गांव के लोगों को अपने ही मोहल्ले में पर्याप्त जल मिल पा रहा है। इस त्वरित प्रशासनिक सुधार (Drinking Water Crisis Solution) की ग्रामीण अब प्रशंसा कर रहे हैं, हालांकि उनका यह भी कहना है कि यदि यह काम पहले हो जाता तो उन्हें महीनों की परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।