छत्तीसगढ़

Mining Rule Violation : आर्यन मिनरल्स पर नियमों के उल्लंघन के आरोप, खनन और उत्पादन आंकड़ों पर उठे सवाल

RAIGARH News : सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जोतपुर-बोंदा क्षेत्र में संचालित आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स क्रशर (Mining Rule Violation) को लेकर अब खनन नियमों के पालन पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि क्रशर संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी वजह से क्षेत्र में खनन नियम उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2017 में इस क्रशर संस्थान को लगभग 5 हेक्टेयर भूमि पर डोलोमाइट खनन की लीज प्रदान की गई थी। इस लीज के तहत जोतपुर, दुलमपुर और मौहापाली क्षेत्र के विभिन्न खसरा नंबरों की भूमि शामिल है। लेकिन लीज मिलने के बाद से अब तक इस क्षेत्र में कितना खनन किया गया और कितनी मात्रा में खनिज का उत्पादन हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसी कारण क्षेत्र में खनन नियम उल्लंघन (Mining Rule Violation) को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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उत्पादन आंकड़ों पर स्पष्टता नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि लीज मिलने के बाद क्रशर संस्थान लगातार संचालित हो रहा है, लेकिन अब तक आधिकारिक रूप से यह जानकारी सामने नहीं आई है कि निर्धारित अवधि में कितनी मात्रा में डोलोमाइट का खनन किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खनन और उत्पादन से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। लेकिन अब तक ऐसी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इससे लोगों के बीच संदेह बढ़ रहा है और खनन नियम उल्लंघन (Mining Rule Violation) की चर्चा होने लगी है।

CSR फंड के उपयोग पर भी सवाल

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि किसी भी खनन या औद्योगिक परियोजना के संचालन के दौरान कंपनी को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत आसपास के गांवों में विकास कार्य करना होता है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक यह जानकारी स्पष्ट नहीं है कि आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स द्वारा सीएसआर मद में कितना खर्च किया गया और किन विकास कार्यों में इसका उपयोग हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कंपनी द्वारा CSR के तहत कोई कार्य किए गए हैं तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसी वजह से खनन नियम उल्लंघन (Mining Rule Violation) को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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अवैध खदानों से पत्थर खरीदने का आरोप

क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि आसपास के कुछ अवैध डोलोमाइट खदानों से पत्थर खरीदकर क्रशर संचालन किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो इससे शासन को राजस्व की हानि हो सकती है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि अवैध खनन से पत्थर लाकर क्रशर में उपयोग किया जा रहा है तो यह गंभीर मामला हो सकता है। इसी कारण खनन नियम उल्लंघन (Mining Rule Violation) की आशंका को लेकर जांच की मांग उठने लगी है।

Mining Rule Violation जांच की मांग तेज

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि खनन लीज, उत्पादन, सीएसआर फंड और कच्चे माल की आपूर्ति से जुड़े सभी पहलुओं की जांच होने से सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमों का पालन किया जा रहा है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, और यदि कहीं कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। स्थानीय लोगों का मानना है कि पारदर्शिता से ही इस तरह के विवादों को समाप्त किया जा सकता है। इसलिए अब क्षेत्र में खनन नियम उल्लंघन (Mining Rule Violation) को लेकर जांच और जवाबदेही की मांग तेज होती जा रही है।

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