छत्तीसगढ़

Mining Mafia Timarlaga Raigarh : टिमरलगा…यहां कानून घुटने टेकता है और सिस्टम ‘सलाम’,

Illegal Limestone Mining Sarangarh : रायगढ़ और सारंगढ़ की सरहदों पर स्थित (Mining Mafia Timarlaga Raigarh)  टिमरलगा आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। लेकिन यह पहचान विकास की नहीं, बल्कि विनाश की है। तस्वीरों में जो विशालकाय खदानें नजर आ रही हैं, वे किसी फिल्म के सेट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह जीवंत प्रमाण हैं उस खनिज माफिया के खौफनाक साम्राज्य का, जिसने लोकतंत्र को बंधक बना लिया है।

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यहां टिमरलगा में एक नया ‘केजीएफ’ (KGF) जन्म ले चुका है, जहां सरकार की हैसियत एक चपरासी से ज्यादा नहीं रह गई है। यहां एक नहीं, बल्कि दर्जनों ‘रॉकी’ घूम रहे हैं, जिनकी उंगलियों के इशारों पर जिले का पूरा प्रशासनिक अमला कठपुतली की तरह नाचता है।

सत्ता और सिंडिकेट का खूनी गठजोड़

सारंगढ़ तहसील के टिमरलगा और गुड़ेली क्षेत्र में कुदरत ने लाइमस्टोन का जो खजाना बख्शा था, आज वही यहाँ के निवासियों के लिए अभिशाप बन गया है। इस बेशकीमती खनिज का दोहन नहीं, बल्कि सरेआम डकैती की जा रही है। खनिज माफिया (Mining Mafia) ने यहां की जमीन को छलनी कर दिया है।

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कायदे-कानून की बात करना यहाँ अपनी मौत को दावत देने जैसा है। यहाँ न तो माइनिंग लीज की जरूरत है, न पर्यावरण क्लीयरेंस की और न ही रॉयल्टी चुकाने की जहमत उठाई जाती है। नियमों की किताब को इन माफियाओं ने उस गहरी खाई में फेंक दिया है, जहाँ से रोज हजारों टन पत्थर निकाला जा रहा है।

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हैरत की बात यह है कि नेशनल हाईवे (NH) से महज 50 मीटर की दूरी पर, लात नाले के ठीक बगल में यह अवैध साम्राज्य फल-फूल रहा है। जगदम्बा फन वर्ल्ड के पास से गुजरते हुए किसी भी राहगीर को यह तबाही नजर आ जाएगी, लेकिन सारंगढ़-बिलाईगढ़ प्रशासन के अधिकारियों की आंखों पर भ्रष्टाचार की ऐसी पट्टी बंधी है कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। क्या यह मुमकिन है कि नाक के नीचे चल रहे इस महापाप की खबर खनिज माफिया (Mining Mafia Timarlaga Raigarh)  के आकाओं के अलावा किसी को न हो?

जब वर्दी ने टेके घुटने,  एसडीएम की ‘फ्लॉप’ कार्रवाई

बीती 15 मार्च को एक ऐसी घटना हुई जिसने इस सिस्टम की सड़ांध को जगजाहिर कर दिया। एसडीएम वर्षा बंसल अपनी पूरी टीम के साथ इस ‘मौत की खदान’ में दाखिल हुईं। वहां गरजती हुई 10 पोकलेन मशीनों को जब्त किया गया। लगा कि शायद अब कानून का राज कायम होगा। लेकिन अफसोस, खनिज माफिया (Mining Mafia Timarlaga Raigarh) का रसूख इतना ताकतवर निकला कि एसडीएम की कलम की स्याही सूख गई। मशीनों की जब्ती तो हुई, लेकिन कागजों पर कोई ठोस प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सका।

खनिज विभाग, जो छोटी-छोटी चोरी पर ट्रैक्टर जब्त कर अपनी पीठ थपथपाता है, इस मामले में ‘कोमा’ में चला गया। पूरी प्रशासनिक टीम खदान के अंदर से इस तरह सिर झुकाए बाहर निकली जैसे वे किसी अपराधी को पकड़ने नहीं, बल्कि अपनी हाजिरी लगाने गए हों। यह दृश्य टिमरलगा के उस केजीएफ की गवाही देता है जहां खनिज (Mining Mafia Timarlaga Raigarh)  ही असली जज और जल्लाद है।

मशीनों का शोर और राजस्व की डकैती

गुरुवार को जब मीडिया की टीम इस खूनी साम्राज्य की पड़ताल करने पहुंची, तो नजारा दहला देने वाला था। यहाँ एक-दो नहीं, बल्कि आठ विशालकाय पोकलेन मशीनें धरती का सीना चीर रही थीं। हर दो मिनट में एक हाईवा खदान के भीतर घुसता है और पलक झपकते ही लोड होकर बाहर निकल जाता है। यह पूरा खेल इतनी फुर्ती से होता है कि मानो कोई पेशेवर सेना युद्ध स्तर पर काम कर रही हो। प्रतिदिन यहां से कम से कम 100 हाईवा माल निकाला जा रहा है।

इस खनिज माफिया (Mining Mafia Timarlaga Raigarh) ने सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया है। न रॉयल्टी पर्ची, न कोई हिसाब-किताब। जो पत्थर निकल रहा है, वह सीधे क्रशरों में खपाया जा रहा है। रायगढ़ के बड़े-बड़े ‘सेठ-साहूकार’ इन मशीनों के मालिक हैं, जिनके नाम सुनते ही प्रशासन के हाथ-पांव फूल जाते हैं। यहाँ डीजल पंप लगाकर खदानों का पानी निकाला जा रहा है और पहाड़ियों को काटकर बकायदा सडकों का निर्माण किया गया है, ताकि डकैती में कोई बाधा न आए।

खनिज विभाग की ‘अंधी’ चौकसी

मजाक की पराकाष्ठा देखिए, इस अवैध खदान से मात्र 200 मीटर की दूरी पर ‘खनिज जांच चौकी’ स्थित है। सरकारी कर्मचारी वहां बैठकर मक्खियां मारते हैं या फिर खनिज माफिया (Mining Mafia Timarlaga Raigarh) के हाईवा गिनकर अपना ‘हिस्सा’ तय करते हैं, यह जांच का विषय है। एनएच पर खड़े होकर जो तबाही साफ दिखती है, वह जांच चौकी के अधिकारियों को क्यों नहीं दिखती?

रोजाना लगभग 4000 टन लाइमस्टोन की चोरी हो रही है। अगर इसकी बाजार कीमत और रॉयल्टी का हिसाब लगाया जाए, तो यह आंकड़ा अरबों में पहुंचता है। लेकिन खनिज माफिया (Mining Mafia Timarlaga Raigarh)  के इस सिंडिकेट ने अधिकारियों के मुंह को नोटों की गड्डियों से बंद कर दिया है।

एक स्थानीय संचालक ने तो दबी जुबान में यहां तक स्वीकार किया कि “महीना” फिक्स है। हर महीने लाखों रुपए नकद अधिकारियों की टेबल पर पहुंचाए जाते हैं। जब कभी कोई नया अफसर ‘ईमानदारी’ का चोला पहनकर आता है या किसी को नजरअंदाज किया जाता है, तो दिखाने के लिए ऐसी ‘छापेमारी’ की नौटंकी की जाती है।

मुखबिरों का जाल और माफिया का ‘एक्शन’

टिमरलगा के इस अवैध साम्राज्य की सुरक्षा किसी किले जैसी है। खनिज माफिया (Mining Mafia Timarlaga Raigarh)  ने चप्पे-चप्पे पर अपने मुखबिर तैनात कर रखे हैं। जैसे ही कोई अनजान गाड़ी या मीडिया की टीम इलाके में प्रवेश करती है, संदेश बिजली की तरह मालिकों तक पहुंच जाता है। हमारी टीम के पहुंचते ही दो रसूखदार व्यक्ति, उमेश पटेल और पप्पू अग्रवाल अपनी लग्जरी क्रेटा कार से धमक पड़े। उनके तेवर ऐसे थे जैसे जमीन उनकी जागीर हो। जब उनसे जमीन के मालिकाना हक पर सवाल किया गया तो उन्होंने बेधड़क कहा- “यह गांव की जमीन है और हम सालों से यहां खुदाई कर रहे हैं।” यह स्वीकारोक्ति बताने के लिए काफी है कि उन्हें कानून का जरा भी खौफ नहीं है।

पर्यावरण की बलि और भविष्य का खेल

यह केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि पर्यावरण के साथ किया जा रहा जघन्य कृत्य है। जिस तरह से खनिज माफिया (Mining Mafia Timarlaga Raigarh)  ने जमीन को खोखला कर दिया है, वह भविष्य में किसी बड़ी आपदा को निमंत्रण दे रहा है। बताया जा रहा है कि इस अवैध खुदाई को छिपाने के लिए अब एक नया खेल खेला जाएगा। आने वाले दिनों में किसी बड़े पावर प्लांट की ‘फ्लाई ऐश’ (राख) को यहाँ पाटने के नाम पर अनुमति ली जाएगी।

पर्यावरण विभाग (Mining Mafia Timarlaga Raigarh)  भी इस खेल में बराबर का भागीदार बनेगा। अवैध उत्खनन को रोकने के बजाय, तहसीलदार और पटवारी इस उपजाऊ जमीन को ‘लो लाइंग एरिया’ घोषित कर देंगे ताकि राख डालकर इसे समतल किया जा सके। यानी चोरी भी और फिर सबूत मिटाने की सरकारी अनुमति भी!

सिंडिकेट का ‘रक्तचरित्र’ Mining Mafia Timarlaga Raigarh

रायगढ़ के बड़े क्रशर कारोबारी और सडक ठेकेदार इस खनिज माफिया (Mining Mafia) के सिंडिकेट का हिस्सा हैं। इन्होंने आपस में खदानों का बंटवारा कर लिया है। किस अधिकारी को कितनी ‘सेवा’ भेजनी है, यह सिंडिकेट तय करता है। अगर कोई अधिकारी बदलता है, तो सिस्टम नहीं बदलता, बस लिफाफे का पता बदल जाता है। यह एक ऐसी समानांतर अर्थव्यवस्था है जो छत्तीसगढ़ की जड़ों को खोखला कर रही है।

रायपुर के खनिज संचालनालय (Mining Mafia Timarlaga Raigarh)  तक इस मामले की गूंज पहुंच चुकी है। खबर है कि 15 मार्च की कार्रवाई के बाद प्रकरण दर्ज न होने से कुछ आला अधिकारी नाराज हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह नाराजगी केवल दिखावा है या सच में खनिज माफिया (Mining Mafia) पर नकेल कसी जाएगी? टिमरलगा के इस केजीएफ में रॉकी भाई जैसे माफिया तो बहुत हैं, लेकिन जनता को तलाश है उस ‘अधीर’ की जो इस साम्राज्य को ध्वस्त कर सके।

 

 

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