छत्तीसगढ़

Mahanadi Water Dispute Protest : महानदी का पानी बेचने का आरोप! कलमा बैराज पहुंचकर छग व ओडिशा के लोगों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

Sarangarh News : महानदी जल विवाद को लेकर क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में महानदी (Mahanadi Water Dispute Protest) वाटर डिस्प्यूट टिब्यूनल की टीम ने कलमा बैराज का दौरा किया था। इसके चार दिन बाद शनिवार दोपहर ‘महानदी बचाओ-जीविका बचाओ’ अभियान से जुड़े ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ताओं का एक दल यहां पहुंचा और विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने महानदी के पानी को उद्योगों को देने के बजाय आम लोगों, किसानों और मछुआरों के लिए उपलब्ध कराने की मांग उठाई। इस पूरे मुद्दे को उन्होंने महानदी जल विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन से जोड़ा।

महानदी में लगे पंप और मशीनें देखकर जताई चिंता

शनिवार दोपहर करीब 1.30 बजे ओडिशा के सामाजिक कार्यकर्ता आनंद पंडा के नेतृत्व में करीब 40 कार्यकर्ताओं का दल कलमा बैराज पहुंचा। यहां बैराज में भरे पानी का अवलोकन करते हुए उन्होंने महानदी से उद्योगों को पानी देने के लिए लगाए गए पंप और मशीनों को देखा। इसे लेकर कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की और नारेबाजी करते हुए सरकार से उद्योगों को पानी देना बंद करने की मांग की।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि महानदी के तटीय इलाकों में पानी की कमी की समस्या बढ़ रही है, जबकि नदी का पानी उद्योगों को दिया जा रहा है। इस मुद्दे को भी उन्होंने महानदी जल विवाद के विरोध प्रदर्शन (Mahanadi Water Dispute Protest) के रूप में उठाया।

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2016 से चल रहा है महानदी जल विवाद Mahanadi Water Dispute Protest

अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्ष 2016 से महानदी जल विवाद जारी है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनका आरोप है कि सरकारें इस विवाद को सुलझाने के बजाय दोनों राज्यों के लोगों को आपस में उलझाकर इसे और जटिल बना रही हैं।

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कार्यकर्ताओं ने बताया कि कलमा बैराज बनने के बाद भी सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के लगभग 15 ग्राम पंचायतों में पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। वहीं ओडिशा के महानदी तटीय क्षेत्र के करीब 18 जिले भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। इस समस्या को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार तथा छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सरकारों से हस्तक्षेप की मांग की। यह मुद्दा भी महानदी जल विवाद को लेकर चल रहे प्रदर्शन (Mahanadi Water Dispute Protest) के दौरान उठाया गया।

Mahanadi Water Dispute Protest किसानों और मछुआरों के लिए पानी की मांग

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि सबसे पहले महानदी का पानी स्थानीय लोगों को पीने के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके अलावा किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी दिया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि महानदी से बड़ी संख्या में मछुआरों की आजीविका जुड़ी हुई है, इसलिए नदी के पानी का संरक्षण और सही उपयोग जरूरी है। कार्यकर्ताओं ने महानदी वाटर डिस्प्यूट टिब्यूनल से इन तथ्यों पर ध्यान देने की अपील की और इसे महानदी जल विवाद के आंदोलन (Mahanadi Water Dispute Protest) से जुड़ा अहम मुद्दा बताया।

समुद्र के पानी के उपयोग का दिया सुझाव Mahanadi Water Dispute Protest

प्रदर्शन में शामिल ओडिशा के पूर्व केंद्रीय मंत्री ब्रजकिशोर त्रिपाठी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में समुद्र के पानी को शुद्ध करके उपयोग में लाया जाता है। उनका कहना था कि भारत में भी समुद्री पानी को मीठा बनाकर उद्योगों को दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि महानदी जैसी पवित्र नदी के पानी को उद्योगों को देना और उससे प्रदूषण फैलाना उचित नहीं है। इसलिए सरकारों को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए। यह बात भी महानदी जल विवाद के विरोध प्रदर्शन (Mahanadi Water Dispute Protest) के दौरान प्रमुखता से उठाई गई।

प्रभावित किसानों ने भी उठाई अपनी आवाज

इस प्रदर्शन में कलमा बैराज से प्रभावित किसानों ने भी हिस्सा लिया। Baramkela, Chhattisgarh, India ब्लॉक के ग्राम बरगांव के किसानों ने बताया कि बैराज निर्माण के समय उन्हें बहुत कम दर पर मुआवजा दिया गया था और अब तक बोनस भी नहीं मिला है।

किसानों का कहना है कि फसलों की सिंचाई के लिए भी कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। बरगांव गांव के लगभग 135 किसान इस परियोजना से प्रभावित बताए जा रहे हैं। किसानों की इन समस्याओं को भी महानदी जल विवाद के प्रदर्शन (Mahanadi Water Dispute Protest) के दौरान उठाया गया।

इस आंदोलन में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें रघुनाथ प्रधान, युवराज चौधरी, सुदर्शन छोटराय, गोपीनाथ मांझी, बिरंची साहू, ग्रेगुसी सामद, उमाकांत नायक, तपस्विनी मुंडा और विमल लकड़ा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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