
भाजपा नेता व खुद को मंत्री का करीबी बताने वाले का काला साम्राज्य! : नेतागिरी के आगे घुटने टेकता सिस्टम
रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में अवैध परिवहन का यह खेल अब किसी आम माफिया की पहुंच से निकलकर सत्ता की छांव में पलने वाले रसूखदारों तक जा पहुंचा है। बरमकेला इलाके में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दौड़ रहे 26 भारी वाहनों का संचालन सीधे तौर पर एक भाजपा नेता और खुद को मंत्री का करीबी बताने वाले व्यक्ति द्वारा किए जाने की चर्चा है। नेतागिरी की ऐसी भयानक धौंस और राजनीतिक संरक्षण का यह आलम है कि बरमकेला और डोंगरीपाली पुलिस से लेकर क्षेत्र के तहसीलदार और एसडीएम तक इन ट्रकों के सामने आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं। किसी भी अधिकारी में इतनी हिम्मत या रीढ़ नहीं बची है कि वे इन नियमों को रौंदने वाले वाहनों को रोक सकें या उन पर कोई वैधानिक कार्रवाई कर सकें।
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खाकी और कुर्सी पर भारी पड़ी नेतागिरी की हनक
जब जनप्रतिनिधि ही कानून के रक्षकों को अपनी जेब में रखने लगे, तो आम जनता का न्याय प्रणाली से भरोसा उठना लाजिमी है। बरमकेला इलाके में बिना तिरपाल ढंके, ओवरलोड होकर फर्राटा भर रहे इन 26 वाहनों को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन के बड़े से बड़े अधिकारी इन रसूखदारों के सामने कितने बेबस या कहें कि बिके हुए हैं। थाना पुलिस और राजस्व अमले के अफसरों के दफ्तर इन वाहनों के पहियों के नीचे दबे हुए हैं। फोन पर संपर्क करने पर चुप्पी साध लेने वाले ये अधिकारी इस बात का खुला प्रमाण दे रहे हैं कि वे इस अवैध साम्राज्य के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष साझीदार हैं। एक आम नागरिक यदि मामूली गलती कर दे, तो पुलिस का डंडा तुरंत चल जाता है, लेकिन भाजपा नेता और खुद को मंत्री का करीबी बताने वाले व्यक्ति के इन मौत बांटते ट्रकों के आगे कानून के हाथ पूरी तरह से बंधे नजर आते हैं।
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सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहा राजनीतिक अहंकार
नेतागिरी की इस खुली छूट ने इन ट्रकों के चालकों और मालिकों के सिर पर ऐसा भूत सवार कर दिया है कि वे आम जनता की जान को कुछ भी नहीं समझते। इन 26 वाहनों से लगातार गिरता कोयला और उड़ता हुआ खतरनाक काला धुआं बरमकेला के रास्तों पर चलने वाले राहगीरों, स्कूली बच्चों और दोपहिया चालकों के फेफड़ों में जहर घोल रहा है। अंधेरे और दिन के उजाले में बेकाबू रफ्तार से भागते ये वाहन आए दिन भीषण हादसों को न्योता दे रहे हैं। सड़कों पर खून के छींटे उड़ रहे हैं, निर्दोष लोग काल के गाल में समा रहे हैं, लेकिन भाजपा नेता और खुद को मंत्री का करीबी बताने वाले व्यक्ति के रसूख के आगे प्रशासन के मुंह पर जैसे ताला लग चुका है। क्या जनता की जिंदगी इसलिए सस्ती है ताकि कुछ राजनीतिक चेहरे अपनी तिजोरियां भरने के लिए ऐसे खूनी खेल खेलते रहें?
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कब तक चलेगा यह तांडव
यह सवाल अब सिर्फ एक खबर का नहीं, बल्कि बरमकेला और आसपास के पूरे इलाके के आत्मसम्मान और सुरक्षा का बन चुका है। जिस प्रकार से सत्ता और सियासत के बल पर पुलिस और प्रशासनिक अमले को पंगु बना दिया गया है, वह लोकतंत्र के मुंह पर एक करारा तमाचा है। यदि जिला प्रशासन में जरा भी नैतिकता बची है, तो उसे अपनी कुर्सियों से बाहर निकलकर इन 26 वाहनों पर तत्काल कार्रवाई करनी होगी। जनता अब और अधिक जुल्म और प्रशासनिक कायरता सहन करने के मूड में नहीं है। अगर समय रहते इस राजनीतिक कोख से पल रहे अवैध परिवहन के जाल को नहीं तोड़ा गया, तो जनता का यह सुलगता हुआ गुस्सा सड़कों पर ऐसा सैलाब बनकर फूटेगा, जिसमें बड़े-बड़े रसूख और कुर्सियां बह जाएंगी!
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