शिक्षा

गुरुजी की करतूत ने शिक्षा के मंदिर को किया कलंकित!, संयुक्त संचालक ने किया निलंबित

जिस विद्यालय में बच्चों को अनुशासन, संस्कार और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, उसी विद्यालय में प्रधानाध्यापक शराब के नशे में पहुंच जाएं तो शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां दुर्गूकोंदल विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मंगहूर के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार बेलसरिया को शराब के नशे में विद्यालय पहुंचना भारी पड़ गया। शिकायत, मेडिकल जांच और एफआईआर के बाद शिक्षा विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि प्रधानाध्यापक शासकीय कार्य अवधि के दौरान शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे थे। जिस समय उन्हें नशे की हालत में पाया गया, उस समय स्कूल में पढ़ाई का समय चल रहा था। चिकित्सा परीक्षण की रिपोर्ट ने भी इस पूरे मामले की पुष्टि की है। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की।

 

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दोपहर 3:45 बजे नशे में मिले प्रधानाध्यापक

जानकारी के अनुसार, 4 नवंबर 2026 को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मंगहूर के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार बेलसरिया के शराब के नशे में विद्यालय पहुंचने की शिकायत की गई थी। इस संबंध में थाना प्रभारी बड़गांव को लिखित शिकायत सौंपी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनका मेडिकल परीक्षण कराया। साथ ही प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज की गई।

सिविल हॉस्पिटल पखांजूर के चिकित्सा अधिकारी की ओर से जारी मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट में सामने आया कि प्रधानाध्यापक अपरान्ह 3:45 बजे शराब के नशे की हालत में पाए गए थे। यानी यह मामला केवल किसी की शिकायत या आरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट भी सामने आई। शासकीय सेवा में रहते हुए कार्य अवधि के दौरान इस तरह नशे की हालत में विद्यालय पहुंचना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन माना गया।

 

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जिला शिक्षा अधिकारी के प्रस्ताव पर हुई कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कांकेर ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। इसके बाद संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बस्तर, जगदलपुर ने मामले का परीक्षण किया। प्रथम दृष्टया अशोक कुमार बेलसरिया को दोषी मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया।

 

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निलंबन के बाद नरहरपुर बनाया गया मुख्यालय

निलंबन अवधि के दौरान प्रधानाध्यापक अशोक कुमार बेलसरिया का मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, नरहरपुर जिला कांकेर निर्धारित किया गया है। आदेश के मुताबिक, सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

 

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शिक्षकों की जिम्मेदारी पर फिर उठे सवाल

विद्यालय केवल पढ़ाई कराने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को दिशा देने वाली संस्था है। यहां प्रधानाध्यापक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में शासकीय कार्य अवधि के दौरान प्रधानाध्यापक का शराब के नशे में पाया जाना शिक्षा विभाग के अनुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह कार्रवाई दूसरे शासकीय कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि ड्यूटी के दौरान लापरवाही और सेवा नियमों का उल्लंघन करने पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है।

 

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