राजस्व कार्यों में लापरवाही पर 5 पटवारियों पर गिरी निलंबन की गाज

छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल के बीच अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। किसानों के राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित होने और सरकारी योजनाओं से जुड़े जरूरी कार्यों में संतोषजनक प्रगति नहीं मिलने पर महासमुंद जिले में पांच पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देश पर संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों ने यह कार्रवाई की है। निलंबित किए गए पटवारी बागबाहरा, बसना और सरायपाली अनुविभाग में पदस्थ थे।

 

यह भी पढ़ें : गुरुजी की करतूत ने शिक्षा के मंदिर को किया कलंकित!, संयुक्त संचालक ने किया निलंबित

 

इस कार्रवाई से जिले के पटवारी महकमे में हड़कंप मच गया है। एक तरफ प्रदेशभर में पटवारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन ने राजस्व कार्यों में लापरवाही को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। खास बात यह है कि जिन पांच पटवारियों पर कार्रवाई हुई है, उनके खिलाफ केवल हड़ताल में शामिल होने का ही उल्लेख नहीं है, बल्कि पंजीयन, पीवी सत्यापन और डीसीएस सर्वे में संतोषजनक प्रगति नहीं मिलने को भी कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

 

यह भी पढ़ें : भाजपा नेता व खुद को मंत्री का करीबी बताने वाले का काला साम्राज्य! : नेतागिरी के आगे घुटने टेकता सिस्टम

 

बागबाहरा के चार, बसना और सरायपाली से भी कार्रवाई

जारी निलंबन आदेश के मुताबिक, बागबाहरा तहसील के तीन पटवारी भंगी राम ध्रुव, कमलेश डहरे और नीरज कुमार वर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं बसना अनुविभाग के पटवारी तिलक राम चौधरी और सरायपाली अनुविभाग की पटवारी दमयंती नायक पर भी कार्रवाई की गई है। पांचों पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

 

यह भी पढ़ें :  अफसरों तक पहुंच रहा है पैसा…! बिना तिरपाल ढंके मौत बनकर सड़कों पर दौड़ रहे कोयला लोड ट्रक

 

 

किसानों के काम प्रभावित होने पर प्रशासन सख्त

दरअसल, पटवारियों की जिम्मेदारी केवल जमीन से जुड़े रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। किसानों के राजस्व संबंधी काम, भूमि अभिलेख, पंजीयन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी उन्हीं के जिम्मे होते हैं। ऐसे में इन कार्यों की प्रगति प्रभावित होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। महासमुंद में हुई यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रदेश में पटवारियों की हड़ताल के चलते राजस्व व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन की इस सख्ती को हड़ताल के बीच कामकाज दुरुस्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

यह भी पढ़ें :   किसानों के लिए बड़ी तैयारी, अनुदान पाने के लिए पूरी करनी होंगी ये शर्तें, जानें क्या बदलेगा

 

 

Back to top button