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Python Tumor Surgery : अजगर के मुंह में 200 ग्राम का ट्यूमर, साढ़े तीन घंटे चले आपरेशन ने दी नई जिंदगी

Python Tumor Surgery दूसरों को अपने शिकार के रूप में निगलने वाला अजगर खुद मौत के मुंह में पहुंच गया था। उसके मुंह में कैंसर जैसी गांठ उभर आई थी, जिसके कारण उसके लिए शिकार निगलना तो दूर, सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। समय रहते सत्यम द्विवेदी की नजर उस पर नहीं पड़ती तो उसकी जान भी जा सकती थी। अजगर के मुंह में ट्यूमर (Python Tumor Surgery) का पता चलने के बाद सत्यम ने वन विभाग से संपर्क किया और उसके उपचार के लिए पहल की।

Python Tumor Surgery : अजगर के मुंह में 200 ग्राम का ट्यूमर, साढ़े तीन घंटे चले आपरेशन ने दी नई जिंदगी

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मुंह में गांठ से खाना हुआ मुश्किल

अंबिकापुर के विश्वकर्मा मंदिर के पीछे करीब एक सप्ताह पहले लगभग 8.5 किलोग्राम वजनी इंडियन राक पाइथन का रेस्क्यू किया गया था। शुरुआत में लगा कि उसने कोई बड़ा शिकार निगल लिया है, जिससे उसका मुंह सूज गया है। लेकिन सांपों के व्यवहार और शारीरिक बनावट की समझ रखने वाले सत्यम ने गौर से देखा तो मुंह के भीतर असामान्य गांठें दिखाई दीं। अजगर कुछ खा नहीं पा रहा था। इसके बाद उसे उपचार के लिए बिलासपुर ले जाने का फैसला किया गया। जांच में मुंह का ट्यूमर (Python Tumor Surgery) सामने आया।

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250 किलोमीटर का सफर

अंबिकापुर से बिलासपुर तक करीब 250 किलोमीटर का सफर एक तड़पते बेजुबान की जान बचाने की कोशिश थी। बिलासपुर पहुंचने पर कानन पेंडारी के उप संचालक एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डा. पीके चंदन ने अजगर की जांच की। मुंह के भीतर ट्यूमर मिलने के बाद उसे आगे के उपचार के लिए पेट मेडिक्स के संचालक डा. पीयूष दुबे के पास भेजा गया। चिकित्सकों के सामने चुनौती सिर्फ गांठ निकालने की नहीं, बल्कि सर्जरी के दौरान अजगर की जान सुरक्षित रखने की भी थी।

 

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साढ़े तीन घंटे चला आपरेशन

डा. पीयूष दुबे ने आधुनिक उपकरणों और सर्जिकल विशेषज्ञता की मदद से अजगर का आपरेशन किया। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली सर्जरी में उसके मुंह से लगभग 200 ग्राम वजनी ट्यूमर निकाला गया। आपरेशन के बाद अजगर को विशेष आइसीयू में रखा गया। कुछ घंटे बाद उसकी सांसें सामान्य हो गईं। इस तरह समय पर उपचार मिलने से अजगर की जान बच गई। साढ़े तीन घंटे की सर्जरी (Python Tumor Surgery) बेजुबान जीव के लिए जीवनदान साबित हुई।

एक नजर में

  • अजगर का वजन: 8.5 किलोग्राम
  • ट्यूमर का वजन: 200 ग्राम
  • आपरेशन की अवधि: साढ़े तीन घंटे
  • अंबिकापुर से बिलासपुर की दूरी: करीब 250 किलोमीटर

 

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दूसरे राज्यों में भी हुए आपरेशन

  • मध्य प्रदेश: जून 2025 में नर्मदापुरम में घायल अजगर के सिर पर 21 टांके लगाकर उसकी जान बचाई गई।
  • कर्नाटक: सितंबर 2025 में चित्रदुर्ग चिड़ियाघर के अजगर के दुर्लभ ट्यूमर का आपरेशन बेंगलुरु में किया गया।
  • महाराष्ट्र: सितंबर 2022 में मुंबई में गंभीर रूप से घायल अजगर के चेहरे की मरम्मत के लिए प्लास्टिक सर्जरी की गई।
  • महाराष्ट्र: जून 2024 में पुणे में अजगर के पेट से तौलिया निकालने के लिए जटिल सर्जरी की गई थी।

इस घटना ने वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और समय पर उपचार की अहमियत को रेखांकित किया। सत्यम द्विवेदी की पहल और चिकित्सकों के प्रयास से एक बेजुबान जीव को नया जीवन मिला। अजगर के ट्यूमर का सफल उपचार (Python Tumor Surgery) वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उदाहरण है।

 

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