Ganesh Idol Making : गणेशोत्सव से पहले मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार
जन्माष्टमी के बाद अब गणेशोत्सव (Ganesh Idol Making) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर से लेकर गांव तक पंडाल और पूजन कार्यक्रमों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं गणेश प्रतिमाएं बनाने वाले मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। गणेश और विश्वकर्मा की प्रतिमाओं पर रंग-रोगन का काम भी तेजी से चल रहा है।

एक माह पहले से शुरू कर दिया था प्रतिमा निर्माण
इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इसे देखते हुए आसपास के मूर्तिकार करीब एक माह पहले से ही गणेश की अलग-अलग आकृतियों की प्रतिमाएं तैयार करने में जुट गए थे। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया ब्लाक अंतर्गत समीपस्थ ग्राम पिहरा के 31 वर्षीय मूर्तिकार अनिल पटेल भी बड़ी और छोटी प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
अनिल पटेल ने बताया कि इस बार उन्हें 7 से 8 फीट ऊंची बड़ी गणेश प्रतिमाएं बनाने के ऑर्डर मिले हैं। फिलहाल प्रतिमाओं में रंग-रोगन कर उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके अलावा छोटी प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं।
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बिना सांचे के हाथों से गढ़ रहे अलग-अलग आकृतियां
मूर्तिकारों की खासियत यह है कि अधिकांश प्रतिमाएं बिना सांचे के हाथों से तैयार की जा रही हैं। गणेश प्रतिमाओं को अलग-अलग डिजाइन और आकर्षक मुद्राओं में बनाया जा रहा है। किसी प्रतिमा में गणेशजी को शंख पर तो किसी में शेर पर विराजमान दिखाया गया है। वहीं कुछ प्रतिमाओं में उन्हें सिंहासन और मूषक पर बैठे हुए आकर्षक रूप दिया गया है।
तैयार प्रतिमाओं को कटंगपाली चौक और साल्हेओना चौक पर बिक्री के लिए रखा जाएगा। गणेश प्रतिमा निर्माण (Ganesh Idol Making) में कलाकारों की मेहनत अब अंतिम दौर में पहुंच गई है।
लागत बढ़ी, फिर भी अच्छी आमदनी की उम्मीद
अनिल पटेल के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार वाटरप्रूफ रंगों की कीमत बढ़ गई है। कन्हार मिट्टी, बांस, पैरा, कील सहित अन्य सामग्री जुटाने में भी अधिक खर्च और समय लगा है। इससे प्रतिमाओं की निर्माण लागत बढ़ी है।
लागत बढ़ने के कारण इस बार मूर्तियों की कीमत भी कुछ अधिक रखनी पड़ेगी। इसके बावजूद कलाकारों को गणेशोत्सव के दौरान अच्छी बिक्री और आमदनी की उम्मीद है।
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कोलकाता में सीखी मूर्ति बनाने की कला
अनिल पटेल को बचपन से ही मूर्तियां बनाने का शौक था। इसी रुचि को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने वर्ष 2008 में पश्चिम बंगाल के कोलकाता जाकर प्रसिद्ध मूर्तिकार गणेश कुम्हार के सान्निध्य में मूर्ति बनाने की कला सीखी।
अब वे अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर गणेश, विश्वकर्मा, दुर्गा और लक्ष्मी सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। मूर्तियां बनाने की कला (Ganesh Idol Making) अब उनके परिवार के लिए परंपरा के साथ आय का जरिया भी बन चुकी है।
गणेशोत्सव नजदीक आने के साथ ही मूर्तिकारों की व्यस्तता और बढ़ गई है। प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने के लिए कलाकार अंतिम तैयारियों में जुटे हैं, ताकि गणेश चतुर्थी से पहले सभी ऑर्डर पूरे किए जा सकें।
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