Ginger Farming Success : धान छोड़ अदरक ने बदली किसान की किस्मत, पौन एकड़ से साढ़े चार लाख का मुनाफा
धान की पारंपरिक खेती (Ginger Farming Success) के साथ अगर किसान बाजार की मांग वाली फसलों को अपनाएं तो कम जमीन में भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। इसका उदाहरण सरगुजा जिले के ग्राम दरिमा निवासी किसान संतोष कुमार सिंह ने पेश किया है। उन्होंने महज पौन एकड़ जमीन में अदरक की खेती कर करीब साढ़े चार लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। बेहतर आमदनी से उत्साहित किसान ने अब इस वर्ष अदरक का रकबा बढ़ाकर एक एकड़ कर दिया है।
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पौन एकड़ में 30 से 35 क्विंटल उत्पादन
किसान संतोष कुमार सिंह ने पिछले वर्ष करीब पौन एकड़ भूमि में अदरक की खेती शुरू की थी। उन्हें इस क्षेत्र से लगभग 30 से 35 क्विंटल अदरक का उत्पादन मिला। बाजार में अदरक की कीमत करीब 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिला। उत्पादन और बिक्री के बाद उन्हें करीब साढ़े चार लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
खेती से हुई इस अतिरिक्त आमदनी का असर उनके परिवार की जिंदगी पर भी पड़ा। किसान ने बताया कि अदरक की खेती से हुई कमाई से उन्होंने अपने घर का ढलाई सहित निर्माण कार्य कराया। सीमित जमीन से इतनी अच्छी आमदनी मिलने के बाद उनका भरोसा फसल विविधीकरण (Crop Diversification) पर और बढ़ गया।
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धान से ज्यादा फायदेमंद लगी अदरक की खेती
संतोष कुमार सिंह का कहना है कि उनके लिए धान की तुलना में अदरक उत्पादन (Ginger Production) अधिक लाभकारी साबित हुआ। कम क्षेत्र में बेहतर आमदनी मिलने से उनका खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। यही वजह है कि इस साल उन्होंने अदरक की खेती का क्षेत्र बढ़ाकर करीब एक एकड़ कर दिया है।
उन्होंने बताया कि राज्य शासन की ओर से किसानों को लाभकारी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक उन्नति योजना (Krishak Unnati Yojana) के तहत किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों को पारंपरिक फसल के साथ दूसरी लाभकारी फसल अपनाने में आर्थिक मदद मिल रही है।
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बाजार भाव अच्छा मिला तो बढ़ा भरोसा
किसान ने बताया कि अदरक की बिक्री के दौरान उन्हें विशेष परेशानी नहीं हुई। गुणवत्तापूर्ण उपज का बाजार में अच्छा मूल्य मिलने से मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिला। करीब 150 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिलने से किसान की आय (Farmer Income) में बड़ा इजाफा हुआ।
उनका कहना है कि किसान अगर फसल (Ginger Farming Success) का चयन बाजार की मांग को ध्यान में रखकर करें और वैज्ञानिक तकनीक अपनाएं तो कम भूमि में भी अदरक जैसी नगदी फसल से अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है।
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मल्चिंग से बची नमी, फसल को मिला फायदा
अदरक की खेती (Ginger Farming Success) की तकनीक बताते हुए संतोष कुमार सिंह ने कहा कि मार्च-अप्रैल में खेत की अच्छी तरह जुताई करने के बाद आवश्यक खाद और पोषक तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद मेड़ों पर अदरक की बुवाई की जाती है।
खेत में मल्चिंग (Mulching) करने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही खरपतवार की वृद्धि नियंत्रित होती है और फसल के बेहतर विकास में मदद मिलती है। किसान के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया जा सकता है।
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धान के साथ दूसरी फसलों को भी दें जगह
संतोष कुमार सिंह ने दूसरे किसानों से भी धान के साथ अदरक, टमाटर, मिर्च, धनिया और अरहर जैसी लाभकारी फसलों की खेती (Ginger Farming Success) अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि फसल विविधीकरण से किसान की किसी एक फसल पर निर्भरता कम होती है। इससे खेती का जोखिम घटने के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत भी तैयार होते हैं।
उन्होंने कहा कि किसान पारंपरिक खेती के साथ बाजार की मांग के अनुसार नगदी और उद्यानिकी फसलों को अपनाएं तो कम जमीन में भी बेहतर आमदनी संभव है। शासन की योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीक का लाभ लेकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
संतोष कुमार सिंह की कहानी बताती है कि अदरक की खेती (Ginger Farming Success) वैज्ञानिक तकनीक और फसल विविधीकरण का सही मेल किसान की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। पौन एकड़ में लाखों का मुनाफा कमाने के बाद अब एक एकड़ में उत्पादन की तैयारी कर रहे संतोष दूसरे किसानों के लिए भी खेती में बदलाव की प्रेरक मिसाल बन गए हैं।











