
Road Safety Raigarh बरसात के मौसम में हाईवे पर होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए रायगढ़ यातायात पुलिस ने अनोखी पहल शुरू की है। राष्ट्रीय राजमार्ग-49 और अन्य प्रमुख मार्गों पर घूमने वाले मवेशियों के गले में रेडियम रिफ्लेक्टिव बैंड लगाए जा रहे हैं, ताकि रात के समय वाहन चालकों को दूर से ही मवेशी दिखाई दें और दुर्घटनाओं से बचा जा सके। अभियान के तहत पुलिस मित्रों को भी रेडियम कॉलर बेल्ट वितरित किए गए हैं।
हाईवे पर चलाया गया विशेष अभियान Road Safety Raigarh
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में ट्रैफिक डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह और यातायात थाना प्रभारी रोहित बंजारे के नेतृत्व में रायगढ़-खरसिया राष्ट्रीय राजमार्ग-49 और कोतरारोड क्षेत्र में अभियान चलाया गया। इस दौरान सड़क और सड़क किनारे घूम रहे आवारा एवं घुमंतू मवेशियों के गले में रेडियम पट्टे लगाए गए।
रात में चमकेंगे रेडियम बैंड, घटेंगे हादसे
यातायात पुलिस के अनुसार बरसात में मवेशी अक्सर सड़क या हाईवे (Road Safety Raigarh) पर बैठ जाते हैं अथवा अचानक सड़क पार करने लगते हैं। रात में कम दृश्यता के कारण वाहन चालकों को वे समय पर नजर नहीं आते, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं हो जाती हैं। रेडियम बैंड पर वाहन की हेडलाइट पड़ते ही वे दूर से चमकेंगे, जिससे चालक पहले ही सतर्क होकर वाहन की गति नियंत्रित कर सकेंगे।
पशुपालकों और सरपंचों से की अपील
अभियान के दौरान पुलिस ने हाईवे किनारे बसे गांवों के सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और पशुपालकों से संवाद किया। उन्हें मवेशियों को खुले में सड़क पर नहीं छोड़ने, उनके गले में रेडियम पट्टे लगाने और घर या गौठान में चारा-पानी की समुचित व्यवस्था करने की समझाइश दी गई। पुलिस ने सड़क सुरक्षा को जनभागीदारी से सफल बनाने पर जोर दिया।
वाहन चालकों से भी बरतने को कहा गया एहतियात Road Safety Raigarh
यातायात पुलिस ने वाहन चालकों से बरसात और रात्रि के समय निर्धारित गति सीमा का पालन करने, सतर्कता के साथ वाहन चलाने और हाईवे पर मवेशी दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
एसएसपी बोले- सड़क सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने मवेशियों को सड़क पर खुला न छोड़ें और उनके गले में रेडियम बैंड जरूर लगाएं, ताकि मानव जीवन के साथ-साथ बेजुबान पशुओं की भी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।