बड़ी खबर

NCERT Class 8th New Book : 8वीं के छात्रों को अब पढ़ाया जाएगा ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ और ‘लंबित मुकदमों’ का पाठ

NCERT Class 8th New Book : देश की स्कूली शिक्षा (NCERT Class 8th New Book) में बड़ा बदलाव करते हुए NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इस बदलाव के तहत अब छात्र केवल न्यायालयों की संरचना या अधिकारों के सिद्धांत तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि न्याय व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों, समस्याओं और जवाबदेही के मुद्दों को भी विस्तार से समझेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह परिवर्तन विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक समझ विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

नई पुस्तक (NCERT Class 8th New Book) में न्यायपालिका की भूमिका को समझाते हुए सिस्टम की पारदर्शिता और जिम्मेदारी यानी न्यायिक जवाबदेही (Judicial Accountability) को प्रमुख अवधारणा के रूप में शामिल किया गया है। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि न्याय प्रणाली केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि लोकतंत्र के संतुलन का महत्वपूर्ण स्तंभ भी है।

भ्रष्टाचार और लंबित मुकदमों की वास्तविकता को स्थान

नई किताब (NCERT Class 8th New Book) में पहली बार न्यायपालिका के सामने मौजूद समस्याओं को खुलकर प्रस्तुत किया गया है। अध्याय में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार (Judicial Accountability) को एक गंभीर चुनौती के रूप में बताया गया है, जिससे जनता का भरोसा प्रभावित होता है। पाठ्यपुस्तक में यह समझाया गया है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी होती है।

WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16 (1)
WhatsApp Image 2026-07-14 at 21.10.16

किताब में जुलाई 2025 के एक महत्वपूर्ण बयान का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि न्यायिक संस्थानों में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार की घटनाएं सार्वजनिक विश्वास को कमजोर कर सकती हैं। छात्रों (NCERT Class 8th New Book) को यह भी बताया गया है कि न्यायपालिका की मजबूती केवल निर्णयों से नहीं बल्कि निष्पक्ष प्रक्रिया और जिम्मेदारी (Judicial Accountability) से तय होती है।

WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.07
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (1)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (1)
WhatsApp Image 2026-08-16 at 21.13.06 (2)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.35.07 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 16.26.10
IMG-20260814-WA0019
IMG-20260815-WA0012
IMG-20260822-WA0004
IMG-20260830-WA0020
IMG-20260814-WA0017
IMG-20260902-WA0013
IMG-20260815-WA0020
IMG-20260822-WA0004
IMG-20260815-WA0019

(NCERT Class 8th New Book) अदालतों में लंबित मामलों का बड़ा बोझ

नई पुस्तक (NCERT Class 8th New Book)  का सबसे चर्चित हिस्सा अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़ों को शामिल करना है। छात्रों को बताया गया है कि भारत में न्यायिक प्रक्रिया में देरी एक गंभीर समस्या है। पुस्तक के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000 मामले लंबित हैं, जबकि हाई कोर्ट्स में करीब 62.4 लाख केस और निचली अदालतों में लगभग 4.7 करोड़ मुकदमे पेंडिंग हैं।

इन आंकड़ों के माध्यम से विद्यार्थियों को न्यायिक दक्षता और न्यायिक सुधार (Judicial Accountability) की आवश्यकता समझाई गई है। देरी के प्रमुख कारणों में जजों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा बताया गया है।

जजों की जवाबदेही और शिकायत तंत्र की जानकारी

नई किताब (NCERT Class 8th New Book)  में न्यायपालिका के भीतर जवाबदेही तय करने वाले तंत्रों को भी विस्तार से समझाया गया है। इसमें CPGRAMS (सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि नागरिक न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़ी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं।

पुस्तक के अनुसार वर्ष 2017 से 2021 के बीच इस पोर्टल पर 1,600 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। इससे विद्यार्थियों को यह समझाने की कोशिश की गई है कि लोकतंत्र में संस्थाएं जनता के प्रति उत्तरदायी होती हैं और संस्थागत जवाबदेही (Judicial Accountability) बनाए रखने के लिए शिकायत प्रणाली जरूरी है।

इसके अलावा किताब में संसद द्वारा जजों को हटाने की प्रक्रिया यानी महाभियोग को भी सरल भाषा में समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि किसी भी गंभीर आरोप की स्थिति में जांच, सुनवाई और जज को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के बाद ही संसद कार्रवाई कर सकती है।

इलेक्टोरल बॉन्ड उदाहरण से समझाई शक्ति

न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में उसकी भूमिका को स्पष्ट करने के लिए नई पुस्तक में Electoral Bonds Scheme का उदाहरण शामिल किया गया है। पुस्तक बताती है कि 2018 में राजनीतिक फंडिंग को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से इलेक्टोरल बॉन्ड योजना शुरू की गई थी, जिसमें दानदाताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं होती थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया।

इस उदाहरण के माध्यम से छात्रों को बताया गया है कि न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है और नागरिकों के सूचना के अधिकार की रक्षा करना उसका दायित्व है। यह अध्याय न्यायिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संतुलन (Judicial Accountability) को व्यवहारिक उदाहरण से समझाने की कोशिश करता है।

शिक्षा विशेषज्ञों की नजर में बदलाव क्यों महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करेगा। पहले जहां पाठ्यपुस्तकें संस्थागत संरचना तक सीमित थीं, वहीं अब छात्र न्याय व्यवस्था की चुनौतियों, सुधारों और जिम्मेदारियों को भी समझ पाएंगे। नई शिक्षा दृष्टि के तहत छात्रों को केवल जानकारी देना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उन्हें जागरूक नागरिक बनाना भी उद्देश्य है। न्यायपालिका की पारदर्शिता, निष्पक्षता और जिम्मेदारी (Judicial Accountability) जैसे विषय भविष्य के मतदाताओं और नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति संवेदनशील बनाएंगे।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button