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  • Marigold Farming : धान छोड़ फूलों की खेती अपनाई, अब गितेश्वर कमा रहे पहले से दोगुना मुनाफा

    Marigold Farming : धान छोड़ फूलों की खेती अपनाई, अब गितेश्वर कमा रहे पहले से दोगुना मुनाफा

    Mahasamund Farmer Success Story : कहते हैं कि अगर किसान (Marigold Farming) बदलते समय के साथ नई तकनीक और नई सोच अपनाए, तो खेती केवल जीविका का साधन नहीं बल्कि समृद्धि का मार्ग बन सकती है। महासमुंद विकासखंड के ग्राम फूलवारी (बावनकेरा) के प्रगतिशील किसान गितेश्वर टंडन ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। पारंपरिक धान की खेती छोड़कर गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती अपनाने का उनका निर्णय आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है।

    धान की खेती में बढ़ती लागत बनी चुनौती

    एक समय था जब गितेश्वर पारंपरिक तरीके से धान (Marigold Farming) की फसल लेते थे। बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और सीमित लाभ के कारण उन्हें मेहनत के अनुरूप आय नहीं मिल पा रही थी। आमदनी सीमित होने के कारण वे खेती में कुछ नया करने का अवसर तलाश रहे थे। इसी बीच उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और नवाचार की राह चुनी।

    राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली नई राह

    वर्ष 2025-26 में गितेश्वर ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत ‘पुष्प क्षेत्र विस्तार गेंदा योजना’ (Marigold Farming) का लाभ लिया। विभाग से उन्नत पौध सामग्री प्राप्त कर उन्होंने अपनी लगभग 2 एकड़ भूमि में आधुनिक तरीके से गेंदा फूल की खेती शुरू की। उन्होंने सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक और आधुनिक कृषि यंत्रों का सहारा लिया, जिससे पानी की बचत हुई और मजदूरों पर होने वाला खर्च भी कम हो गया।

    25 हजार से सीधे 64 हजार तक पहुंची आय

    गितेश्वर की मेहनत का परिणाम आज सबके सामने है। वे अब तक लगभग 50 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन प्राप्त कर चुके हैं। उनके द्वारा उगाए गए फूलों की सप्लाई महासमुंद और रायपुर की बड़ी मंडियों में हो रही है। आर्थिक लाभ की बात करें तो जहां पहले धान की खेती (Marigold Farming) से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 25 हजार रुपये का लाभ होता था, वहीं अब फूलों की खेती से यह आय बढ़कर लगभग 64 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गई है।

    आत्मनिर्भरता की नई मिसाल Marigold Farming

    गितेश्वर टंडन की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के सही तालमेल से खेती को बेहद लाभकारी बनाया जा सकता है। आज उन्हें देखकर गांव के अन्य किसान भी गेंदा और अन्य उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। गितेश्वर अब केवल एक किसान नहीं, बल्कि एक सफल एग्री-बिजनेसमैन के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं, जिनकी कामयाबी की चर्चा दूर-दराज के इलाकों तक है।

     

     

  • Grafted Brinjal Farming : छत्तीसगढ़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती फायदे का सौदा,  1 एकड़ में  1.33 लाख का मुनाफा

    Grafted Brinjal Farming : छत्तीसगढ़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती फायदे का सौदा,  1 एकड़ में  1.33 लाख का मुनाफा

    Agriculture Subsidy Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों (Grafted Brinjal Farming) पर ले जाने और किसानों की आय दोगुनी करने के शासन के प्रयास अब रंग ला रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे सफल किसानों की कहानियां सामने आ रही हैं, जिन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती को एक लाभकारी व्यवसाय में तब्दील कर दिया है। इसी क्रम में मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम खुटेरा के एक प्रगतिशील किसान बसदेव राजपूत ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती के जरिए एक मिसाल कायम की है।

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    करीब 1.70 हेक्टेयर भूमि के स्वामी श्री राजपूत पहले पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उन्होंने बाजार की मांग और वैज्ञानिक सलाह को मानते हुए अपनी कुल जमीन में से लगभग 1 एकड़ क्षेत्र में उद्यानिकी फसल के रूप में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) करने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

    परंपरागत खेती के मुकाबले आधुनिक तकनीक का प्रभाव

    किसान बसदेव राजपूत ने अपनी इस सफलता का श्रेय उन्नत कृषि उपकरणों और तकनीकों को दिया है। उन्होंने परंपरागत सिंचाई विधियों के बजाय ड्रिप इरिगेशन सिस्टम (Drip Irrigation System) और खरपतवार नियंत्रण के लिए प्लास्टिक मल्चिंग (Plastic Mulching) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। ड्रिप इरिगेशन के उपयोग से न केवल जल संरक्षण हुआ, बल्कि उर्वरकों का सीधा उपयोग पौधों की जड़ों तक संभव हो सका, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

    प्लास्टिक मल्चिंग ने मिट्टी की नमी को बनाए रखने और हानिकारक कीटों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन तकनीकों के तालमेल से ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) में लगने वाली मेहनत और समय दोनों में काफी कमी आई।

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    शासन की योजनाओं से मिला संबल

    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चलाई जा रही कृषि कल्याणकारी योजनाओं (Agriculture Subsidy Chhattisgarh) ने बसदेव की राह और आसान कर दी। उन्हें शासन की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना वर्ष 2025-26 के अंतर्गत न केवल तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया, बल्कि लगभग 30,000 का आर्थिक अनुदान भी प्राप्त हुआ। इस सहायता राशि ने उन्हें आधुनिक संसाधन जुटाने और गुणवत्तापूर्ण हाइब्रिड पौधे खरीदने में सक्षम बनाया। विशेषज्ञों के निरंतर संपर्क में रहने के कारण उन्हें कीट प्रबंधन और उर्वरक उपयोग के सही समय की सटीक जानकारी प्राप्त हुई।

    Grafted Brinjal Farming उत्पादन और आय का गणित

    इन वैज्ञानिक प्रयासों का परिणाम बेहद उत्साहजनक रहा। श्री राजपूत को प्रति एकड़ लगभग 130 क्विंटल बैंगन का उत्पादन प्राप्त हुआ। स्थानीय और थोक मंडियों में फसल की मांग अधिक होने के कारण उन्हें 15 से 20 प्रति किलोग्राम का अच्छा थोक मूल्य प्राप्त हुआ। इस दर पर उनकी कुल फसल की बिक्री लगभग ₹1,95,000 में हुई।

    अगर लागत की बात करें तो बीज, मल्चिंग, खाद और मजदूरी मिलाकर उनकी कुल लागत लगभग ₹62,000 रही। इस प्रकार उन्हें केवल एक सीजन में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) से करीब ₹1,33,000 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह आंकड़ा पारंपरिक धान या अन्य फसलों की तुलना में कहीं अधिक है, जो यह दर्शाता है कि फसल विविधीकरण (Crop Diversification) ही किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार है।

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    ग्राफ्टेड बैंगन की विशेषता और भविष्य की संभावनाएं

    किसान श्री राजपूत का अनुभव है कि सामान्य बैंगन की तुलना में ग्राफ्टेड बैंगन (Grafted Brinjal) की प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक होती है। इसमें मिट्टी से होने वाले रोगों (Soil-borne diseases) का खतरा कम होता है और उत्पादन की अवधि भी लंबी होती है। वर्तमान में उनकी फसल से उत्पादन निरंतर जारी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी कुछ हफ्तों में 30 से 40 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त होगा, जिससे कुल शुद्ध लाभ ₹1.5 लाख के पार जाने की पूरी संभावना है।

    गांव के लिए बने प्रेरणा स्रोत

    बसदेव राजपूत की इस उपलब्धि ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि वे अब अपने क्षेत्र के रोल मॉडल बन गए हैं। उनकी सफलता को देखकर ग्राम खुटेरा और आसपास के गांवों के किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों और ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई किसान अब ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगवाने के लिए कृषि विभाग में आवेदन कर रहे हैं।

    यह स्पष्ट है कि यदि किसान वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं और मेहनत करें, तो छत्तीसगढ़ की धरती से सोना उगाया जा सकता है। बसदेव राजपूत की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि नवाचार ही कृषि को एक टिकाऊ और सम्मानजनक व्यवसाय बनाने की कुंजी है।

     

  • Chhattisgarh Tomato Farming : धान से नहीं हुई इतनी कमाई, टमाटर ने बदल दी किसान की आमदनी

    Chhattisgarh Tomato Farming : धान से नहीं हुई इतनी कमाई, टमाटर ने बदल दी किसान की आमदनी

    National Horticulture Mission : राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक कृषि (Chhattisgarh Tomato Farming) प्रणाली से जोड़ने के उद्देश्य से लगातार नई पहल कर रही है। इसी दिशा में राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) किसानों के लिए एक प्रभावी योजना साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और उन्नत बागवानी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उत्पादन और मुनाफे दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

    प्रदेश में कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें बाजार आधारित खेती और आधुनिक संसाधनों से जोड़ना है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के अंतर्गत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, गुणवत्तायुक्त बीज और आधुनिक सिंचाई पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

    टमाटर की अपनाई उन्नत खेती

    जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत टेम्पू के किसान सुनील भगत इस योजना की सफलता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आए हैं। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में टमाटर (Chhattisgarh Tomato Farming) की उन्नत खेती अपनाई और बेहतर परिणाम प्राप्त किए। विभागीय सलाह के अनुसार उन्होंने जीके देशी किस्म का टमाटर लगाया, जिससे प्रति एकड़ लगभग 9 टन उत्पादन हासिल हुआ। यह उत्पादन पारंपरिक खेती की तुलना में काफी अधिक माना जा रहा है।

    Chhattisgarh Tomato Farming कम समय में बेहतर आय

    किसान सुनील भगत बताते हैं कि वे मौसम और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए सब्जी फसलों की खेती करते हैं। वर्तमान सीजन में टमाटर (Chhattisgarh Tomato Farming) उत्पादन से उन्हें लगभग 85 हजार 500 रुपये की आय प्राप्त हुई। लागत व्यय निकालने के बाद करीब 55 हजार 500 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के तहत वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान कम समय में बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

    Chhattisgarh Tomato Farming किसानों को नई तकनीक से जोड़ रहे

    उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना है, ताकि पानी, खाद और श्रम लागत को कम करते हुए उत्पादन बढ़ाया जा सके। इसी क्रम में अब किसान ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और उन्नत पौध प्रबंधन तकनीकों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) किसानों को टिकाऊ खेती मॉडल की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    अन्य गांवों के किसान भी हुए प्रेरित

    सुनील भगत की सफलता से ग्राम पंचायत टेम्पू सहित आसपास के गांवों के किसान भी प्रेरित हुए हैं। कई किसानों ने अब पारंपरिक धान आधारित खेती के साथ सब्जी और बागवानी फसलों को अपनाने की योजना बनाई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य में बागवानी आधारित खेती किसानों के लिए अधिक लाभकारी विकल्प बन सकती है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को आधुनिक कृषि की दिशा मिल रही है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रहे हैं। आने वाले समय में यह योजना ग्रामीण विकास और कृषि आधारित रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    राज्य सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ें और आधुनिक खेती (Chhattisgarh Tomato Farming) के जरिए अपनी आय दोगुनी करने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें। उन्नत तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग का यह समन्वय प्रदेश की कृषि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है।

     

     

  • Ranchi Ormanjhi Farming Training : 47 कृषि सखियों ने झारखंड के ओरमांझी में सीखी आधुनिक खेती की तकनीकें

    Ranchi Ormanjhi Farming Training : 47 कृषि सखियों ने झारखंड के ओरमांझी में सीखी आधुनिक खेती की तकनीकें

    Jashpur News : जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड में कार्यरत 47 कृषि सखियों ने झारखंड राज्य के रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड में सफल एवं प्रगतिशील किसानों (Ranchi Ormanjhi Farming Training) के खेतों का शैक्षणिक परिभ्रमण किया। यह भ्रमण कार्यक्रम 6 जनवरी 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें कृषि सखियों को आधुनिक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

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    इस शैक्षणिक दौरे के दौरान कृषि सखियों ने झारखंड सरकार एवं भारत सरकार द्वारा सम्मानित कृषक गणशू महतो तथा प्रगतिशील (Ranchi Ormanjhi Farming Training) महिला किसान संगीता देवी के खेतों में किए जा रहे नवाचारों और आधुनिक कृषि पद्धतियों का गहन अवलोकन किया। इस भ्रमण का उद्देश्य कृषि सखियों को सफल किसानों के अनुभवों से जोड़ते हुए उन्हें नवीन तकनीकों से परिचित कराना था, ताकि वे अपने क्षेत्र में किसानों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

    परिभ्रमण के दौरान गोभी, मटर, मूली, मिर्च सहित विभिन्न साग-सब्जियों की उन्नत खेती के तरीकों की जानकारी दी गई। किसानों द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक कृषि (Ranchi Ormanjhi Farming Training) तकनीकों जैसे मल्चिंग का उपयोग, जैविक खेती की तैयारी, मृदा परीक्षण की आवश्यकता, उपयुक्त उर्वरकों का चयन, मचान खेती, ड्रिप इरीगेशन प्रणाली एवं फसल प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को कृषि सखियों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा।

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    यह प्रेरणादायक पहल कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास के नेतृत्व में तथा जिला पंचायत जशपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत कृषि सखियों की क्षमता वृद्धि करना और उन्हें नवाचार आधारित खेती से जोड़ना है।

    झारखंड सरकार द्वारा सम्मानित कृषक गणशू महतो, ग्राम सदमा (ओरमांझी) ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी साझा (Ranchi Ormanjhi Farming Training) करते हुए बताया कि वे कभी मात्र 50 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी करते थे, लेकिन वैज्ञानिक खेती की जानकारी अपनाकर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी। वर्तमान में वे आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी सुनकर कृषि सखियाँ बेहद उत्साहित और प्रेरित हुईं।

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    इसी प्रकार प्रगतिशील (Ranchi Ormanjhi Farming Training) महिला किसान संगीता देवी, ग्राम कच्चू (ओरमांझी) ने बताया कि उन्होंने लीज पर भूमि लेकर सब्जी एवं अन्य फसलों की उन्नत खेती (Ranchi Ormanjhi Farming Training) प्रारंभ की। वर्तमान में वे 8 एकड़ भूमि पर खेती कर लाखों रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। उनके अनुभवों ने महिला कृषि सखियों में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की नई ऊर्जा का संचार किया।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं जिला प्रशासन की इस संयुक्त पहल से जशपुर जिले में कृषि आधारित आजीविका को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम महिला कृषकों को सशक्त बनाते हुए उन्हें “लखपति दीदी” के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

  • Mixed Farming : बरबट्टी, करेला और टमाटर की मिश्रित खेती से किसान ने कमाए लाखों, बनी सफलता की मिसाल

    Mixed Farming : बरबट्टी, करेला और टमाटर की मिश्रित खेती से किसान ने कमाए लाखों, बनी सफलता की मिसाल

    Raigarh Agriculture : प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी और मिश्रित खेती (Mixed Farming) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव आत्मनिर्भरता और अतिरिक्त आय का बड़ा जरिया बन रहा है। रायगढ़ जिले के ग्राम जुनवानी के प्रगतिशील किसान नरेंद्र कुमार पटेल ने सीमित भूमि (Mixed Farming) पर मेहनत और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर सालाना ढाई लाख रुपये से अधिक की कमाई कर मिसाल पेश की है।

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    छोटी जोत पर बड़ी सफलता

    सिर्फ 0.400 हेक्टेयर भूमि पर किसान पटेल ने बरबट्टी, करेला और टमाटर की मिश्रित खेती (Mixed Farming Success) की। कुल उत्पादन 180 क्विंटल रहा, जिसमें बरबट्टी 15 क्विंटल, करेला 15 क्विंटल और टमाटर 150 क्विंटल शामिल थे। स्थानीय बाजार (Mixed Farming) में फसलों की कीमत लगभग 3 लाख 30 हजार रुपये रही। लागत घटाने के बाद उन्हें 2 लाख 55 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।

    वैज्ञानिक खेती बनी गेमचेंजर

    उद्यान विभाग ने बताया कि किसान पटेल ने खेती में आधुनिक तकनीक (Modern Farming Techniques), संतुलित खाद प्रबंधन, समय पर सिंचाई और प्राकृतिक उपायों का उपयोग किया। जैविक खाद, फेरोमोन ट्रैप और कीट नियंत्रण के उपायों से उनकी पैदावार बढ़ी और फसल (Mixed Farming) गुणवत्ता भी बेहतर हुई।

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    मेहनत और आत्मनिर्भरता का संदेश

    किसान पटेल ने कहा कि सही योजना और वैज्ञानिक खेती से कोई भी किसान (Mixed Farming) आत्मनिर्भर (Self Reliant Farmer) बन सकता है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान अब मिश्रित खेती और बाजारोन्मुख कृषि (Raigarh Agriculture) की ओर बढ़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह उदाहरण प्रदेश के किसानों के लिए नई दिशा बनेगा।

  • Chhattisgarh Irrigation Projects : छत्तीसगढ़ का सिंचाई संकट खत्म करेंगी 3 योजनाएं, खर्च होंगे 9.49 करोड़ रुपये

    Chhattisgarh Irrigation Projects : छत्तीसगढ़ का सिंचाई संकट खत्म करेंगी 3 योजनाएं, खर्च होंगे 9.49 करोड़ रुपये

    Chhattisgarh Irrigation Projects : छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों की जिंदगी आसान बनाने और खेती को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में तीन महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना (Chhattisgarh Irrigation Projects) की मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य को मंजूरी दी गई है। इस पर कुल 9 करोड़ 49 लाख 23 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इन योजनाओं के पूरा होने से किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी और उनकी आमदनी बढ़ेगी।

    तीन बड़े प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जशपुर जिले में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन अहम योजनाओं को चुना गया है। इनमें सबसे पहले फरसाबहार ब्लॉक की कोनपारा (दलटोली डेम) सिंचाई परियोजना (irrigation schemes in Chhattisgarh) शामिल है, जिस पर 3 करोड़ 47 लाख 21 हजार रुपये खर्च होंगे।

    दूसरी योजना है बगीचा ब्लॉक की सोरो व्यपवर्तन सिंचाई परियोजना (rural water conservation projects), जिसके लिए 3 करोड़ 46 लाख 14 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। तीसरी योजना अंकिरा तालाब सिंचाई परियोजना (modern irrigation techniques Chhattisgarh) है, जिस पर 2 करोड़ 55 लाख 88 हजार रुपये खर्च होंगे। इन तीनों योजनाओं के पूरे होने से इलाके के किसानों को पानी की स्थायी सुविधा मिलेगी।

    किसानों को सालभर मिलेगा पानी

    अब तक जशपुर जिले के किसान खेती के लिए केवल बरसात पर निर्भर रहते थे। लेकिन इन योजनाओं के पूरा होने के बाद उन्हें पूरे साल भर पर्याप्त पानी मिलेगा। खेतों में सिंचाई की सुविधा बढ़ने से खरीफ और रबी दोनों फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे खेती अधिक टिकाऊ बनेगी और किसानों की आय में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

    जल संरक्षण और फसल सुरक्षा

    नई सिंचाई परियोजना (Chhattisgarh irrigation development) के जरिए जल संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। अगर सूखे जैसी स्थिति बनती है तो किसान अपनी फसलों को सुरक्षित रख पाएंगे। जल भंडारण क्षमता बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या काफी हद तक हल होगी। इन योजनाओं से न केवल खेती को मजबूती मिलेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

    आधुनिक खेती की ओर कदम

    इन सिंचाई परियोजना (Chhattisgarh modern farming projects) से ग्रामीण इलाकों में कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। किसान आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके अधिक उत्पादन कर पाएंगे। इससे उन्हें मंडियों में बेहतर दाम मिलेंगे और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन पाएंगे। सरकार का यह कदम जशपुर जिले को कृषि विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। आने वाले समय में जशपुर जिले की ये योजनाएं किसानों की जिंदगी बदलने में अहम भूमिका निभाएंगी।