कृषि समाचार

Oil Palm Farming Chhattisgarh : खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़, ऑयल पाम खेती का बढ़ता रकबा बना नई उम्मीद

खाद्य तेल उत्पादन (Oil Palm Farming Chhattisgarh)  में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। राज्य में ऑयल पाम खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है और यह किसानों के लिए आय का नया विकल्प बनकर उभर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 10,796 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती की जा रही है, जिससे 7,315 किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। कृषि क्षेत्र में यह बदलाव मॉडल के रूप में नई पहचान बना रहा है।

राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा ऑयल पाम के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित कर रकबा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उद्यानिकी संचालक लोकेश कुमार ने दुर्ग एवं बेमेतरा जिलों का दौरा कर किसानों के खेतों का निरीक्षण किया और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान किसानों को अधिक क्षेत्र में ऑयल पाम लगाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे ऑयल पाम खेती (Oil Palm Farming Chhattisgarh) को और गति मिल सके।

निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय बागवानी मिशन, समेकित उद्यानिकी विकास कार्यक्रम तथा नेशनल मिशन ऑन ऑयल पाम के तहत संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया गया। अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई गई, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके और ऑयल पाम खेती (Oil Palm Farming Chhattisgarh) को स्थायी आय मॉडल बनाया जा सके।

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गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2012-13 से ऑयल पाम खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक राज्य में लगभग 1,394.88 टन फ्रेश फ्रूट बंच का उत्पादन दर्ज किया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 16,460.46 रुपये प्रति टन निर्धारित किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में किसानों से 22,000 रुपये प्रति टन की दर से सीधी खरीदी की जा रही है। बेहतर मूल्य व्यवस्था से किसानों का रुझान ऑयल पाम खेती (Oil Palm Farming Chhattisgarh) की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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दुर्ग जिले के ग्राम ढाबा में सुनिती देवी मढरिया द्वारा एक हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम के साथ टमाटर की अंतरवर्ती खेती तथा प्रवीण मढरिया द्वारा केले की खेती का मॉडल अधिकारियों ने देखा। यह मिश्रित खेती किसानों की अतिरिक्त आय का माध्यम बन रही है और ऑयल पाम खेती (Oil Palm Farming Chhattisgarh) को व्यवहारिक रूप से सफल बना रही है।

इसके अलावा परसदापार, चिखला, राजपुर और बेमेतरा जिले के डोंगीतराई गांव में चयनित किसानों के खेतों में ऑयल पाम रोपण, केला, आम एवं फेंसिंग कार्यों का भी निरीक्षण किया गया। किसानों को पौध, ड्रिप सिंचाई, ट्यूबवेल, फेंसिंग और अंतरवर्ती फसलों पर मिलने वाली आर्थिक सहायता की जानकारी दी गई, जिससे (Oil Palm Farming Chhattisgarh) को दीर्घकालिक कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।

राजपुर स्थित शासकीय बीज प्रगुणन प्रक्षेत्र में प्लग टाइप सीडलिंग यूनिट का निरीक्षण करते हुए इसे शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए, ताकि आगामी सीजन में किसानों को गुणवत्तायुक्त पौधे उपलब्ध कराए जा सकें। अधिकारियों का मानना है कि ऑयल पाम खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि राज्य को खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Oil Palm Farming Chhattisgarh किसानों को मिल रही बहुस्तरीय सहायता

ऑयल पाम योजना के अंतर्गत किसानों को पौध, ड्रिप सिंचाई, फेंसिंग, ट्यूबवेल तथा अंतरवर्ती खेती के लिए अनुदान दिया जा रहा है। सरकार द्वारा बाजार व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने और उच्च खरीदी दर मिलने से किसानों का जोखिम कम हुआ है। यही वजह है कि प्रदेश में ऑयल पाम खेती तेजी से विस्तार कर रही है।

Oil Palm Farming Chhattisgarh आय बढ़ाने का नया कृषि मॉडल

ऑयल पाम के साथ अंतरवर्ती फसलें जैसे केला, टमाटर एवं अन्य बागवानी फसलें किसानों को शुरुआती वर्षों में आय देती हैं। इससे लंबी अवधि वाली फसल होने के बावजूद आर्थिक स्थिरता बनी रहती है। कृषि विशेषज्ञ इसे भविष्य की टिकाऊ खेती का मॉडल मान रहे हैं।

 

 

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